आयुर्वेद और योग से हारेगा कोरोनावायरस, चल रहा क्लीनिकल ट्रायल: रामदेव

  • डॉक्टरों ने कहा था मर जाऊंगा, नेचुरोपैथी ने बचाया: आचार्य देवव्रत
  • हरियाणा के आंचल से निकले और दुनिया को योग व अध्यात्म की राह दिखाई

पानीपत. महेंद्रगढ़ जिले से निकलकर दुनिया के शीर्ष लोगों में शुमार योग गुरु स्वामी रामदेव और पानीपत के गांव पावटी से निकल कर गुजरात के गवर्नर तक पहुंचे आचार्य देवव्रत। दोनों ने सुनाई संघर्ष की कहानी।

सवाल: महेंद्रगढ़ के एक छोटे से गांव से योग की यात्रा पर कैसे निकले, जबकि आपके क्षेत्र में सेना युवाओं की आज भी पहली पसंद है?

स्वामी रामदेव: सेना में होने और संत होने में अंतर नहीं है। जज्बा होना जरूरी है। आज जो भी हूं, यह महर्षि दयानंद जी की प्रेरणा थी। बचपन में गांव के अंदर आर्य समाज का प्रभाव था। आर्थिक सामर्थ्य बहुत अधिक नहीं था, इसलिए पुरानी पुस्तकें लेकर पढ़ा करता था। आचार्य बलदेव जी के पास फिर खानपुर गुरुकुल में रहा। मैं दो शब्द बोला करता हूं कि विकल्प रहित संकल्प। कुछ भी हो जाए अडिग रहो।

सवाल: जीवन के सबसे कठिन दौर को आपने कैसे पार किया?
आचार्य देवव्रत:
गुरुकुल कुरुक्षेत्र में रह रहा था। मई का महीना था। लू चल रही थी और मैं गांव-गांव घूमकर बच्चों के लिए गेहूं इक्कट्ठे कर रहा था। मुझे लू लगकर बुखार हो गया। मेरा वो बुखार टाईफाइड में बदल गया। अंग्रेजी दवाई ली तो वह इतनी गर्म थी कि बड़ी आंत में जख्म हो गया। ब्लीडिंग होने लगी। 3 महीने में 84 किलो से मेरा वजन 52 किलो रह गया। मुझे पीजीआई चंडीगढ़ और दिल्ली एम्स आदि में ले गए, लेकिन सभी ने कह दिया कि अब कुछ दिन की जिंदगी बची है। ऐसे में मेरा परिचय स्वामी जगदीश्वरानंद हुआ। वे प्राकृतिक चिकित्सालय चलते थे। वहां तीन महीना उनके सानिध्य में रहा और बिलकुल स्वस्थ हो गया। मैं इससे इतना प्रभावित हुआ कि मैंने वापस आकर इसका कोर्स किया और 2001 में गुरुकुल कुरुक्षेत्र के अंदर प्राकृतिक चिकित्सालय की स्थापना भी की। वहां बड़े-बड़े लोग इलाज कराने लगे और वो गुरुकुल की आर्थिक मदद करने लगे जिससे गुरुकुल का स्वरूप ही बदल गया।

सवाल: खुद का बड़ा ब्रांड खड़ा करना कितना मुश्किल था और यह कैसे हो पाया। जो युवा नए स्टार्टअप करना चाहते हैं, उनके लिए क्या कहेंगे?
स्वामी रामदेव:
मैं तो देसी आदमी हूं। कर्म करो, कर्मी ही धर्म है और कर्म ही ब्रांड है। अपने काम के अंदर पूरी क्षमता को झोंक दें। एक दिन ब्रांड भी बना लोगे। दैनिक भास्कर भी तो ऐसे ही ब्रैंड बना है। जहां आप जाते हैं, वहीं नम्बर वन हो जाते हैं। गुजरात में भी पहुंच गए दिव्य भास्कर के नाम से, महाराष्ट्र में भी पहुंच गए और वहां भी परचम लहरा दिया। हरियाणवी में कहें तो सीध बांध ल्यो, फेर दांये-बांये देखना छोड़ दयो अर काम पै लाग्गे रहो, जो कुछ है सब कुछ उसमें झोंक दो।

