पनामा के जंगलाें में जिंदा रहने के लिए पशुओं का मांस खाया, कीचड़ निचाेड़ कर पानी पीया, किस्मत अच्छी रही जो वतन वापस लौट सका

  • संगरौली के रजत के पिता ने जमीन बेचकर एजेंट को 35 लाख दिए, अब मजदूरी करनी पड़ रही है जबकि मां कोमा में चली गई हैं
  • जगल माफिया की गोली लगने से गुजरात के एक युवक की मौत हो गई, उस युवक की लाश को कीड़े खा रहे थे

अम्बाला. (पवन पासी). अमेरिका में डॉलर कमाने के सपने लेकर गए हरियाणा सहित देश के कई युवा ठगी के शिकार हो गए। इस सफर में उन्हें अनेक तरह की यातनाओं को झेलना पड़ा। पनामा के जंगलों में अपने साथ गए युवाओं की सड़ती लाशें देखनी पड़ी, शाकाहारी लोगों को गाय-भैंस व सूअर का मांस खाना पड़ा। इतना ही नहींं प्यास बुझाने के लिए कीचड़ निचोड़ कर पानी तक पीना पड़ा। कोई पुस्तैनी जमीन बेचकर अमेरिका गया था तो किसी ने प्लॉट को गिरवी रखकर पैसों को जुगाड़ किया था। कई परिवारों की स्थिति तो ऐसी है कि उन्होंने बेटों के भविष्य के लिए खेतीहर जमीन बेच दी और अब मजदूरी करने को मजबूर है।

बराड़ा के जलूबी से गए 24 वर्षीय अमित कुमार ने अपनी आपबीती साझा करते बताया कि उसने अमेरिका जाने के लिए एजेंट को 15 लाख रुपए दिए थे। वह मुंबई से एक दिन में ही इक्वाडोर पहुंच गया था लेकिन मैक्सिको में अमेरिका के बाॅर्डर तक पहुंचने में साढ़े पांच महीने लग गए। इक्वाडोर से उसे कोलंबिया और वहां से पनामा भेजा गया जहां जंगलों से गुजरते समय उसपर फायरिंग भी की गई। इस दौरान गुजरात के एक युवक की गोली लगने से मौत हो गई। पीछे से आए दूसरे बैच के लोगों ने उसे बताया कि उस युवक की लाश को कीड़े खा रहे थे। अमित ने बताया कि जब उसने मैक्सिको के तेजवाना बाॅर्डर को जब क्रॉस किया तो वहां अमेरिकी आर्मी ने पकड़ लिया। वह जेल में छह से सात महीने तक रहा। उसे 1 जून को अमेरिका से अमृतसर डिपोर्ट कर दिया गया। वापस लौटन के बाद उसे ऐसा लग रहा है जैसे उसका नया जन्म हुआ है।

मां कौमा में, पिता को करनी पड़ रही मजदूरी

गांव संगरौली के निवासी रजत कुमार के पिता रामकुमार ने बताया कि मेरे दो बेटे हैं। तीन साल पहले दोनों बेटों को एजेंट एजेंशवर के माध्यम से अमेरिका भेजा था। एजेंट ने एक नंबर में बेटों को अमेरिका भेजने की बात कही थी लेकिन हमारे साथ धोखा हुआ। एजेंट ने मैक्सिको की दीवार से बेटे रजत व भूपेंद्र को अमेरिका में प्रवेश करवाया, जहां दोनों को पुलिस ने पकड़ लिया। अमेरिका की कोर्ट में केस लड़ा तो 10 लाख रुपए खर्च हो गए। 35 लाख रुपए एजेंट पहले ही हड़प चुका था। एजेंट की धोखाधड़ी से मानसिक और आर्थिक नुकसान सहना पड़ा। दो एकड़ जमीन बिक चुकी है। अब मैं खुद मजदूरी करके गुजारा कर रहा हूं। रजत की मां भी ये सदमा सहन नहीं कर पाई और कोमा में चली गई थी।

अमेरिका जाने के लिए जमीन बेचकर एजेंट को दिए 18 लाख

ढांड निवासी मेजर सिंह ने बताया कि अमेरिका जाने के लिए उसने जमीन बेचकर साढ़े 13 लाख एजेंट को दिए। 26 मार्च 2019 को उसे दिल्ली एयरपोर्ट से एडिशबाबा नाम के देश भेजा गया। उसके बाद कई देशों व जंगल के रास्तों से तीन महीनों में मैक्सिको पहुंचा। इसके बाद वहां के माफिया ने उसे अमेरिका की दीवार कुदवाया और उसे अमेरिका पुलिस ने पकड़ लिया। पासपोर्ट न होने के कारण उसे एक साल जेल में रहना पड़ा और तीन लाख रुपए अमेरिका की कोर्ट में केस लड़ने में खर्च हो गए। एजेंट की वजह से उसे 18 लाख रुपए गंवाने पड़े।

13 लाख एजेंट को देकर गया था अमेरिका

चूहड़माजरा निवासी मनीष कुमार ने बताया कि अमेरिका जाने के लिए उसने एजेंट को 13 लाख रुपए दिए। चार देशों का सफर कर वह इकवाडोर कवीटो पहुंच गया। वहां से जंगल के रास्ते मैक्सिको और फिर दीवार फांदकर अमेरिका में प्रवेश किया, जहां पुलिस ने पकड़ लिया। पासपोर्ट नहीं होने के कारण आठ महीने जेल में रहना पड़ा। इसके साथ ही कोर्ट केस में उसके तीन लाख रुपए खर्च हो गए।

रिश्तेदार के झांसे में आकर 35 लाख रुपए एजेंट को दिए

सफीदों के हाट गांव निवासी रणबीर सिंह ने बताया कि 2019 में उसके इकलौते बेटे हरदीप ने 12वीं के बाद आईटीआई पास कर ली थी। उसने पानीपत में रहने वाले एक रिश्तेदार से बात की कि उसके बेटे को कहीं जाॅब लगवा दे। रिश्तेदार ने सुझाव दिया कि उनकी जानकारी में पानीपत में एक कार्यालय है, जहां से युवकों को विदेशों में भेजा जाता है। इसके बाद उसने ओमप्रकाश नाम के व्यक्ति को 35 लाख रुपए दिए। एजेंट ने 5 मार्च 2019 को हरदीप को समुद्री जहाज के माध्यम से अमेरिका भेज दिया लेकिन पासपोर्ट अपने पास रख लिए। अमेरिका में पहुंचते ही हरदीप को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया।