68 दिन के लॉकडाउन में पर्यावरण स्तर सुधरा हवा से लेकर नदियों का जल भी हो गया निर्मल

रेवाड़ी. आज विश्व पर्यावरण दिवस है। कोरोना संक्रमण के चलते 68 दिन तक लॉकडाउन रहा। राहत की बात ये है कि इस बार पिछले कई सालों के मुकाबले में पर्यावरण स्तर काफी सुधरा है। आबोहवा भी कई दशक पहले जैसी हो गई। आसमान तक साफ हो गया। इसकी वजह लॉकडाउन के दौरान ट्रैफिक कम रहने के साथ ही उद्योग-धंधे भी बंद रहना है। ऐसे में पर्यावरणविद् भी मानते हैं कि सही मायने में इस बार पर्यावरण दिवस सार्थक हुआ है। हर तरफ निर्मल हवा होने से घर के नजदीक चिड़िया और अन्य पक्षियों ने भी आश्रय स्थल बना लिए। ऐसा दशकों में पहली बार हुआ है जब घर के आंगन और खिड़कियों में चिड़िया बैठे हुए दिखाई दे जाती है।

पर्यावरण प्रेमी भी अब इस स्तर को बनाए रखने के लिए ज्यादा से ज्यादा संख्या में पेड़-पौधे लगाने पर फोकस कर रहे हैं। वहीं वन विभाग की ओर से भी हरियाली को बनाए रखने के लिए 10 क्लस्टर के 50 गांवों में बड़ी संख्या में पौधे लगाने के साथ ही जल शक्ति अभियान और पौधगिरी में भी पौधे उपलब्ध कराए जाएंगे।

पौधरोपण को बनाना होगा जन अभियान : कंवरसिंह
पर्यावरणीय व्यवस्था की मजबूती के लिए ही पर्यावरण संरक्षण अधिनियम लागू हुआ था। पर्यावरण में जल, मृदा, वन व वृक्षाच्छादित क्षेत्र, हिम क्षेत्र, नम भूमियां, वर्षा जल, मरुस्थल, पर्वत, पठार और मैदान आदि मुख्य स्थान रखते हैं। लेकिन वर्तमान में इन सभी संसाधनों का तेज गति से दोहन हाे रहा है। ऐसे में पर्यावरण को सहेजने के लिए सभी को मिलकर प्रयास करने होंगे। पौधरोपण अभियान को जन अभियान बनाना अति आवश्यक है। इसके अलावा अरावली क्षेत्र में पहाड़ियों पर धोंक का पौधा रोपित किया जाए।