फैक्ट्री मालिक ने लेबर को स्पोर्ट्स का सामान दिया ताकि व्यस्त रहें, हर सप्ताह चेकअप कराया, घर जाते वक्त श्रमिक उन्हें सम्मानित कर गए

  • ज्यादातर फैक्टरी मालिक ने लेबर को बोझ समझ जाने दिया, कुछ ने तो यहां से भागने पर मजबूर किया

यमुनानगर. लॉकडाउन होने के बाद से समाज में अगर सबसे ज्यादा कोई परेशान है तो वह प्रवासी हैं। भूख, प्यास, मौत, डर, सब इन्होंने बड़े ही करीब से देखी होगी क्योंकि सरकार से लेकर फैक्टरी मालिकों ने इनकी एक न सोची, लेकिन इन सब के बीच यमुनानगर में एक फैक्टरी मालिक के यहां पर ऐसा नहीं था।
उनकी जब लेबर दो दिन पहले गई तो लेबर ने अपने मालिक को सम्मानित किया। लेबर ने ऐसा इसलिए किया कि लॉकडाउन की संकट की घड़ी में मालिक ने उनका हर तरह से ख्याल रखा। करहेड़ा खुर्द स्थित नटराज प्लाइवुड के मालिक भूपेंद्र चौहान के यहां पर करीब 200 लोग काम करते हैं। कुछ तो शुरू में निकल गए थे लेकिन ज्यादातर यहीं पर थे। उन्हें अपने घर की टेंशन तो रहती थी साथ ही नौकरी की भी टेंशन थी, लेकिन उनकी टेंशन फैक्टरी मालिक ने कम की। फ्री समय में उन्हें व्यस्त रखने के लिए फैक्टरी में काम की जाए उन्हें खेलों में व्यस्त रखा। क्रिकेट और टेनिस की टीम बनाई। मजदूर खेलते थे और समय पास होता था। खेलकर थक जाते थे और फिर रात को अच्छी नींद जाती थी।

इतना ही नहीं, कोरोना से बचाने के लिए उनका हर सप्ताह चेकअप भी कराया। उनके खाते से लेकर वेतन तक के पैसे दिए। अब जब प्रवासियों को उनके प्रदेश जाने के रास्ते खुले तो उनके जाने का भी इंतजाम किया। भूपेंद्र चौहान ने कहा कि लेबर की वजह से ही उनकी फैक्टरी चल पाती है इसलिए वे उन्हें इग्नोर नहीं कर सकते थे। उन्होंने लॉक डाउन लगते ही सभी कर्मचारियों को कह दिया था कि उन्हें परेशान होने की जरूरत नहीं है। उनकी सब जरूरतें वे पूरी करेंगे इसलिए जब प्रवासी अपने घरों की तरफ गए तो बेहद खुश थे। उन्होंने अपनी फैक्टरी में काम करने वाले प्रवासियों को यहां तक कह दिया था कि अगर उनका कोई जानकार या फिर रिश्तेदार कहीं पर फंसा है, उसे भी यहां पर बुला लें। उनका कहना है कि उन्होंने कई गांव में लेबर के लिए सेनिटाइजर और मास्क भी पहुंचाएं।

असम के प्रवासी भेजे ट्रेन में, कई दिन से रुके थे| प्रशासन ने पैदल जा रहे या फिर रजिस्ट्रेशन कराने वाले प्रवासियों को रिलीफ कैंपों में भेजा था। शुक्रवार देर रात तेजली स्टेडियम से करीब 340 असम के प्रवासियों को यहां से भेजा गया। उन्हें ट्रेन से माध्यम से भेजा जा रहा है। इसके साथ ही अन्य कई रिलीफ कैंपों से भी प्रवासियों को भेजने में प्रशासन लगा है। यूपी के प्रवासियों को बस के माध्यम से भेजा जा रहा है। एसडीएम दर्शन कुमार ने बताया कि प्रवासियों को उनके प्रदेश भेजने का काम हर दिन किया जा रहा है। यूपी के प्रवासियों को बस से और अन्य राज्यों के प्रवासियों को ट्रेन से भेज रहे हैं।

लॉकडाउन में देखने में आया है कि प्रवासी पैदल, साइकिल और रेहड़ियों पर अपने प्रदेश लौट रहे हैं। कई तो ऐसे हैं जोकि 1500 किलोमीटर तक पैदल चलकर पहुंचे हैं। ऐसा इसलिए हुआ कि बहुत से फैक्टरी मालिकों ने उन्हें रखने से मना कर दिया। उनके सामने रोटी तक का संकट आ गया था। कई फैक्टरी मालिकों ने तो उनका वेतन तक नहीं दिया। पंजाब से अपने प्रदेश लौटते समय यमुनानगर पहुंचे ज्यादातर प्रवासियों का कहना था कि फैक्टरी मालिक ने उनका वेतन तक नहीं दिया और रोटी का संकट होने से उन्हें इस तरह से अपने प्रदेश लौटने पर मजबूर होना पड़ा।

फैक्टरी मालिक चाहते तो लेबर सड़कों पर न होती

लॉकडाउन में देखने में आया है कि प्रवासी पैदल, साइकिल और रेहड़ियों पर अपने प्रदेश लौट रहे हैं। कई तो ऐसे हैं जोकि 1500 किलोमीटर तक पैदल चलकर पहुंचे हैं। ऐसा इसलिए हुआ कि बहुत से फैक्टरी मालिकों ने उन्हें रखने से मना कर दिया। उनके सामने रोटी तक का संकट आ गया था। कई फैक्टरी मालिकों ने तो उनका वेतन तक नहीं दिया। पंजाब से अपने प्रदेश लौटते समय यमुनानगर पहुंचे ज्यादातर प्रवासियों का कहना था कि फैक्टरी मालिक ने उनका वेतन तक नहीं दिया और रोटी का संकट होने से उन्हें इस तरह से अपने प्रदेश लौटने पर मजबूर होना पड़ा।