समर्थन मूल्य बढ़ा तो ओलावृष्टि से सरसों उत्पादन घटा, तेल के भाव बढ़े

  • खोल व बावल में हुई ओलावृष्टि के कारण 15 से 18 क्विंटल तक हुआ प्रति एकड़ उत्पादन, पिछले साल हुआ था 22 क्विंटल
  • समर्थन मूल्य बढ़ने के बाद बाद 2 हजार रुपए प्रति क्विंटल बढ़ी सरसों तेल की कीमत

रेवाड़ी. कोरोना का असर बाजार पर पड़ने के बाद खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी हो गई है लेकिन इन सब के बीच जिला में सर्वाधिक खपत होने वाले सरसों के तेल की कीमतें लगातार बढ़ती जा रही है। रेवाड़ी देशभर के सरसों उत्पादक जिलों के टॉप टेन में शामिल है लेकिन इस बार मौसम की पड़ी मार के बाद यहां पर सरसों का उत्पादन पिछले वर्ष के मुकाबले कम हुआ है जिसका असर यहां के तेल बाजार पर पड़ने लग गया है। बाजार में सरसों का तेल 20 से 30 रुपए प्रति किग्रा तक महंगा हो गया है।

ओलावृष्टि के चलते महज 20 से 25 हजार मीट्रिक टन सरसों का उत्पादन
जिला में हर बार सरसों लगभग 65 हजार हेक्टेयर में सरसों की बुवाई की जाती है जबकि लगभग 40 हजार हेक्टेयर में गेहूं की बुवाई हुई है। इस रकबा में जब बेहतर उत्पादन होता है तो जिला में लगभग 1 लाख 30 से 40 हजार मीट्रिक सरसों का उत्पादन होता है लेकिन इस बार फरवरी-मार्च माह में बारिश के साथ हुई ओलावृष्टि की वजह से लगभग 20 से 25 हजार मीट्रिक टन सरसों का उत्पादन हुआ है। एक तरफ सरसों का कम उत्पादन और पिछल रबी सीजन के मुकाबले समर्थन मूल्य में हुई 425 रुपए की बढ़ोतरी का सीधा असर तेल की कीमतों पर पड़ा है। पिछले सीजन में जब सरसों का समर्थन मूल्य 4 हजार रुपए था तब रिटेल में सरसों के तेल की कीमत 90 से 95 रुपए प्रति किग्रा पर ही था। इस बार समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी के साथ कम उत्पादन होने की वजह से मांग सरसों की काफी अधिक है जिसके चलते तेल की कीमत 120 रुपए प्रति किग्रा तक पहुंच चुकी है। व्यापारियों का कहना है कि चूंकि अभी मांग लगातार बढ़ी हुई है ऐसे में आने वाले दिनों मंे ये कीमतें और अधिक भी बढ़ी है।

‘स्वदेशी अपनाओ’ की वजह से भी बढ़ी सरसों की मांग
स्वदेशी अपनाओ के चले कैंपेन के बाद भी बाजार में सरसों के तेल की मांग अच्छी रही है। ज्यादातर ग्राहक पाम या अन्य रिफाइंड की बजाय सरसों के तेल की अधिक खरीददारी कर रहे हैं जिसके चलते तेल मिलों में मांग बहुत अधिक हो चुकी है। हालांकि शहर में भी पांच बड़ी मिल है जबकि सरसों तेल का मुख्य उत्पादन अलवर जिला की खैरथल मंडी में होता है जहां पर 100 से भी अधिक तेल मिलें कार्यरत है। इन मिलों के जरिए ही नामी कंपनियों को सरसों का तेल जाता है।

जिले की मंडियों में अभी से बढ़ने लगी सरसों की डिमांड
^ इस बार जिला में सरसों का उत्पादन कम हुआ है और समर्थन मूल्य पिछले वर्ष के मुकाबले बढ़ा है। इस वजह से तेल पर लागत बढ़ी है जिसका असर तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के रूप में हुआ है। शहर की तेल मिलों में अभी से सरसों की काफी अधिक मांग है।
-नरेश कुमार, व्यापारी

मौसम से उत्पादन हुआ है प्रभावित : कृषि अधिकारी
^ कृषि विभाग के उपमंडल अधिकारी दीपक यादव ने बताया कि जिला में लगभग 65 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सरसों का बुवाई क्षेत्र था लेकिन इस बार मार्च माह में हुई बारिश व ओलावृष्टि से फसलों में काफी नुकसान है। प्रति एकड़ की बात करें तो 5 से 5 क्विंटल का असर पड़ा है।