100 बेड के जच्चा-बच्चा केेंद्र के निर्माण में हाे रही देरी, अब पुरानी बिल्डिंग में ही बनाया गया है आइसाेलेशन वार्ड

  • एचआईवी, ओपीडी, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, पाेषण केंद्र सहित सभी पर काेराेना का अटैक

पानीपत. काेराेना वायरस का विश्व की हर चीज पर किसी न किसी रूप से असर पड़ा है। लाेगाें काे कई दशकाें बाद घराें में कैद करने का काम काेराेना ने किया है। ऐसी महामारी में स्वास्थ्य सेवाएं ही जिसका राेल सबसे बड़ा है। इसमें डाॅक्टर, स्टाफ नर्स सहित अन्य स्वास्थ्यकर्मी याेद्धा की तरह मैदान में डटे हुए हैं। लेकिन अगर देखा जाए ताे काेराेना वायरस का स्वास्थ्य सेवाओं पर भी बहुत असर पड़ा है।

सिविल अस्पताल में अनेक सी ऐसी सुविधा थी, जाे इस साल से मिलनी थी या फिर इस साल से निर्माण शुरू हाेना था। लेकिन काेराेना की वजह से ऐसे कई प्राेजेक्ट और भी लंबे खींच गए हैं। इतना ही नहीं काेराेना का जनरल ओपीडी पर भी बहुत फर्क पड़ा है। पहले जाे आम दिनाें में 1000 प्लस ओपीडी हाेती थी, अब वह 500 से 600 की रह गई है। वहीं मरीजाें के लिए मास्क, साेशल डिस्टेंसिंग का पालन करना भी मरीजाें के लिए अनिवार्य कर दिया है।

जानिए काैन-काैन सी सेवा रुकी है… लाॅकडाउन के चलते काेई नया सामान या मशीन नहीं मिली

100 बिस्तर की एमसीएच विंग : सिविल अस्पताल की पुरानी बिल्डिंग काे गिराकर 100 बिस्तर की एमसीएच विंग(मदर एंड चाइल्ड हेल्थ केयर) का इस साल से निर्माण शुरू हाेना था। लेकिन इससे पहले पुरानी बिल्डिंग काे गिराना था, लेकिन मार्च में काेराेना वायरस की वजह से लगे लाॅकडाउन के कारण इसमें देरी हाे चुकी है। तीन माह की देरी पहले हाे चुकी है। इस साल ये निर्माण भी अब मुश्किल है क्याेंकि पुरानी बिल्डिंग में काेराेना वायरस के मरीजाें के लिए आइसाेलेशन वार्ड बनाया है। वहीं वहां काेराेना के सैंपल भी हाे रहे हैं। बता दें कि सरकार ने पुरानी बिल्डिंग काे एमसीएच (मदर एंड चाइल्ड हेल्थ केयर) विंग बनाने के लिए 30 अक्टूबर 2018 काे 20 कराेड़ रुपए मंजूर किए थे। इसमें आधे से ज्यादा रुपए ताे विभाग काे मिल भी गए थे। अस्पताल की पुरानी बिल्डिंग का 9 माह पहले नाप लिया गया था। ये करीब 23 हजार 425 फीट में पुरानी बिल्डिंग बनी हुई है।

ब्लड बैंक : जिले के सिविल अस्पताल में आज तक एक ब्लड बैंक नहीं खुल सका है। पिछले साल से इसकी तैयारियां शुरू हाे गई थी। उम्मीद थी की इस साल सिविल अस्पताल में ब्लड बैंक शुरू हाेगा, लेकिन ऐसा हाेता अब नहीं लग रहा। ब्लड बैंक के लिए पहली मंजिल पर लैब के सामने जगह भी फाइनल की गई थी। लेकिन प्राेजेक्ट वहीं रुक गया और लाॅकडाउन के चलते काेई नया सामान या मशीन नहीं मिली।

इन अभियानाें पर पड़ा असर :
काेराेना वायरस के चलते कई अभियानाें पर असर पड़ा है। सबसे बड़ा एचआईवी अभियान है। यह अभियान इस साल के वित्तीय वर्ष का ताे काम भी शुरू नहीं हाे सका है। क्याेंकि मार्च से ही लाॅकडाउन लगा है। 1 अप्रैल से वित्तिय वर्ष शुरू हाेता है। हर साल लगभग 100 से ज्यादा एचआईवी मरीज जिले में मिलते थे, लेकिन पिछले दाे माह काेई अभियान नहीं हुआ क्याेंकि स्कूल, काॅलेज आईटीआई सब बंद है, वहीं कर्मचारियाें की काेविड-19 में ड्यूटी लगी है। इसके अलावा बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान, कुपाेषित केंद्र बंद करके आइसाेलेशन वार्ड बनाया गया है। इसके अलावा काेई सर्जरी नहीं हाे रही, क्वालिटी प्राेग्राम सहित अन्य कार्यक्रम पर इसका सीधा असर पड़ा है।

अस्पताल काे मिले 2 वेंटिलेटर, आईसीयू के लिए डिमांड भेजी
जिले के सिविल अस्पताल के लिए सरकार ने 2 वेंटिलेटर भेजे हैं। अब स्वास्थ्य विभाग के पास वर्तमान समय में 3 वेंटिलेटर हाे गए हैं। वहीं डिप्टी एमएस डाॅ. अमित पाेरिया ने बताया कि अस्पताल में आईसीयू बनाने के लिए डिमांड भेजी है। जगह की पैमाइस हाे चुकी है। 2 हजार वर्म फीट जगह मांगी गई थी, साइट प्लान के आधार पर चीफ आर्किटेक्ट नक्शा तैयार कर देंगे। इसमें 10-12 बिस्तराें की सुविधा हाेगी। तकनीकी स्टाफ की नियुक्ति भी हाेगी। डिमांड पूरी हाेते ही कार्य शुरू हाे जाएगा।