सिविल अस्पताल में पहली बार 3 बच्चों को एक साथ दिया जन्म

  • कोरोना के लिए गर्भवती का किया था रैपिड एंटी बॉडी किट से टेस्ट, रिपोर्ट निगेटिव मिलने पर कराई डिलीवरी

रोहतक. लॉकडाउन पीरियड और सिविल अस्पताल में पहली बार गायनी विभाग की टीम ने शुक्रवार को 22 वर्षीय गर्भवती महिला की एक घंटे तक चली सर्जरी प्रक्रिया के जरिए ट्रिपलेट बेबी यानी एक साथ तीन बच्चों की डिलीवरी कराई। चिकित्सकों ने मां और तीन नवजात के स्वस्थ होने का दावा किया है। गायनी विभाग के चिकित्सकों का कहना है कि एक साथ तीन बच्चों के जन्म होने के केस दुर्लभ होते हैं, यदि कहीं होते भी हैं तो उनमें बच्चों को सुरक्षित रखने में खतरे की संभावना रहती है। एसएमओ डॉ. रमेश चंद्र ने सफल सर्जरी करने वाली टीम में शामिल डॉ. देवेंदर कौर, डॉ. नताशा, डॉ. मोनिका, डॉ. गुलशन, स्टाफ नर्स डॉ. चंद्रकांता, मोहित, नरेंद्र, मंजीत को बधाई दी है।

गर्भवती का एंटी बॉडी रैपिड किट से किया काेरोना टेस्ट
गायनी टीम की महिला चिकित्सक ने बताया कि जिले के हुमायूंपुर गांव निवासी गुलशन की गर्भवती पत्नी पूजा को शुक्रवार सुबह साढ़े 11 बजे के करीब तेज प्रसव पीड़ा हुई। परिजन उसे आनन फानन में सिविल अस्पताल के गायनी ओपीडी में लेकर आए। इमरजेंसी केस को देख गायनी चिकित्सकों की टीम ने फौरन गर्भवती का एंटी बॉडी रैपिड किट से टेस्ट कराया। किट से रिपोर्ट निगेटिव आने और समय कम देख चिकित्सक मरीज पूजा को डिलीवरी कराने के लिए ओटी में ले गए। नार्मल डिलीवरी न होने की संभावना देख चिकित्सकों ने सर्जरी करने का फैसला लिया। एक घंटे तक चली सर्जरी प्रक्रिया के दौरान चिकित्सकों ने कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए पीपीई किट और मास्क पहनकर महिला की ट्रिपलेट डिलीवरी कराई गई।

दो बेटी और एक बेटे को एक साथ पाकर परिवार में छाई खुशी
महिला ने दो बेटी व एक बेटे को जन्म दिया। सफल सर्जरी के जच्चा और बच्चा को स्वस्थ देख टीम के सदस्यों ने राहत महसूस की। वहीं तीन बच्चों के घर में आने की खबर परिजनों को मिली तो वे बच्चों की एक झलक पाने के लिए बेताब हो उठे। एसएमओ डॉ रमेश चंद्र ने बताया कि यह सही है कि ट्रिपलेट डिलीवरी के केस कम ही सामने आते हैं। सिविल अस्पताल में पहली बार ट्रिपलेट डिलीवरी कराने में गायनी विभाग की टीम को सफलता मिली है।