20 जून तक बाढ़ नियंत्रण की योजनाओं को पूरा करने के निर्देश, 522 स्थानों पर होता है बरसात में जल संचय

  • हर सप्ताह मौके पर जाएंगे डीसी,

पानीपत. प्रदेश के सभी जिलों में 20 जून तक प्रदेश के सभी जिलों में बाढ़ नियंत्रण की विभिन्न अल्पावधि योजनाओं को पूरा किया जाएगा। ताकि माॅनसून के आगमन से ठीक पहले सभी तरह की तैयारी पूरी कर ली जाएंगी।

सीएम मनोहर लाल ने गुरुवार को सभी डीसी को इन योजनाओं पर कार्य तेज करने और स्थलों का व्यक्तिगत रूप से दौरा करने के निर्देश दिए हैं ताकि इन योजनाओं को मानसून शुरू होने से पहले समय रहते पूरा किया जा सके। शहरी एवं ग्रामीण ड्रेनों की सफाई करने सहित बाढ़ नियंत्रण की चल रही योजनाओं और अन्य बाढ़ नियंत्रण उपायों पर 20 जून तक कार्य पूरा हो जाना चाहिए।

उन्होंने यमुनानगर और करनाल जिलों में नदियों के तटों को सुदृढ़ किया जाना सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए ताकि बाढ़ की संभावना को रोका जा सके।

राज्य में कुल 833 शहरी एवं ग्रामीण ड्रेनों में से 588 ड्रेनों की सफाई के लिए पहचान की गई है। मनरेगा के तहत ड्रेनों की सफाई का कार्य तेजी से किया जा रहा है। राज्य में लगभग 522 ऐसे अस्थायी स्थलों की पहचान की गई है जहां माॅनसून के दौरान जल संचय की संभावना है।

सीएम ने सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग को विशेष रूप से कैथल, कुरुक्षेत्र एवं रतिया और उन अन्य क्षेत्रों, जहां बारिश के दौरान भारी मात्रा में पानी जमा हो जाता है, इनमें रिचार्जिंग शाफ्ट के निर्माण के लिए एक व्यापक योजना तैयार करने के निर्देश दिए। सीएम 6 को सुबह 11 बजे केयू और संबद्ध कॉलेजों के छात्रों, फैकल्टी से पोस्ट कोरोना आत्मनिर्भर भारत विषय पर डिजिटल माध्यम से अपने विचार साझा करेंगे।

हर जिले में एक ही छत के नीचे होंगे कई टैस्ट: सीएम मनोहर लाल ने राज्य के प्रत्येक जिले में केंद्रीकृत, बहुउद्देशीय परीक्षण सुविधा के लिए राष्ट्रीय परीक्षण और अंशशोधन प्रयोगशाला प्रत्यायन बोर्ड (एनएबीएल) द्वारा मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं की स्थापना के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, ताकि इन प्रयोगशालाओं में कृषि, खाद्य, मिट्टी, पर्यावरण, स्वास्थ्य और पानी आदि से संबंधित मानकों का परीक्षण एक ही छत के नीचे किया जा सके। वर्तमान में करनाल, गुड़गांव, कुरुक्षेत्र और कैथल जिलों में केवल चार एनएबीएल मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाएं हैं, लेकिन यहां केवल पीने योग्य पानी की गुणवत्ता का परीक्षण होता है। अब ये चार प्रयोगशालाएं बहुउद्देशीय परीक्षण प्रयोगशालाओं में अपग्रेड की जाएंगी।