पिकअप चालक ने कनीना से रेवाड़ी छोड़ने के नाम पर प्रवासियों से लिए 1000 रुपए, अटेली मंडी में ही छोड़ गया

  • घर वापसी के लिए दिनभर भटकते रहे बिहार के 9 मजदूर

महेंद्रगढ़. लॉकडाउन में सबसे ज्यादा अगर किसी को परेशानी हुई है तो वह है प्रवासी मजदूर, हालांकि जिले से हजारों प्रवासी श्रमिकों को प्रशासन की ओर से उनके गृहराज्य भिजवाया गया है।
अनाज मंडी में काम करने वाले बिहार के प्रवासी श्रमिकों ने रविवार को कनीना मंडी से रेवाड़ी जाने के लिए एक पिकअप को रोका तो चालक इसके लिए 1000 रुपए मांगें। घर जाने को बेताब मजदूर इसके लिए तैयार हो गए लेकिन पिकअप चालक श्रमिकों को अटेली से ट्रेन व बसें जाने की झूठी सूचना देकर यहां के कॉलेज में छोड़ गया।

कॉलेज के पास रहने वाले लोगों ने बताया कि यह शेल्टर होम तो मध्यप्रदेश के श्रमिकों के लिए बनाया था, जो अब सभी प्रवासियों को उनके गृहराज्य में भेजने के बाद बंद हो गया है। उसके बाद वे सब पैदल ही रेवाड़ी की ओर चल पड़े। श्रमिकों को किसी ने बताया कि रेवाड़ी से ट्रेन चल रही है तो दोपहर में ही पैदल चल पड़े। इनमें बिहार के अररिया जिले के थाना रानीगंज थाना के प्रवासी श्रमिक विरोद, केसी लाला, नित्यानंद, नागो आदि ने बताया कि वो कनीना मंडी में काम कर रहे हैं।

मंडी में उनका कार्य पूरा होने के बाद किसी ने बताया कि ट्रेन चल पड़ी है तो कनीना से एक पिकअप की। उसने रेवाड़ी की बजाय अटेली में छोड़ दिया और 1000 रुपए लेकर चलता बना। जब पैदल न जाने की बात पर उन्होंने अटेली अनाज मंडी में उनके प्रदेश के अन्य साथी रहने की बात किसी ने बताई तो वे अनाज मंडी अटेली में चले गये। श्रमिकों ने बताया कि वे 9 लोग हैं,

सभी ने मेडिकल कराया है लेकिन घर जाने की व्यवस्था नहीं हो पा रही है। बजाड़ चौकी इंचार्ज नित्यानंद ने बताया यह गलत है। अगर हमारे पास शिकायत आती तो पिकअप चालक के खिलाफ कानून कार्रवाई करेंगे। बजाड़ नाके से किसी श्रमिक को पैदल नहीं जाने दिया जा रहा।