जांच की तैयारी, सूचना आयुक्त ने लिखा- डीसी खुद देखें केस

  • 2013 में ऐतिहासिक टंकी को तोड़ा गया था, जांच में गड़बड़ी मिली, मगर कार्रवाई नहीं
  • 7 साल पहले हुई लाखों की टंकी बेचने में गड़बड़ी

रेवाड़ी. ऐहतिसिक टंकी तोड़कर बेचने के 7 साल पुराना मामला नगर परिषद अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए गले की फांस बना हुआ है। अब सूचना आयुक्त ने इस मामले में जांच के निर्देश दिए हैं। डीसी को लिखा है कि वे मामले को खुद देखें। वहीं शिकायतकर्ता अब एफआईआर की मांग कर रहे हैं। बता दें कि वर्ष 2013 में नप द्वारा तोड़ी गई ऐतिहासिक टंकी को बेचने में गोलमाल के आरोपों के चलते नप की खूब किरकिरी होती रही। इस मामले में सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत जानकारी नहीं देने के चलते नप सवालों में है। करीब दो सालों से पूरा जवाब नहीं दिया गया। बल्कि रिकॉर्ड को लेकर अलग-अलग जवाब दिए जाते रहे हैं। जबकि नप अधिकारियों को सूचना आयुक्त ने कारण बताओ नोटिस तक जारी किए और जुर्माना की हिदायत भी दी।

जेई, एमई, सचिव व पार्षद तक पर आरोप सिद्ध हुए
वार्ड-16 में स्थिति एक ऐतिहासिक टंकी को वर्ष 2013 में नप अधिकारियों की ओर से तुड़वा दिया। वर्ष 2014 में टंकी तोड़े जाने में गोलमाल के आरोप लगने शुरू हो गए। अधिकारियों पर आरोप लगे कि टंकी तोड़ने से निकले अच्छे खासे तांबा और लोहे को इधर-उधर करके लाखों रुपए का गड़बड़झाला हुआ है। तत्कालीन डीसी ने आरोपों की जांच की जिम्मेदारी तत्कालीन एसडीएम को सौंपी। शिकायतकर्ता साकेत धींगड़ा के अनुसार जांच रिपोर्ट में गोलमाल साबित हो गया था। जेई, एमई, सचिव व पार्षद पर भी आरोप सिद्ध हुए, मगर बाद में उन पर किसी तरह की कार्रवाई नहीं हुई।

{मामले में कई आरटीआई लगाई जा चुकी हैं तथा कुछ के जवाब दिए भी गए हैं। आरटीआई कार्यकर्ता साकेत धींगड़ा का कहना है कि उस समय काम के लिए किसी प्रकार के टेंडर नहीं किए गए थे, बल्कि कुटेशन ली गई थी। उस स्थान पर सामुदायिक भवन बनना था। आरटीआई में उस भवन के प्रस्ताव की सत्यापित कॉपी मांगी है।
{दूसरा जेई द्वारा रिकार्ड को एमबी में दर्ज किए जाने की बात कही गई। उस एमबी की सत्यापित कॉपी भी उपलब्ध नहीं कराई गई है। उस समय नगर परिषद में 35 हजार रुपए की जी-8 काटकर रसीद दी थी। उस रसीद की कॉपी भी नहीं दी गई।

उक्त सत्यापित कॉपियों के लिए 9 अक्टूबर 2018 को आरटीआई लगाई गई थी, मगर सूचना अभी तक नहीं दी गई है। जबकि नप अधिकारियों की ओर से बार-बार यही बात दोहराई जाती रही है कि रिकार्ड उपलब्ध है।

दोषियों पर दर्ज हो एफआईआर
आरटीआई कार्यकर्ता साकेत धींगड़ा का कहना है कि सूचना आयुक्त नरेंद्र सिंह यादव ने 22 मई को निर्देश दिए हैं कि दो सप्ताह के अंदर सूचना दी जाए। इसके अलावा इस मामले में जांच के भी निर्देश दिए हैं, जिसे डीसी खुद देखेंगे। शनिवार को डीसी को इसकी एक कॉपी भी भेजी गई है। इस मामले में दोषी लोगों पर एफआईआर होनी चाहिए।