लॉकडाउन में बहादुरगढ़ फुटवियर उद्योग में एक बार फिर से रौनक लौटी, पुरुष श्रमिक फैक्ट्रियों में पहुंचे

बहादुरगढ़. सरकार ने आधे श्रमिकों के साथ उद्योगों को चलाने की अनुमति तो दे दी है, पर अभी बहुत सारी दिक्कतें ऐसी हैं जिनका समाधान अभी धीरे-धीरे होना है। इसके बाद भी उत्तरी भारत के सबसे बड़े फुटवियर उद्योग में अब रौनक दिखाई देने लगी है। जो हर रोज के हिसाब से बढ़ रही है। बहादुरगढ़ फुटवियर पार्क में सबसे बड़ी समस्या श्रमिकों के संकट की सामने अा रही है वह भी महिला श्रमिकों की। पुरुष श्रमिक तो फैक्ट्रियों में वापस आने लगे हैं, जिससे फैक्ट्रियों में काम श्ुरू हुअा है व फैक्ट्रियों में एक बार फिर से पुरानी रौनक अाई है। पर महिला श्रमिक कैसे वापस अाएगी इसे लेकर फैक्ट्रियों के संचालकों के सामने केवल इंतजार करने के सिवा कोई चारा नहीं है। फुटवियर पार्क में साठ फीसदी काम जूते चप्पल बनाने में जो छोटा काम होता है उसे करने में महिला कारीगरों को महारथ हासिल है। इस कारण जूते-चप्पल बनाने में सबसे बड़ी परेशानी फैक्ट्रियों के काम को स्पीड देने के लिए महिला श्रमिकों की सबसे अधिक जरूरत है।

फैक्ट्री कर्मियों के चेहरों पर मुस्कान देख खुश उद्योगपति
दो माह से आर्थिक रूप से बर्बाद हो चुके फुटवियर कंपनियों के श्रमिकों ने जैसे ही फैक्ट्री को चलाने के लिए अपने हाथों में लिया तो उनके चेहरे पर खुशी देखते बनती है। उनके चेहरे की खुशी में फैक्ट्रियों के संचालकों के चेहरे पर भी मुस्कान लौटी है। बहादुरगढ़ की सबसे बड़ी फुटवियर कंपनी रिलेक्सो के संचालक विरेंद्र कुमार ने माना कि श्रमिकों के चेहरे व उत्साह से ही कोई उद्योग परवान चढ़ता है। इसी कारण अब फैक्ट्री में काम करते श्रमिकों को हंसते देखता हूं को मन को शांति मिलती है अब एक बार फिर से पटरी पर जीवन आएगा।

अन्य राज्यों से कनेक्टिविटी न होने से आ रही परेशानी:

रिलेक्सों के उपप्रधान विरेंद्र कुमार ने माना कि उद्योग आधे श्रमिकों से काम नहीं चल सकता। उद्योग चलाने के लिए पूरी मैन पॉवर का होना जरूरी है। जिनमें महिला श्रमिकों की सबसे अहम भूमिका है। इस बारे में भी सरकार जल्द ही सुझावों पर ध्यान देगी। बीसीसीअाई के प्रवक्ता मनोज सिंघल ने कहा कि वैसे भी काफी ऐसे छोटे-छोटे लघु उद्योग हैं जिनके सामने किराया देने का भी संकट है। ऐसे में वह अपने श्रमिकों का वेतन देने में असमर्थ हैं। जिन कंपनियों ने वेतन दे भी दिया है तो वहां से श्रमिक अपने गांव चले गए हैं। जब तक जिले में बड़ी कंपनियों से लेकर छोटी वर्कशाप नहीं चलेंगी, उद्योगों को राहत नहीं मिलेगी।

फुटवियर कंपनियों के शुरू होने से थमने लगा श्रमिकों का पलायन:

बड़े स्तर की 70 औद्योगिक इकाइयां हुई शुरू हो चुकी है। बहादुरगढ़ में सोमानी, सूर्या प्रकाश ट्यूब, पारले बिस्किट, योकोहामा व एचएनजी आदि में पहले से ही उत्पादन शुरू हो गया था। ये सभी बड़े स्तर की औद्योगिक इकाइयां हैं। वैसे बहादुरगढ़ में करीब 70 बड़े स्तर की इकाइयों ने प्रशासन से अनुमति मिल गई थी। अधिकांश ने उत्पादन शुरू कर दिया है। हालांकि फुटवियर में भी कई कंपनियां बड़े स्तर की हैं जिनमें इनमें रिलेक्सो, डायमंड, एक्शन, एक्वालाइट, टीआरवी, लांसर, टुडे, वेलकम, एसएलजी आदि में धीरे-धीरे काम शुरू हो गया है।

फुटवियर कंपनियों को जुलाई तक चाहिए पूरे श्रमिक:

रिलेक्सों के संचालक विरेंद्र कुमार की माने तो फुटवियर में जुलाई के बाद श्रमिकों की सबसे अधिक जरूरत होती है, क्योंकि तब सीजन की शुरुआत होती है। इन दिनों में वैसे भी श्रमिक विवाह समारोह व फसल व बाढ़ बरसात के देखते हुए अपने अपने घर व्यवस्था करने जाते हैं। इस बार भी बहादुरगढ़ में जुलाई तक सभी श्रमिक वापस आ जाएंगे। फिलहाल सिर्फ 25 से 30 फीसदी कर्मचारी ही काम करने के लिए मिल रहे हैं। करीब 70 फीसदी कुशल व अकुशल श्रमिकों की जरूरत को भी जल्द से जल्द पूरा किया जा रहा है। उम्मीद है कि दिल्ली से कर्मचारियों के आवागमन पर रोक भी जल्द ही हटेगी व पर्याप्त संख्या में कर्मचारी बहादुरगढ़ पहुंचने लगेंगे।

समस्याओं के बीच भी खुश, अब काम फिर से चलने लगा:

यू तो सामने कच्चा माल लाने और बहुत के सामने तैयार हुए माल को बेचना समस्या बनी हुई है। कई तरह का माल दूसरे राज्यों से आता है। ऐसी अनेक व्यवहारिक दिक्कतें हैं। इन्हीं समस्याओं की वजह से अभी उद्योग धंधों को पटरी पर आने में वक्त लगेगा। अब उद्योगपतियों की नजरों में अब खुशी है कि वे अपनी मेहनत से पहले जैसा समय वापस ले अाएंगे। वह उम्मीद कर रहे हैं कि जल्द ही समूचे देश में लॉकडाउन खुल जाएगा तभी उद्योग सुचारू रूप से चल सकेंगे। उद्योगों की पूरी सप्लाई चेन खुलनी चाहिए। छोटी से लेकर बड़ी फैक्ट्रियां चलनी चाहिए। माल कहां से आएगा और तैयार माल कैसे बेचा जाएगा, इसकी पूरी व्यवस्था होनी चाहिए। अभी तो सभी प्रदेशों में मार्केट ही नहीं खुली है। इस तरह की काफी दिक्कतें आ रही हैं, जिनका समाधान जल्द होने की संभावना बनने लगी है।