एग्रीकल्चर फीडर से जुड़ी ढाणियों की अभी तक नहीं हुई बिजली आपूर्ति बहाल, पानी के लिए हुई परेशानी

  • 10 दिन पहले आए तेज अंधड की वजह से गोठड़ा सब डिविजन में सबसे अधिक टूटे थे पोल, अब निगम के पास पोल की भी हुई कमी

रेवाड़ी. जिले में करीब 10 दिन पहले आए तेज अंधड की वजह से बड़ी संख्या में बिजली के पोल टूटने व ट्रांसफार्मर गिरने की वजह से ढाणियों में गुल हुई बिजली अभी तक बहाल नहीं हुई है। आलम यह है एक सप्ताह से ज्यादा का समय बीतने के बाद भी कई फीडरों में तो अभी मरम्मत का कार्य तक शुरू नहीं हो पाया जिसकी वजह से ढाणियों में रहने वाले परिवारों के लिए पानी की भी व्यवस्था करना मुश्किल हो गया है। बिजली आपूर्ति ठप होने की वजह से ढाणियों में पानी के लिए लोगों को गांवों में आना पड़ रहा है।

बिजली निगम की तरफ से गांवों की घरेलू सप्लाई के लिए अलग और कृषि के लिए अलग फीडर निकाले हुए हैं। कृषि फीडरों को सामान्यत: 8 से 10 घंटे तक बिजली दी जाती है जबकि घरेलू सप्लाई के लिए यह दोगुना समय है। अधिकतर गांवों में ऐसी बड़ी आबादी है जो कि अपने मकान बनाकर खेतों में रहते हैं और ये ढाणियां अभी भी कृषि फीडरों से जुड़ी हुई है। इनके लिए घरेलू फीडर की सप्लाई नहीं होने से इनको कृषि फीडर से ही मिलने वाली बिजली से काम चलाना पड़ता है। अब बीते शुक्रवार को आए अंधड-बारिश की वजह से सभी क्षेत्रों के कृषि फीडरों को नुकसान पहुंचा है। घरेलू फीडरों में तो निगम की तरफ से आपूर्ति बहाल कर दी गई है लेकिन अभी तक कृषि फीडरों के लिए आपूर्ति बहाल नहीं हुई है। ऐसे मंे इन ढाणियों में रहने वाले परिवारों के लिए बिजली के बिना समय व्यतीत करना बेहद मुश्किल हो गया है। एक सप्ताह से बिजली नहीं आने के कारण इन्वर्टर भी पहले ही ठप हो चुके हैं अब केवल बिजली की आपूर्ति होने पर समाधान संभव है।

गांवों में जाकर लाना पड़ रहा है पानी
खोल क्षेत्र में बड़ी आबादी ढाणियों में रहती है और इन परिवारों को अब घरेलू आवश्यकता से लेकर पशुओं के लिए पानी की व्यवस्था करने में पसीने आ रहे हैं। प्रतिदिन इसके लिए उन्हें या तो पानी का टैंकर मंगाना पड़ा रहा है जिसके लिए उन्हें शुल्क चुकाना पड़ रहा है। कुछ परिवार खुद ही गांवों में चलकर साधन की व्यवस्था करके पानी ले जाना पड़ रहा है और ऐसा पिछले कई दिनों से चल रहा है।

जनस्वास्थ्य विभाग भी बेखबर
ढाणियों में पेयजल व्यवस्था के लिए भी जनस्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से बेखबर है। गांवों में काफी हद तक पेयजल आपूर्ति बहाल हो चुकी है लेकिन ढाणियों की पेयजल व्यवस्था के लिए कोई कदम नहीं उठाए हैं। विभाग की तरफ से गांवों में टैंकर भेजने का प्रावधान है लेकिन जब गांवों में बिजली आपूर्ति ठप भी तब भी विभाग की तरफ से कोई टैंकर पानी के नहीं भेजे गए। ऐसे में लोगों को खुद ही अपने स्तर पर पानी की व्यवस्था करनी पड़ी।

नुकसान अधिक होने से बदलने में लग रहा समय
एसडीओ परिक्षित कुमार ने बताया कि घरेलू सप्लाई पूरी तरह से चालू की जा चुकी है, अब एग्रीकल्चर फीडर के क्षतिग्रस्त पोल बदलने का काम शुरू कर दिया गया है। नुकसान काफी अधिक होने के कारण इनको बदलने में समय लग रहा है। वहीं बाहरी राज्यों के श्रमिक चले जाने से भी दिक्कत आ रही है।