स्कूलों की री-ओपनिंग और फीस पेमेंट को लेकर शहर के सीनियर एडवोकेट ने केंद्र सरकार से की ऑडिनेंस लाने की मांग,भेजा लीगल नोटिस

  • पंकज चांदगोठिया ने देश के प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, मानव संसाधन विकास मंत्री, सीबीएसई, आईसीएसई और नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी को भेजा लीगल नोटिस
  • मांग की कि पेरेंट्स की आर्थिक कठिनाइयों और बच्चों की सेफ्टी के मद्देनजर फीस, सिलेबस, टीचिंग मैथडॉलोजी सहित स्कूल एजुकेशन के सभी मुद्दों को इस ऑर्डिनेंस में कवर किया जाए

चंडीगढ़.

(आरती एम अग्निहोत्री).देशभर में बंद स्कूलों, उनकी री-ओपनिंग और फीस पेमेंट को लेकर उत्पन्न हुई अनिश्चितता के बीच, शहर के सीनियर एडवोकेट पंकज चांदगोठिया ने इस मुद्दे पर एक ऑर्डिनेंस लाने का आह्वान किया है। देश के प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, मानव संसाधन विकास मंत्री, सीबीएसई, आईसीएसई और नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी को भेजे गए एक लीगल नोटिस के माध्यम से चांदगोठिया ने मांग की है पेरेंट्स की आर्थिक कठिनाइयों और बच्चों की सेफ्टी के मद्देनजर फीस, सिलेबस, टीचिंग मैथडॉलोजी, दो अकेडमिक सेशंस के विलय सहित स्कूल एजुकेशन के सभी मुद्दों को इस ऑर्डिनेंस में कवर किया जाए।

इसकी जरूरत इसलिए है क्योंकि हर राज्य और यूटी में एजुकेशन को लेकर अलग-अलग कानून हैं।इस ऑर्डिनेंस के आने के बाद राज्य और यूटी के कानून निरस्त रहेंगे और पेरेंट्स के बीच भ्रम और भय की स्थित दूर होगी। चंदगोठिया ने कहा कि अगर ऑर्डिनेंस पास नहीं किया जा सकता तो डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट 2005 के तहत विशेष शक्तियों का प्रयोग करते हुए वैकल्पिक रूप से, ऑर्डिनेंस जैसा ही एक इमरजेंसी ऑर्डर पास किया जा सकता है।

भोपाल गैस लीक डिजास्टर एक्ट,1985 का दिया हवाला

चरण लाल साहू बनाम यूओआई, एआईआर 1990 एससी 1480 का जिक्र करते हुए चांदगोठिया ने कहा कि इस मामले में अपने सिद्धांत पैरेंस पैटरिया को सुप्रीम कोर्ट ने मान्यता दी है और कहा है कि सरकार के पास ऐसे लोगों की गार्डियनशिप कर सकती है जो अपने अधिकारों और हितों की रक्षा करने की स्थिति में नहीं हैं। ऐसी परिस्थितियों में, सरकार को इंटरफियरेंस कर उनके हितों के लिए लड़ना चाहिए। सरकार ने भोपाल गैस ट्रैजेडी के पीड़ितों को राहत प्रदान करने के लिए भोपाल गैस लीक डिजास्टर ( प्रोसेसिंग ऑफ क्लेम्ज)एक्ट,1985 को अधिनियमित किया था। सुप्रीम कोर्ट ने इसे यह कहकर बरकरार रखा कि इस मामले में अलग उपचार के लिए इस तरह के विशेष कानून को बनाने के लिए पर्याप्त आधार थे।

दि इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड एक्ट 2020 का भी किया जिक्र

ठीक उसी तरह स्कूल जाने वाले बच्चों और पेरेंट्स के संवैधानिक हितों की रक्षा के लिए इस मामले में भी तत्काल कानून बनाने की आवश्यक्ता है। साथ ही चांदगोठिया ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने यहां तक कहा है कि "एक महान अधिकार के लिए" कभी-कभी "थोड़ा गलत करने के लिए" अनुमति दी जाती है। चंदगोठिया का कहना है कि सरकार अपनी शक्तियों और कर्तव्यों से अवगत है, क्योंकि उसने पहले ही विभिन्न क्षेत्रों की कठिनाइयों से निपटने के लिए विभिन्न अध्यादेश जारी किए हैं। जैसे कि कुछ बैंक डिफॉल्टरों को प्रतिरक्षा प्रदान करने के लिए दि इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (संशोधन) अध्यादेश, 2020 अधिनियमित किया गया है।

ऑर्डिनेंस में की इसकी मांग

  1. वर्ष 2019-20 की ट्यूशन फीस और स्कूल के अन्य खर्च का महज 50 प्रतिशत की पेरेंट्स से अकेडमिक सेशन 2020-21 के लिए वसूला जाए। पेरेंट्स के पास यह सहूलियत हो कि पेरेंट्स बिना किसी जुर्माने के किश्तों में फीस दे सकें।
  2. दो अकेडमिक सालों, 2020-21 और 2021-22 को मर्ज किया जाए। बच्चे को सीधा प्रोमोट किया जाए। उसके लिए सिलेबस को रीडिजाइन किया जाए और 24 महीने के सिलेबस को 16 महीने के मुताबिक रीडिजाइन किया जाए। हायर क्लास के बच्चों के लिए जो पढ़ना जरूरी नहीं है्, उसमें 30 प्रतिशत कटौती की जाए।
  3. स्टूडेंट्स और टीचर्स की कम से कम अटेंडेंस हो और टीचिंग आवर्स की कम से कम जरूरत पर काम करना होगा। अभी काफी देर तक स्कूल नहीं खुलेंगे तो ऑनलाइन पढ़ाई को मान्यता देने की ओर कदम उठाए जाएं।
  4. इस दौरान किसी भी विवाद या समस्या का तुरंत निपटारा करने के लिए ऑर्डिनेंस के तहत विशेष पावर्स देकर एजुकेशन और एडमिनिस्ट्रेटिव फील्ड से स्पेशल नोडल अधिकारी नियुक्त किए जाएं और ऐसे सभी मामलों को कोर्ट की कार्यवाही से दूर रखा जाए।