ग्रहों की उल्टी चाल के दौरान सूर्यग्रहण दे रहा देश-विदेश में उथल-पुथल के संकेत

नारनौल. इस समय महामारी से पूरी दुनिया जूझ रही है। सभी लोग कोरोना जैसी वैश्विक महामारी से निपटने के लिए उपाय जानना चाह रहे है। उम्मीद है कि सूर्य ग्रहण लगने के बाद वायरस का प्रकोप कम हो जाएगा। जानकारी देते हुए पं. कृष्ण कुमार शर्मा नांवा ने बताया कि ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार आषाढ़ मास में तिथि वार नक्षत्र के बन रहे संयोग से ऐसा लग रहा है कि इस माह में कुछ खास होने वाला है। उन्होंने बताया कि आषाढ़ मास में सूर्यग्रहण के अलावा 5 ग्रहों का वक्री चलन से प्राकृतिक आपदाओं जैसे अत्यधिक वर्षा, समुद्री चक्रवात, तूफान, महामारी आदि से जन धन की हानि होने का खतरा माना जा रहा है। इसके अलावा भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका और बांग्लादेश में आषाढ़ मास में भयंकर वर्षा (चक्रवात से) हो सकती है।

वहीं आषाढ़ महीने में 5 शनिवार का होना महंगाई को बल देना वाला योग जबकि 5 रविवार का होना शोक संताप को बढ़ाने वाला कष्टकारी नेष्ट योग है। उन्होंने बताया कि इसके चलते टिड्डी आदि कीटों का प्रभाव बढ़ेगा। इसके अलावा आषाढ़ शुक्ला पंचमी को बना मघा नक्षत्र और शुक्रवार का साथ समुद्री तट से तूफान उठने का संकेत भी दे रहा है।

21 जून को लग रहा है सूर्य ग्रहण: शर्मा नांवा ने बताया कि 21 जून आषाढ़ मास की अमावस्या को कंकणाकृति सूर्यग्रहण मृगशिरा नक्षत्र, मिथुन राशि में होगा। उन्होंने बताया कि सूर्यग्रहण भारत भू-भाग पर 10 बजे से दोपहर 2:30 बजे के बीच देखा जा सकेगा। इसके अलावा नारनौल में लगने वाले खंडग्रास सूर्यग्रहण का स्पर्श 10:16 तथा मध्यकाल 11:56 जबकि 1:42 बजे सूर्यग्रहण मोक्ष हो जाएगा। वहीं 3:26 बजे तक ग्रहण का पूर्वकाल रहेगा। वहीं ग्रहण का सूतक काल शनिवार रात्रि 10:16 बजे आरंभ हो जाएगा। उन्होंने बताया कि हरियाणा के कुरूक्षेत्र, यमुनानगर, लाड़वा, सिरसा सहित देश के कुछ भागों में ये ग्रहण कंकणाकृति में दिखाई देगा।

देश-विदेश में कहर का दे रहे संकेत: शर्मा नांवा ने बताया कि एक के बाद एक ग्रह अपनी चाल बदल कर वक्री हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि वर्तमान में राहू मिथुन राशि में वक्री है, वहीं शनि व गुरु मकर राशि में वक्री हैं। इसके अलावा शुक्र वृषभ राशि में वक्री हो गये है। इसके अलावा इन चारों वक्री ग्रहों के साथ आग में घी का कार्य करने के लिए बुध 18 जून से मिथुन राशि में वक्री हो जाएंगे। उन्होंने बताया कि यह सभी ग्रह वक्री होकर देश-विदेश में अपना कहर बरपाने के संकेत दे रहे हैं।