बच्ची की मौत के बाद नगरपरिषद ने शहर से 2 हजार बंदरों को पकड़ने के लिए लगाया टेंडर, 31 मई को ओपन होगा

  • बंदर पकड़ने वाली 5 साल के अनुभव वाली पार्टी को दी जाएगी प्राथमिकता

जींद. आखिरकार नगर परिषद बच्ची की मौत के बाद शहर से बंदरों को पकड़ने के मामले में जाग गया है। नगर परिषद ने एक बार फिर से बंदरों को पकड़ने के लिए टेंडर लगाया है। शहर से दो हजार बंदरों को पकड़ा जाएगा। इससे पहले भी नगर परिषद दो बार बंदरों को पकड़ने का टेंडर लगा चुका है, लेकिन उन्हें रद्द कर दिया गया। अब तीसरी बार फिर से टेंडर
लगा है, जो 31 मई को ओपन किया जाएगा।

खास बात यह है कि 5 साल का अनुभव रखने वाली बंदर पकड़ने वाली फर्म को प्राथमिकता दी जाएगी। पिछले एक साल से शहर में बंदरों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसी कोई काॅलोनी नहीं है, जहां बंदर के झुंड न हों। आए दिन बंदरों के काटने के मामले सिविल अस्पताल में भी बढ़ रहे हैं। प्रतिदिन 15 से 20 केस बंदरों के काटने के आ रहे हैं।

16 मई की शाम को भी इंदिरा काॅलोनी निवासी 8 साल की बच्ची नैना की जान भी बंदरों के आतंक के कारणा चली गई थी। 16 मई की शाम को काॅलोनी के बच्चे खेल रहे थे। इस दौरान बंदरों ने हमला कर दिया तो बच्चे भागने। इस दौरान नैना भी जान बचाने के लिए भागने लगी तो नहर में गिर गई, जिससे उसकी जान चली गई। यही नहीं काॅलोनी के ही 5 साल के बच्चे हंसू को भी बंदरों ने काट लिया था। इससे पहले भी कई मामले सामने आ चुके हैं।

सामाजिक संस्थाएं भी लंबे समय से नगर परिषद प्रशासन से बंदर पकड़ने की मांग कर चुके हैं। नगर परिषद ने बंदरों को पकड़ने के लिए दो बार टेंडर लगाए। पहली बार टेंडर लगाए तो फर्म ने 800 रुपए प्रति बंदर पकड़ने की मांग की, जिसे नगर परिषद ने नकार दिया था। दूसरी बार टेंडर टेक्निकल कारणों के चलते नगर परिषद ने रद्द कर दिया था। अब तीसरी बार फिर से टेंडर
लगाया गया है, जो 31 मई को खोला जाएगा।