पूर्व एसडीएम ने पहले पेंशन राशि व अब सेवानिवृत्ति के फिक्स अमाउंट के ब्याज को भी जनसेवा में किया समर्पित

  • विभिन्न सम्मान के तहत 9-9 लोगों को नकद राशि देने की घोषणा
  • असमय काल के ग्रास में समाने वाले कर्मियों के परिजनों को अपनी 55 हजार पेंशन राशि पहले ही देने का ले चुके हैं संकल्प

महेंद्रगढ़. पहले अपनी पेंशन की पूरी राशि जनहित में लगा दी। अब सेवानिवृत के फिक्सड अमाउंट पर मिलने वाले ब्याज को महेंद्रगढ़ की जनता के मान-सम्मान में लगाने का निर्णय महेंद्रगढ़ के पूर्व एसडीएम संदीप सिंह ने लिया है। उन्होंने किसानों, युवाओं व बेटियों व महिलाओं के लिए विभिन्न सम्मान की शुरआत की है। उन्होंने एक अच्छी पहल करते हुए श्रीकृष्ण धरा कृषक  सम्मान योजना, युवा युग पुरुष सम्मान तथा नारी नव चेतना सम्मान के तहत 9-9 लोगों को सम्मान के रुप में नकद राशि देने की घोषणा कर दी है। ये सम्मान कृषक दिवस 23 दिसंबर, शहीदी दिवस 23 मार्च तथा रानी लक्ष्मीबाई शहीदी दिवस 18 जून पर दिए जाएंगे।

श्री कृष्ण धरा कृषक सम्मान: श्रीकृष्ण धरा कृषक सम्मान के अंतर्गत 3 कैटेगरी बनाई गई है। पहली कैटेगरी स्वामी दयानंद सरस्वती नव-परिवर्तन कृषक सम्मान जिन्होंने न केवल आर्य समाज की स्थापना की अपितु अपने तेज और ओज से पूरे भारतवर्ष में अलग पहचान बनाई और भारत देश की पहली गोशाला रेवाड़ी में किसानों और देश को समर्पित की। इस सम्मान के तहत जिन भी किसानों ने नए-नए तरीके अपना कर अपनी फसल को एक नई दिशा दी हो और लोगों के लिए प्रेरणा के स्रोत बने हों, उन्हें इस सम्मान से नवाजा जाएगा। इसी तरह दूसरी कैटेगरी में महाराणा प्रताप विविधता-पूर्ण कृषक सम्मान है। प्रताप जी ने किसानों की ना केवल अपने घर के सदस्यों की तरह रक्षा की बल्कि जंगलों में उनके साथ काफी समय बिताया था। महाराणा प्रताप जी के इस संघर्ष और शौर्य से एक सच्चे धरती पुत्र की मिसाल पैदा हुई। इसमें परम्परागत खेती के अलावा विविधता पूर्ण खेती करके मिसालें कायम करने वाले किसान शामिल किए जाएंगे। तीसरी कैटेगरी में चरण सिंह उन्नतशील कृषक सम्मान है। चौधरी चरण सिंह को भारत का पहला ऐसा प्रधानमंत्री मानते हैं जो किसानों की हर पीड़ा को अपनी मानते थे।

महेंद्रगढ़ युवा युग पुरुष सम्मान: जिले के युवाओं के लिए हर वर्ष 23 मार्च को शहीदी दिवस युवा युग पुरुष सम्मान की शुरुआत की जा रही है। यह सम्मान भी 3 कैटेगरी में होगा। पहली कैटेगरी में नेताजी सुभाष चन्द्र बोस राष्ट्र सहयोग सम्मान है। आईसीएस यानी डीसी की पदवी छोड़ राष्ट्र के प्रति समर्पण, स्नेह और राष्ट्र-भक्ति ने पूरे विश्व में भारत वर्ष का नाम स्वर्ण अक्षरों में अंकित कराया। इसमें दूसरी कैटेगरी में शहीद चंद्रशेखर आजाद-भगत सिंह-राजगुरु-सुखदेव सम्मान है। तीसरी कैटेगरी में डॉ. भीमराव अंबेडकर नव-परिवर्तन सम्मान है। डॉ. भीमराव अंबेड़कर-जिन्हें बाबा साहेब के नाम से भी जाना जाता है। दलित बौद्ध आंदोलन को प्रेरित करने वाले समाज सुधारक बाबा साहेब ने सामाजिक भेदभाव को खत्म करने के लिए अभियान चलाया था। उनके द्वारा भारतीय संविधान की नींव रखी गई।

महेंद्रगढ़ नारी नव-चेतना सम्मान: महेंद्रगढ़ जिले की बेटियों और महिलाओं के लिए हर वर्ष 18 जून यानि महारानी लक्ष्मी बाई के शहीदी दिवस वर्ष 2021 से महेंद्रगढ़ नारी नव-चेतना सम्मान शुरू किया जा रहा है। यह सम्मान भी 3 कैटेगरी में रखा हैं। पहला सम्मान दुर्गा देवी नव-परिवर्तन सम्मान है। दुर्गा देवी, क्रांतिकारी भगवती चरण बोहरा की धर्मपत्नी जो दुर्गा भाभी के नाम से जानी जाती हैं। राजगुरु और भगत सिंह को दुर्गा भाभी ने ही लाहौर से कोलकाता के सफर में साथ देकर राष्ट्र-धर्म निभाया था। दुर्गा भाभी ने अपनी संपूर्ण सम्पत्ति व गहने क्रांतिकारियों को बचाने में तथा देश को आजाद कराने में लगा दी थी। 1857 की क्रांति का बिगुल बजाने वाली रानी लक्ष्मीबाई के साहस को कौन नहीं जानता। पहली बार स्वयंसेवक सेना का गठन करना-सदा आत्मविश्वासी और स्वाभिमानी बने रहना। इस सम्मान के तहत उन बेटियां और महिलाएं सम्मानित होंगी जिन्होंने राष्ट्र-सहयोग में योगदान दिया हो तथा देशहित को ही सर्वोपरि माना हो। तीसरा सम्मान सावित्री बाई फुले राष्ट्र-सहयोग सम्मान है। सावित्री बाई फुले भारत की प्रथम महिला शिक्षिका जिन्होंने सारा जीवन लड़कियों को पढ़ाने तथा समाज से भेदभाव मिटाने में लगा दिया। उन्होंने अपने पति ज्योतिराव गोविंदराव फुले के साथ मिलकर स्त्री अधिकारों एवं शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय एवं सराहनीय कार्य किए। उक्त सभी पुरस्कारों के लिए आयु सीमा 16 वर्ष से अधिक होनी चाहिए। प्रत्येक वर्ग में 9 पुरस्कार होंगे यानी कुल 27 पुरस्कार होंगे। प्रथम पुरस्कार के रुप में 5100, द्वितीय को 3100 तथा तृतीय को 2100 रुपए मिलेंगे। इसके अलावा पूर्व एसडीएम संदीप सिंह ने अपनी पूरी पेंशन 55 हजार रुपए जिले के उन कर्मचारियों के परिवार को देने का निर्णय लिया है जिनकी असमय मृत्यु हो जाती है।