फेफड़ों से संबंधित बीमारी से ग्रस्त महिला मरीज को रोहतक पीजीआई में भर्ती करने से इनकार

  • कहा- जब तक कोरोना रिपोर्ट नहीं आएगी उसे भर्ती नहीं किया जाएगा

भिवानी. फेफडों संबधित बीमारी से गंभीर रूप से बीमार एक महिला को रोहतक पीजीआई के चिकित्सकों ने भर्ती करने से इंकार कर दिया और चार घंटे तक बहाने बाजी करते रहे। मरीज पीजीआई के आपातकालीन विभाग में एक पेड़ के नीचे उपचार के इंतजार में लेटी रही। आखिर परिजन पीड़ित को वापस एंबुलेंस में लेकर भिवानी के सिविल अस्पताल में पहुंचे और मरीज को भर्ती करवाया। मरीज की कोरोना सैंपल की रिपोर्ट भी आनी बाकी है। पीजीआई में चिकित्सकों की इस लापरवाही ने जहां स्वास्थ्य विभाग के दावे की पोल खोल दी है वहीं सरकार की खोखली बेहतर चिकित्सकीय व्यवस्था भी सामने आई है। भिवानी निवासी सीमा फेफड़ों से संबंधित बीमारी से ग्रस्त है।

परिजनों ने उपचार के लिए सीमा को 19 मई को भिवानी के चौ.बंसीलाल सामान्य अस्पताल में भर्ती करवाया था। हालात चिंताजनक होने के कारण चिकित्सकों ने सीमा का 21 मई को कोविड-19 का सैंपल लिया और जांच के लिए रोहतक पीजीआई भेजा। सैंपल की रिपोर्ट नहीं आई है लेकिन हालत बेहद चिंताजनक होने के कारण उसे रोहतक रेफर कर दिया गया। परिजन पीडि़ता को रोहतक पीजीआई ले गए। चिकित्सकों ने जांच के बाद उसे कोविड टेस्ट करवाने काे कहा। इस पर परिजनों ने कहा कि सीमा का कोरोना संबंधित सैंपल भिवानी से रोहतक पीजीआई में ही जांच के लिए आया हुआ है लेकिन रिर्पोट नहीं आई है। मरीज की हालत अधिक गंभीर है इसे भर्ती करें, लेकिन पीजीआई के चिकित्सकों ने कहा कि जब तक कोरोना रिपोर्ट नहीं आएगी उसे भर्ती नहीं किया जाएगा।

उपचार के इंतजार में पांच घंटे एक पेड़ के नीचे लेटी रही

पीड़ित महिला के पति सतीश ने बताया कि वह और मरीज एमरजेंसी के बाहर एक पेड़ के नीचे आकर बैठ गए। मरीज की हालत बैठने की नहीं थी, इसलिए वह लेट गई। उसने मरीज को भर्ती करवाने के लिए भिवानी सिविल अस्पताल के सीएमओ व पीएमओ से संपर्क किया तो अधिकारियों ने कहा मरीज का इलाज भिवानी नहीं है इसलिए रेफर किया था। इसके बाद भिवानी के कोविड नोडल आफिसर राजेश से बात हुई तो वे बोले वह सिर्फ फार्म दे सकता है जो सैंपल के दौरान भरा गया था, रिपोर्ट तो अभी पेडिंग है। उन्होंने पीजीआई में सीएमओ डॉक्टर प्रियंका से बात करने को कहा।

मरीज के पति सतीश ने बताया कि वह सीएमओ कार्यालय पहुंचा तो बताया गया कि डॉ. प्रियंका ऑफिस में नहीं है। सिक्योरिटी गार्ड ने कोरोना का हवाला देकर बाहर निकाल दिया। कुछ समय बाद फिर सीएमओ ऑफिस पहुंचे तो बताया गया कि डॉक्टर साहब शाम सात बजे आएंगे। गंभीर हालत में लगभग पांच घंटे बाद परिजन मरीज को वापस भिवानी ले आए। परिजनों ने स्वास्थ्य मंत्री को मैसेज भी किया लेकिन मरीज को रेफर होने के बावजूद समुचित उपचार नहीं मिल पाया।