अरावली की पहाड़ियों पर किया जाएगा बरसाती जल संचयन

  • रेवाड़ी के 40 गांवों में पहाड़ियां अरावली में, शुरूआत में कुछ गांव किए जाएंगे चयनित

रेवाड़ी. हरित हरियाली और पर्यावरण को सहेजने के लिए अब अरावली की पहाड़ियों में भी बरसाती जल का संचयन किया जाएगा। इसे लेकर वन विभाग की ओर से अरावली क्षेत्र में आने वाले गांवों की पहाड़ियों पर वर्षा जल को रोकने के लिए छोटे ड्रेनेज बनाए जाने की तैयारी है।
ऐसा होने से बरसात का पानी बेकार बहकर नीचे मैदानी इलाकों में नहीं आएगा, बल्कि उस जल के आसपास खड़े पौधों में भी हरियाली आ जाएगी। इससे अरावली क्षेत्र को हरित बनाया जा सकेगा। वन विभाग की ओर से यह पहल इस बार इनमें से कुछ ही गांवों को चयनित करने का प्रयास है।

व्यर्थ नहीं बहेगा वर्षा जल, पहाड़ी वनस्पतियों को मिलेगा पानी
अक्सर देखने में आया है कि पहाड़ों के ऊंचाई वाले समतल स्थान पर बड़ी संख्या में पहाड़ी वनस्पतियां होती हैं, लेकिन वे पानी के अभाव में सूख जाती हैं। छोटे-बड़े पौधे भी पानी की कमी से सूखने लग जाते हैं। ऐसे में पहाड़ियां भी हरियाली रहित होने लगी हैं। इसकी एक वजह ये भी है कि पहाड़ों पर जल संचयन के लिए टांके या छोटे ड्रेनेज नहीं होने से बरसाती पानी व्यर्थ बहकर मैदानी क्षेत्रों में चला जाता है। इससे इन वनस्पतियों को पानी नहीं मिलता है।

छोटे ड्रेनेज बनाकर रोकेंगे पानी

ये गांव अरावली में : जिले में अरावली पहाड़ियों की बात करें तो कुंड, खोल, मनेठी, नांधा, टांकड़ी, राजगढ़, कनुका सहित लगभग 40 गांव आते हैं। इस बार इनमें से कुछ गांवों की पहाड़ियों पर वन विभाग की ओर से ड्रेनेज(खाईया) खोदी जाएगी। इससे न केवल वर्षा जल संचयन होगा, बल्कि इन ड्रेनेज में पानी रूकेगा तो आसपास की वनस्पतियां हरी-भरी हो जाएगी।

पहाड़ियां बनेंगी ग्रीन, वर्षा जल भी संरक्षित
^अरावली पहाड़ियों के ऊंचाई वाले समतल स्थान पर ड्रेनेज बनाने की तैयारी है। पहले चरण में अरावली में शामिल कुछ गांवों को इसमें शामिल किया जाएगा। इन गांवों की पहाड़ियों पर ड्रेनेज बनाने से एक तो बरसात का पानी बेकार नहीं जाएगा। पानी इन ड्रेनेज में रोका जा सकता है। इससे पहाड़ियां भी ग्रीन होंगी और पर्यावरण को भी संरक्षित किया जा सकता है। -सुंदरलाल, डीएफओ, रेवाड़ी।