मंडी में पड़े हैं ढाई हजार कट्टे, वेयरहाउस मांगता है हजार

  • वेयरहाउस प्रबंधन शेष कट्टों के लिए मार्केट कमेटी व उच्चाधिकारियों को लिखेगा पत्र
  • मामला जुर्माने पर टलता है या एफआईआर होती है, अधिकारी लेंगे इसका निर्णय

नारनौल. महेंद्रगढ़ में व्यापारियों के यहां से सरसों के बैगों का उठान लगभग पूरा हो चुका है। मंडी में फिजिकली करीब दो-ढाई हजार कट्टे नजर आ रहे हैं जबकि वेयरहाउस के मंडी व्यापारियों की ओर करीब 11 हजार कट्टे बचते हैं। वेयरहाउस अपने शेष कट्टों को लेकर अब मार्केट कमेटी सहित अन्य उच्चाधिकारियों को पत्र लिखेगी, जिस आधार पर आगामी कार्रवाई होगी। कार्रवाई में उच्चाधिकारी जुर्माना लगाते हैं या फिर एफआईआर कराते हैं यह उनपर निर्भर होगा। उधर मंडी व्यापारियों ने भी कहा कि अब मंडी में गिनती के कट्टे शेष हैं जो उठान के इंतजार में रखे हैं। इन सभी कट्टों का उठान शीघ्र कर मंडी के गेट खोले जाएं ताकि व्यापारियों व आमजन को आ रही परेशानियों से छुटकारा मिल सके।

मंडी में 21 मई से सरसों खरीद बंद है। इसके बाद सरसों खरीद में गड़बड़ी की जांच को लेकर मंडी के सभी गेट बंद कर दिए गए ताकि बाहर से सरसों न आ सके और न ही जा सके। इसके बाद भी कुछ दिन सरसों के वाहनों की आवाजाही को देखते हुए स्थानीय प्रशासन भी सतर्क हो गया तथा उन्होंने भी गेट पर पटवारियों की ड्यूटी लगा दी। इसके बाद बाहरी सरसों के आने पर दिन में तो पूरी तरह से पाबंदी लग गई परंतु रात के अंधेरे में गड़बड़ी होने लगी।

इस पर एसडीएम ने बीते दिवस मंडी में रात के समय निरीक्षण करते हुए दो फर्मों के यहां छापेमारी कर कार्रवाई के लिए मार्केट कमेटी को निर्देश दिए। इतना ही नहीं बीती अल सुबह फिर से एसडीएम ने मंडी का दौरा किया तो दो-चार कट्टे इधर-उधर होते पाए गए। सरसों खरीद के दौरान मंडी से एक दिन में करीब 6-7 हजार कट्टों का उठान प्रतिदिन हो रहा था । ऐसे में अब 4-5 दिन से उठान गति पूरी तरह से धीमी है जिसका मुख्य कारण मंडी में खरीद से कम कट्टे बताया जा रहा है । अब परचेज एजेंसी को चाहिए कि जितने भी कट्टे व्यापारियों के पास मौजूद है उनका उठान करवा लेें । उठान के बाद जिनके पास भी कट्टे कम मिलते हैं उनके खिलाफ उचित कार्रवाई करवाएं । जिन व्यापारियों के यहां कट्टे भीगे या खराब है उनकी भी गिनती कर अपने उठान को पूरा कर लेना चाहिए ।

अनाजमंडी का गेट नहीं खोलना भी बड़ी गड़बड़ी का संकेत
बता दें कि मंडी में अब गिनती के सरसों के कट्टे शेष है। या तो उनका उठान करवाया जाए या फिर उनकी फिजिकली गिनती करवाकर मंडी के सभी प्रवेश द्वारों को खोला जाए । कुछ लोगों के कारण मंडी में अन्य व्यापारियों व आमजन को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है । व्यापारियों के अनुसार सरसों खरीद के अलावा भी उनका व्यापार है जो गेट बंद होने के कारण काफी प्रभावित हो रहा है । उनका कहना है कि जितने कर्मचारी मंडी में तैनात है यदि उन्हें ही गिनती में लगा दिया जाए तो वे एक दिन में वर्तमान में मंडी में मौजूद कट्टों की गिरती शाम पहले कर देंगे । उन्होंने कहा कि इस विषय में मार्केट कमेटी को तत्परता से कार्रवाई करते हुए मंडी के सभी बंद गेटों को खुलवाना चाहिए । कुछ व्यापारियों की गड़बड़ी का खामियाजा अन्य व्यापारी व आम लोग क्यों भुगते ।

एक महिला के नाम से करीब 300 क्विंटल सरसों के टोकन का मामला अभी लंबित
एसडीएम विश्राम कुमार मीणा के पास बीते दिवस एक शिकायत पहुंची जिसमें नगर की एक महिला का नाम सरसों बिक्री वाली सूची में दिखाया गया जिसके तहत वह मंडी में 300 क्वींटल सरसों बेच सकती थी । बीती 19 मई को महिला के नाम से 40 क्वींटल सरसों बेची जा चुकी है । उक्त महिला के नाम कोई कृषि भूमि नहीं हैं । इस गड़बड़ी के पीछे मार्केट कमेटी या फिर जमीन वेरिफाई करने वाले पटवारी या फिर अन्य कोई सक्षम अधिकारी, कर्मचारी संलिप्त है, इसकी परते तो प्रशासन की जांच के बाद ही खुल पाएगी । इसके साथ ही यदि प्रशासन जिन भी किसानों के नाम से मंडी में सरसों बिक्री हुई है उक्त सूची की भी फिर से गहनता से जांच हो अधिकारियों की मौजूदगी में पटवारियों से जांच करवाई जाए तो ओर भी इस प्रकार के मामले सामने आने की संभावना है ।

^अभी मंडी में उनके करीब 11 हजार कट्टे शेष है, जिनका उठान होना है । परंतु मंडी में व्यापारियों के पास खरीद के मुताबिक सरसों के बैग नजर नहीं आ रहे हैं । मंडी में करीब आधा दर्जन व्यापारियों के पास सरसों के कट्टे खरीद से कम है । इस विषय में मार्केट कमेटी सहित उच्च अधिकारियों को लिखा जा रहा है ।
– आनंद यादव, मैनेजर, वेयरहाउस, महेंद्रगढ़।

^खरीद के समय परचेज एजेंसी से परचेजर व मार्केट कमेटी के कर्मचारी साथ होते हैं तथा ढेरियां देखकर ही खरीद की जाती है । जिनके पास सरसों के कट्टे खरीद से कम है तो उसके लिए संबंधित व्यापारी जिम्मेदार है।
– हरिकिशन, कार्यकारी सचिव, मार्केट कमेटी, महेंद्रगढ़।