आश्रय देने की अव्यवस्था प्रवासी मजदूरों का बढ़ा रही दर्द, भूखे-प्यासे एक से दूसरे शेल्टर होम भटक रहे

  • जिला प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारियों के बीच नहीं तालेमल, आपस में शेल्टर होम के मौजूदा हालात से भी अनजान

रोहतक. जिला प्रशासन की अव्यवस्था प्रवासी मजदूरों का दर्द बढ़ा रही है। दावे हर मजदूरों को भोजन व शेल्टर देने का किया जा रहा है, जबकि हकीकत इसके इतर है। शहर में बनाए गए शेल्टर होम पहुंचने पर वहां की व्यवस्था देख रहे अधिकारी-कर्मचारी व पुलिस कर्मी क्षमता से अधिक लोगों को नहीं रखने का हवाला देते हुए कहीं और चले जाने का फरमान सुनाते हैं। ठहरने की सिफारिश करने पर पुलिस कर्मी उनको वहां से भगा देते हैं। जबकि वहां मौजूद स्टाफ को शीर्ष अधिकारियों से संपर्क करके अन्य शेल्टर होम में उनके रहने खाने का इंतजाम समय से कराया जाना चाहिए। वहीं, से उनके लिए वाहन का इंतजाम किया जाना चाहिए ताकि उन्हें दूसरे शेल्टर होम में भेजा जा सके।

शुक्रवार सुबह साढ़े 5 बजे उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी निवासी त्रिवेनी का 11 सदस्यीय मजदूर परिवार मानसरोवर पार्क के सामने पहुंचा। उसने सुबह सैर पर निकलने वालों से यूपी जाने वाली ट्रेन व बस की जानकारी पूछी। इसी दौरान कुछ लोगों ने उनको गोहाना रोड स्थित दयानंद मठ में बनाए गए अस्थाई शेल्टर होम जाने की सलाह दी। थोड़ी देर में यह मजदूर परिवार वहां पहुंच भी गया, लेकिन गेट पर तैनात स्टाफ ने उनको जगह नहीं होने का हवाला देते हुए छोटूराम स्टेडियम जाने को कहा। हालांकि एसडीएम सदर राकेश कुमार की हस्तक्षेप पर बाद में इन लोगों को दयानंद मठ में रख लिया गया।

6 घंटे तक भटकते रहे मजदूर : गोहाना से रोहतक आए निर्मल कुमार, तुलसी मंडल, मंगल मंडल और राहुल मंडल आदि 21 प्रवासी मजदूर शीला बाईपास चौक होकर शुक्रवार सुबह 6 बजे छोटूराम स्टेडियम पहुंच गए। मुश्किल से उनको स्टेडियम के अंदर जाने को मिला। थोड़ी देर बाद ही वहां व्यवस्था संभाल रहे पुलिस कर्मियों ने कहा कि शेल्टर होम में जगह नहीं है। ऐसे में मजदूरों को दयानंद मठ भेज दिया। जब ये मजदूर दयानंद मठ पहुंचे तो गेट के सामने गोहाना रोड पर खड़ा भी नहीं होने दिया। ये मजदूर भूखे-प्यासे परेशान थे। सूचना मिलने पर सति भाई सांईदास सेवादल के सेवादारों ने इन मजदूरों को भोजन कराया। बाद में इन मजदूरों को बस से भिवानी रोड स्थित निशुल्क पब्लिक स्कूल में बनाए गए अस्थाई शेल्टर होम में भेजा गया।

पहले रखने से किया मना, बाद में आश्रय का दावा : भिवानी शहर से पैदल ही शुक्रवार शाम 5 बजे गौड़ कॉलेज परिसर में बनाए गए शेल्टर होम में आश्रय के लिए बिहार के पूर्णिया जिला निवासी चुन्नू कुमार, मोहन कुमार, बहादुर ऋषि, सहाबी ऋषि, रामू कुमार सहित 11 प्रवासी मजदूर पहुंचे। इन मजदूरों ने बताया कि गेट पर ही तैनात कर्मचारी ने उनको रखने से मना कर दिया। बताया गया कि गौड़ कॉलेज के शेल्टर होम में जगह नहीं है। ऐसे में भिवानी रोड स्थित जनसेवा संस्थान चले जाओ। मजदूरों ने बताया कि वे सुबह से बिना भोजन के दौड़ रहे हैं। राशन और पैसा खत्म होने के बाद मजबूरी में वे पैदल ही घर के लिए निकल पड़े। वैसे शेल्टर होम पर ड्यूटी कर रहे सुरेंद्र गुप्ता ने दावा किया कि शुक्रवार को जितने भी प्रवासी मजदूर गौड़ कॉलेज में आए थे। सबको शेल्टर होम में जगह दे दी गई है।