16 हजार से अधिक मजदूर पंजीकरण के बाद अपने प्रदेशों जाने को नहीं आ रहे आगे

  • अब तक 29904 मजदूरों ने अपने प्रदेशों में जाने के लिया कराया है रजिस्ट्रेशन, 9400 को भेजा

करनाल. कोरोना महामारी के चलते लॉकडाउन से बंद हुए काम-धंधे फिर से चलने लगे हैं। जबकि पिछले दो माह से रोजगार न मिलने से मजदूरों को अपनी दैनिक जरुरतों को पूरा करने में भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा है। जिले की बात करें तो यहां से अब तक 29904 मजदूरों ने अपने प्रदेश जाने के लिए जिला प्रशासन के पास रजिस्ट्रेशन कराया है, जिनमें से प्रशासन द्वारा करीबन 9400 मजदूरों को उनके गंतव्य तक पहुंचाया जा चुका है। इसके अलावा करीबन 2500 और मजदूर शेल्टर होम में अपने प्रदेशों में जाने के लिए ठहरे हुए हैं। करीब 16000 मजदूर पंजीकरण के बावजूद अपने प्रदेश जाने के लिए आगे नहीं आ रहे हैं। सड़कों पर मजदूरों का आवागमन रुक गया है। इससे जाहिर होता कि मजदूरों को जिले में काम मिल रहा है।

जिले के अधिकतर उद्योग चालू हो गए हैं। इनमें उत्पादन बढ़ोतरी के साथ-साथ मजदूरों की जरूरत बढ़ती जा रही है। इस कारण से काम धंधा मिलने से हजारों मजदूरों ने शायद वापसी का विचार त्याग दिया है। हालांकि प्रशासन अपनी तरफ से ऐसे मजदूरों को भेजने के लिए तैयार है, जो अपने प्रदेश में लौटना चाहते हैं, लेकिन इसके साथ ही यह कोशिश भी है कि अपने जिले से कोई मजदूर बेरोजगार होने के कारण न लौटे। इसके लिए जिले के उद्योगपति मजदूरों को काम देने में अहम रोल अदा कर रहे हैं। खास तौर पर फार्मा और एग्रीकल्चर इम्प्लीमेंट में मजदूरों को रोजगार के अवसर मुहैया कराए जा रहे हैं।

शेल्टर होम के हालात बता रहे घटा मजदूरों का पलायन :जिले में प्रवासी मजदूरों के रहने-खाने के लिए बनाए गए शेल्टर होम के हालात मजदूरों के पलायन में घटा होने की बात बयान कर रहे हैं, क्योंकि जिले में 29904 मजदूरों ने अपने प्रदेश जाने के लिए पंजीकरण कराया था, जिनमें से लगभग साढ़े नौ हजार को प्रशासन द्वारा भेजा जा चुका है। कुछ मजदूर पैदल भी यमुना नदी इत्यादि को पार करते हुए रास्ते से निकल गए हैं। फिलहाल में 2500 के करीब शेल्टर होम में रहने रहे हैं, लेकिन शेष बच्चे तकरीबन 16 हजार मजदूर प्रशासन के पास घर जाने के नहीं लौटे हैं। इससे जाहिर होता है क मजदूरों का पलायन घट रहा है।

धान रोपाई का सीजन भी आ रहा निकट : जिले में मुख्यत: धान की फसल उगाई जाती है। अगले 20 दिनों बाद धान रोपाई का काम शुरू होने वाला है। ऐसे में मजदूरों के लिए फैक्ट्री के अलावा कृषि क्षेत्र में भी काम मिलने वाला है। इस बात को सोचकर भी कई सारे मजदूर अब जिले में ठहरने लगे हैं। उद्योगपतियों के अनुसार अगले दो माह तक उनके पास भी खासा काम है।

फैक्ट्रियों में बचाव के लिए बरत रहे पूरी सावधानी : करनाल एचएस आई आईडीसी इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के प्रेसिडेंट मनोज अरोड़ा कहते हैं कि उनके यहां अगले दो माह तक अकेले फैक्ट्रियों में पर्याप्त काम है। मजदूरों की कोरोना से लेकर सुरक्षा के सभी तरह के एहतियात बरते जाते हैं। पूरे प्रदेश में करनाल में कच्चे माल की जो कोई गाड़ी बाहर से आती है उसको सेनेटाइज करके ही अंदर प्रवेश दिया जाता है। इसी तरह से वर्करों की भी स्केनिंग की जाती है।