प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने ज्‍येष्‍ठ अष्‍टमी के अवसर पर कश्‍मीरी पंडित समुदाय को दी शुभकामनाएं

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज ज्‍येष्‍ठ अष्‍टमी के अवसर पर कश्‍मीरी पंडित समुदाय को शुभकामनाएं दीं। श्री मोदी ने एक ट्वीट में कहा कि उन्‍हें उम्‍मीद है कि माता खीर भवानी के दैवीय आशीर्वाद से प्रत्‍येक व्‍यक्ति प्रसन्‍न, स्‍वस्‍थ और समृद्ध होगा।
मंदिर का इतिहास
जम्मू-कश्मीर का खीर भवानी मंदिर पूरे भारत में प्रसिद्ध है. लोग दूर-दूर से यहां दर्शनों के लिए पहुचंते हैं. जम्‍मू-कश्‍मीर के गांदरबल जिले में वार्षिक उत्सव में शामिल होने के लिए कश्मीरी पंडित हजारों की संख्‍या में पहुंचते हैं. मंदिर में शांति व खुशहाली के लिए लोग प्रार्थना करते हैं. कश्मीर घाटी में स्थित खीर भवानी मंदिर हिंदू देवी रगन्या को समर्पित है. मान्यता है कि माता रगन्या रावण शासन के दौरान श्रीलंका से कश्मीर आई थीं. इस मंदिर में मां को खीर चढ़ाई जाती है और भक्‍तों में प्रसाद के रूप में खीर ही मिलती है। यहां मई के महीने में पूर्णिमा के आठवें दिन बड़ी संख्या में भक्त एकत्रित होते हैं। ऐसा विश्वास है कि इस शुभ दिन पर देवी के कुंड का पानी बदला जाता है। 2014 में कश्‍मीर में जब बाढ़ा आई थी, तब भी इस मंदिर के कुंड का पानी काला हो गया था।
बदल जाता है कुंड के पानी का रंग
भारत में ऐसे कई मंदिर हैं, जो अपने में ही काफी रहस्‍मयी हैं। ऐसा ही एक मंदिर है खीर भवानी का जो श्रीनगर से 27 किलोमीटर दूर तुल्ला मुल्ला गांव में स्थित है। खीर भवानी का यह प्राचीन मंदिर एक बहती हुई धारा पर है। मंदिर के बारे में कई पौराणिक मान्यताएं भी हैं. इस मंदिर में स्थित एक जलस्रोत के बारे में कहा जाता है कि यह कश्मीर की घटनाओं की भविष्यवाणी करता है. चौंकाने वाली बात यह है कि यहां के स्‍थानीय लोंगो में ऐसी मान्‍यता है कि अगर यहां मौजूद झरने के पानी का रंग काला पड़ जाए, तो पूरे क्षेत्र पर विपत्‍ती आने का संकेत साफ पता चलने लगता है। कश्मीरी पंडित माता रगन्या के मंदिर के इस जलस्रोत को पवित्र मानते हैं. इनका मानना है कि वार्षिक मेले के अवसर पर जलस्रोत के पानी का रंग वर्ष के दौरान कश्मीर में घटनाओं की स्थिति की भविष्यवाणी करता है.
हनुमान जी ने स्थानांतरित किया देवी का आसन
हिंदू पौराणिक कथाओं के मुताबिक, देवी जी रावण की तपस्या से प्रसन्न होकर उसके समक्ष प्रकट हुई थीं। रावण ने श्रीलंका में देवी की एक प्रतिमा स्थापित की थी, लेकिन रावण के जीवन के अनैतिक तरीकों से क्रुद्ध देवी ने हुनमान को उनका आसन वहां से कश्मीर स्थानांतरित करने का आदेश दिया। जिसे हनुमानजी ने मान लिया और कश्मीर में उनको स्थापित कर दिया।