सवाल: सरकार को किसानों की आय 2022 तक दोगुनी करनी है। कैसे संभव है?
आचार्य देवव्रत:
सरकार काम कर रही है। मैं पिछले दस साल से प्राकृतिक खेती के प्रचार में लगा हूं। गुरुकुल कुरुक्षेत्र में जो 200 एकड़ जमीन कब्जे से छुड़वाई थी, उसमें यही खेती करता हूं। मैं प्रैक्टिकल कर चुका हूं कि इस पद्धति से किसानों की आय दोगुनी हो सकती है। एक भारतीय नस्ल की देसी गाय से हम 30 एकड़ तक की खेती कर सकते हैं। देसी गाय के 1 किलो गोबर में 500 करोड़ तक जीवाणु हैं। इससे जीवामृत और घन जीवामृत बनाते हैं। इसी से खेती करते हैं। इस पद्धति में लागत शून्य होती है। हिमाचल-गुजरात में लाखों किसान इसे अपना चुके हैं। हमारी फसल लोग लाइन में लग कर दोगुने रेट में खरीदते हैं, क्योंकि वो कैमिकल मुक्त होती है।

सवाल: आप मृत्यु के करीब से सात बार गुजरे, इनमें से कुछ के बारे में बताएं।
स्वामी रामदेव :
हां, बचपन में मैं गांव के तालाब में डूब गया था और पास के ही श्मशान के अंदर उलटा करके मेरा पानी निकाला गया था। अब ताे हम तो रोज जीते हैं और रोज मरते हैं। मेरे बारे में एक बात प्रसिद्ध है कि स्वामी रामदेव बड़ा पंगेबाज है। मेरे दुश्मन भी जोरदार हैं और दोस्त भी। मैंने किसी की भैंस थोड़े ही खोल रखी है।

सवाल: दुनिया में कोरोना की दवाओं पर टेस्टिंग हो रही है। आयुर्वेद में क्या चल रहा है?
स्वामी रामदेव:
हमने कोरोना के दौर में लोगों को गिलोई, तुलसी, कलाई मिर्च, हल्दी, मुनैठी, दाल चीनी आदि का काढ़ा बनाना तो सिखाया ही। इसका एक रसायन बनाकर क्लिनिकल ट्रायल भी एक लेवल तक पहुंचा दिया है। जल्द ही भारत इसमें लीड करेगा। योग-आयुर्वेद को मिला दें तो कोरोना से 100 प्रतिशत रिकवरी होगी।

सवाल : आचार्य जी आपकी जिंदगी का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट क्या था?
आचार्य देवव्रत :
एक तो जब मैं मौत के पास से लौटा था। दूसरा पीएम मोदी जी ने पानीपत की धरती से बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का आह्वान किया था। तब संकल्प लेकर मैंने अम्बाला में बेटियों के लिए चमन वाटिका गुरुकुल की स्थापना की।

सवाल: कोरोना से उपजी अनिश्चितता व तनाव से कैसे उबरें? कोई योग भी बताएं।
स्वामी रामदेव:
काम करने के तरीके बदले हैं। नए-नए तरीके निकालने होंगे। सभी 5 मिनट तक प्रणायाम, कपालभांति, फिर अनुलोम-विलोम, ब्रह्मयोग। काढ़ा पियें।

सवाल: चाईनीज एप हटाने के अभियान पर क्या कहेंगे।
स्वामी रामदेव:
लड़ाई विचारों की है। जो सबसे बड़ा हथियार होता है वो होता है विचार। बहिष्कार करें, केवल चाइना का ही नहीं सभी विदेशी कंपनियों का। हम तो ठोक कर काम करने वाले हैं और ठोक कर विदेशी कंपनियों का बहिष्कार करेंगे। मेरे पास कुछ भी विदेशी नहीं है।