उद्योगों पर पीएचडी चैंबर, 9.3% की दर से अगले वर्ष बढ़ेंगे हम, 2 साल में उद्योगो में 2 लाख जॉब

  • कोरोना का असर जैसे-जैसे कम होगा वस्तुओं की डिमांड बढ़ेगी
  • चीफ इकनॉमिस्ट डीएस शर्मा ने कोरोना के बाद की स्थिति पर स्टडी

पानीपत. चीन जैसे देशों की ही भांति यहां भी कोविड-19 का असर जैसे-जैसे कम होगा, वस्तुओें की डिमांड बढ़ेगी। मार्च 2021 तक हम 4% की विकास दर हासिल कर सकते हैं। अगले साल यह 9.3% होने की संभावना है।

चुनौतियां

  • उद्योगों से 5 लाख श्रमिक गए हैं। प्रोडक्शन बाधित है।
  • ट्रांसपोर्टेशन, वेयरहाउसिंग समेत सप्लाई चेन बिगड़ गई है।
  • यूरोप-यूएस-यूके में एक्सपोर्ट आधारित टेक्सटाइल, ऑटो जैसे उद्योगों के सामने नए ऑर्डर मिलने की समस्या है।

अवसर

  • विभिन्न सेक्टरों में अगले दो वर्षों में 7 लाख रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
  • मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर : ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग में हरियाणा देश में तीसरे व उत्तर भारत में पहले स्थान पर है। हरियाणा बड़ा इलेक्ट्रॉनिक्स व ऑटोमोबाइल हब है। इन क्षेत्रों में 2 वर्षों में 1 लाख नौकरियों की उम्मीद है।
  • एमएसएमई और एक्सपोर्ट : हैंडलूम उत्पाद, वैज्ञानिक उपकरण, वस्त्र, ऑटोमोबाइल, मोटर वाहन घटक, विद्युत उपकरण, चावल, अचार आदि का निर्यात होता है। हरियाणा की विकास दर मौजूदा वित्त वर्ष में 4 % और वित्त वर्ष 2022 में 9.3% से बढ़ने का अनुमान है। यहां 9.7 लाख एमएसएमई हैं। अगले 2 वर्षों में निर्यात में 1 लाख व एमएसएमई में 2 लाख रोजगार के अवसर होंगे।
  • सर्विस सेक्टर : मौजदा वर्ष में इसमें 5 % और अगले साल में 11 % वृद्धि की उम्मीद है। आईटी, डिजिटलाइजेशन, दूरसंचार, परिवहन, इंटरनेट, बैंकिंग में अगले 2 साल में 2 लाख रोजगार के अवसर हैं।
  • कृषि सेक्टर: रबी की तरह खरीफ में भी बंपर उत्पादन की उम्मीद है। इसमें अकुशल, अर्ध-कुशल और कुशल श्रमिकों को काम मिलेगा। फूड प्रोसेसिंग में स्टार्ट-अप के रास्ते खुले हैं। इनका प्रदेश की ग्रोथ में बड़ा योगदान रहने वाला है। कृषि से जुड़े सामान का निर्यात बढ़ेगा। अगले 2 सालों में फूड प्रोसेसिंग के अंदर 1 लाख नए रोजगार पैदा होंगे।

सरकार की योजना

  • 60 विदेशी कंपनियों से प्रदेश में उद्योग लगाने की बातचीत।
  • प्राइवेट कंपनियों में 75% रोजगार स्थानीय लोगों को देने की तय प्रक्रिया तेजी से पूरी हो रही है।
  • एमएसएमई हमारी बैकबोन है। इन्हें श्रमिकों के भुगतान के लिए छह माह तक बिना ब्याज के प्रति श्रमिक 20 हजार रुपए तक की व्यवस्था बैंकों से कराई है।
  • अगस्त में नई उद्योग नीति आ रही है, जिससे आर्कर्षक बनाया जा रहा है ताकि बाहर के उद्योग यहां आएं।