लॉकडाउन के दौरान वेतन भुगतान कंपनी और कामगारों के बीच का मामला: केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में कहा

नई दिल्ली। लॉकडाउन के दौरान कारखानों में लगे मजदूरों के वेतन और मजदूरी के भुगतान को लेकर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि लॉकडाउन अवधि के दौरान श्रमिकों को मजदूरी का भुगतान नियोक्ता और कर्मचारियों के बीच का मामला है। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने माना कि इस संबंध में नियोक्ताओं और श्रमिकों के बीच कुछ बातचीत होनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक अंतरिम आदेश पारित किया कि वेतन के पूर्ण भुगतान के लिए 29 मार्च की अधिसूचना के अनुपालन में विफलता के लिए नियोक्ताओं के खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए।

वेतन भुगतान पर केंद्रीय गृह मंत्रालय की 29 मार्च की अधिसूचना के खिलाफ जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस एसके कौल और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने गुरुवार को की। इस मामले पर जस्टिस कौल ने कहा कि, हम 29 मार्च की अधिसूचना से चिंतित हैं। यह 100 प्रतिशत भुगतान और अभियोजन की मांग करता है। हमारे पास इस पर आरक्षण है। इस अवधि के लिए कुछ समाधान निकालने के लिए कुछ चर्चा होनी चाहिए। पीठ ने कहा कि आवश्यकता के अनुसार वेतन का 50 प्रतिशत भुगतान किया जा सकता था, लेकिन आपकी अधिसूचना ने 100 प्रतिशत वेतन का भुगतान करने को मजबूर कर दिया. यह 50 से 75 प्रतिशत के आसपास हो सकता था. ऐसे में सवाल यह है कि क्या आपके पास 100 प्रतिशत भुगतान का आदेश जारी करने कि शक्ति है. साथ ही अगर भुगतान करने में कोई असफल रहता है तो उसके खिलाफ मुकदमा चलाने कि शक्ति है.

केंद्र ने अदालत को बताया कि उसने श्रमिकों के पलायन को उनके कार्यस्थलों से उनके घरों जाने से रोकने के लिए मजदूरी का पूरा भुगतान करने का आदेश दिया था। हम चाहते हैं कि अर्थव्यवस्था को फिर से शुरू किया जा सके। नियोक्ताओं और कर्मचारियों के बीच इस पर बात हो कि, लॉकडाउन अवधि के दौरान कितना वेतन का भुगतान किया जा सकता है। पीठ ने हालांकि 100% वेतन का भुगतान करने के लिए दिशा- निर्देश की व्यवहार्यता के बारे में चिंता व्यक्त की जबकि उद्योगों और प्रतिष्ठानों को बंद करने के लिए मजबूर किया गया था। कोर्ट ने कहा कि, हम 29 मार्च की अधिसूचना से चिंतित हैं। यह 100 प्रतिशत भुगतान और अभियोजन की मांग करता है। हमारे पास इस पर आरक्षण है।इस अवधि के लिए कुछ समाधान निकालने के लिए कुछ चर्चा होनी चाहिए। इस मामले पर फैसला 12 जून को सुनाया जाएगा।