पंडित दीन दयाल उपाध्याय के सपनों को करेंगे साकार :- विधानसभा अध्यक्ष ज्ञानचंद गु…


पंडित दीन दयाल उपाध्याय के सपनों को करेंगे साकार :- विधानसभा अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता
– पंक्ति में अंतिम व्यक्ति के उत्थान के लिए योजनाएं लागू
– गरीबों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने के हर संभव प्रयास
– प्रधानमंत्री मोदी की प्रेरणा से गठित हुआ समर्पण न्यास
– पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने एकात्म मानववाद के दर्शन का किया प्रतिपादन :- विजय कुमार
रोहतक, 26 सितंबर : हरियाणा विधानसभा के अध्यक्ष एवं समर्पण न्यास के प्रधान ज्ञान चंद गुप्ता ने कहा कि सरकार पंडित दीनदयाल उपाध्याय की विचारधारा पर कार्य करते हुए उनके सपनों को साकार करने का कार्य कर रही है। वे आज स्थानीय मदन लाल धींगड़ा सामुदायिक केंद्र में समर्पण न्यास द्वारा पंडित दीनदयाल उपाध्याय की 105वीं जन्म जयंती समारोह के अवसर पर आयोजित स्वैच्छिक रक्तदान शिविर में उपस्थित लोगों को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय की प्रेरणा से ही सरकार पंक्ति में खड़े अंतिम व्यक्ति को उसके अधिकार प्रदान करवा रही है और इस दिशा में लगातार कार्य किए जा रहे हैं कि किस प्रकार से गरीब लोगों की सेवा की जाए। उनके जीवन स्तर को ऊंचा उठाया जाए। ज्ञान चंद गुप्ता ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने आगे बढऩे के लिए एकात्मक मानव का मंत्र दिया और बताया कि सच्चा समाजवाद क्या है और गरीबों का उत्थान कैसे किया जा सकता है। उन्हीं के बताए हुए मार्ग पर सरकार लगातार काम कर रही है।
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि समर्पण न्यास का गठन 1997 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से ही किया गया था। समर्पण न्यास का उद्देश्य आमजन में सेवा और समर्पण की भावना पैदा करना है। इस अवसर पर लगाए गए स्वैच्छिक रक्तदान शिविर के बारे में उन्होंने कहा कि यह बेहद पुण्य कार्य है। रक्त का कोई विकल्प नहीं है अस्पतालों में रक्त उपलब्ध रहने पर जरूरतमंद व्यक्ति की जान बचाई जा सकती है।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत प्रचारक विजय कुमार ने कहा कि दीनदयाल उपाध्याय भारतीय जनसंघ के नेता और भारतीय राजनीतिक एवं आर्थिक चिंतन को वैचारिक दिशा देने वाले पुरोधा थे। उन्होंने कहा कि एकात्म मानववाद के रूप में पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने भारत की तत्कालीन राजनीति और समाज को उस दिशा में मुडऩे की सलाह दी है, जो सौ फीसदी भारतीय है। एकात्म मानववाद के इस वैचारिक दर्शन का प्रतिपादन पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने मुंबई में 22 से 25 अप्रैल, 1965 में चार अध्यायों में दिए गए भाषण में किया। इस भाषण में उन्होंने एक मानव के संपूर्ण सृष्टि से संबंध पर व्यापक दृष्टिकोण रखने का काम किया था।
उन्होंने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय मानव को विभाजित करके देखने के पक्षधर नहीं थे। वे मानवमात्र का हर उस दृष्टि से मूल्यांकन करने की बात करते हैं, जो उसके संपूर्ण जीवनकाल में छोटी अथवा बड़ी जरूरत के रूप में संबंध रखता है। दुनिया के इतिहास में सिर्फ मानव-मात्र के लिए अगर किसी एक विचार दर्शन ने समग्रता में चिंतन प्रस्तुत किया है तो वो एकात्म मानववाद का दर्शन है। वे विकेन्द्रित व्यवस्था के पक्षधर थे। वे तमाम सामाजिक क्षेत्रों के राष्ट्रीयकरण के खिलाफ थे, जिनका राष्ट्रीयकरण तत्कालीन कांग्रेस सरकारों द्वारा धड़ल्ले से किया जा रहा था। वे जानते थे कि यह देश मेहनतकश लोगों का है, जो अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए राज्य पर आश्रित कभी नहीं रहे हैं।
समर्पण न्यास के कोषाध्यक्ष रमेश गोयल ने भी पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जीवन पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विचार गोष्ठियों पत्र पत्रिकाओं व जन जागरण के माध्यम से पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचार वन का जीवन घर-घर तक पहुंचाने का कार्य समर्पण न्यास कर रहा है। इस अवसर पर हरियाणा के पूर्व मंत्री मनीष कुमार ग्रोवर, मेयर मनमोहन गोयल, समर्पण न्यास के सदस्य संदीप जोशी, न्यास के महामंत्री अजय बंसल, समर्पण न्यास के पदेन सदस्य रविंदर राजू, सीनियर डिप्टी मेयर राजकमल सहगल, महामंत्री सतीश आहुजा, डॉक्टर केदारनाथ, राजकुमार शर्मा, मदन गोयल, कर्नल राजेंद्र सुहाग, नरेंद्र खट्टर, राजबाला चहल, सुमिता भाटिया जांगड़ा, रेनू डाबला, विजय गुप्ता, सरिता नारायण, रामचेत तायल, रणबीर ढाका, पार्षद सुरेश किराड़, पार्षद राधेश्याम ढुल, तरूण सन्नी शर्मा, हैप्पी जांगड़ा, हरिओम भाली, सतीश सैनी, उषा शर्मा, बंसी विज, राजकुमार सुनारिया, नवीन ढुल, राजरानी शर्मा, आशा शर्मा, अशोक सहगल, कुलविंद्र सिंह सिक्का, सतीश चौधरी, राजकुमार सुनारिया व सत्यवान गुलिया आदि मौजूद थे।
फोटो : 05 से 12
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