दुआ करें इस आशा को निराशा न मिले…10 दिन के बच्चे को उठाकर 5 दिन पैदल चली, अब निमोनिया-डीहाइड्रेशन से पीड़ित बच्चा निक्कू वार्ड में भर्ती

  • लुधियाना से उन्नाव के लिए पैदल निकले थे, शंभू बॉर्डर पर पंजाब पुलिस ने जंगल में छोड़ा

अम्बाला. हमारा हरियाणा जहां बच्चे के जन्म के बाद प्रसूता को 40 दिन घर से बाहर नहीं निकलने देते। वहीं अपने 10 दिन के बच्चे को गोद में उठाकर यूपी के उन्नाव की आशा परिवार समेत 80 लोगों की टोली में 5 दिन पैदल चली। लुधियाना से 108 किलोमीटर दूर हरियाणा के शंभू बॉर्डर के पास पहुंचे तो पंजाब पुलिस ने सभी को गाड़ी में बैठाया और काफी दूर सुनसान जंगल में छोड़ दिया। पूरी रात भूखे-प्यासे चलकर बुधवार को टोली किसी तरह बॉर्डर पार कर अम्बाला पहुंच गई।
अम्बाला प्रशासन ने सभी प्रवासियों को मुलाना के राधा स्वामी सत्संग भवन में बने शेल्टर होम में ठहराया। जहां पर आशा के बच्चे और पति बलेश्वर की तबियत बिगड़ी। बच्चे, प्रसूता और उसके दादा-दादा को कैंट के सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां पर प्रसूता तो ठीक है, लेकिन नवजात बच्चे को इंफेक्शन ज्यादा होने से उसकी किडनी पर असर पड़ा है। धूप-छांव में चलने से बच्चे को निमोनिया हो गया। भूख प्यास के चलते पूरी तरह से ड्री-हाइड्रेशन की दिक्कत पैदा हो गया है। डॉक्टर ने बताया कि बच्चे की नाजुक हालत को देखते हुए पीजीआई रेफर किया था लेकिन बाद में निक्कू वार्ड के अंदर रखा गया। डॉक्टरांे का कहना है कि अभी बच्चे की सेहत को लेकर कुछ नहीं कहा जा सकता, हालत नाजुक है।

राधा स्वामी शेल्टर होम मुलाना में सहारा मिला और सरकारी अस्पताल में इलाज
खाने-कमाने आए थे लुधियाना
यूपी में जिला उन्नाव के गांव पूरन खेड़ा निवासी खंजेश्वर सिंह ने बताया कि लुधियाना में परिवार के साथ खाने कमाने के लिए आए थे। बेटा बलेश्वर कपड़ा फैक्टरी में टेलर था। दूसरे बेटे भी फैक्टरी में ही काम करते हैं। कमरा किराये पर लिया हुआ था। दो महीने पहले फैक्टरी बंद हो गई। मई में किराया नहीं दे पाए। मकान मालिक ने घर खाली करने का दबाव बनाया। इसी बीच बलेश्वर की पत्नी आशा ने बेटे के रूप में पहली औलाद को जन्म दिया। जब तक बच्चा 10 दिन का हुआ तब तक परिवार पर भूखमरी की नौबत आ गई थी। जब लुधियाना में थे तब ट्रेन के लिए अॉनलाइन रजिस्ट्रेशन कराया था। कई दिन कोई रिस्पांस नहीं आया तो पैदल चले थे। अम्बाला पहुंचे तक मोबाइल पर मैसेज आया कि लुधियाना से आपके लिए टिकट कंफर्म है।
} पलायन में सबसे ज्यादा प्रभावित गर्भवतियां व बच्चे
1. परिवार को साइकिल पर लेकर पटियाला से यूपी के अंबेडकर नगर के लिए निकले सदानंद पर अम्बाला एसपी की नजर पड़ी। उनके साढ़े 3 साल के बेटे सुजीत को अम्बाला में चेक कराया तो दिल में छेद का पता चला।
2. काला अम्ब से यूपी के बदायूं के लिए पैदल निकली केतकी को परिवार समेत नारायणगढ़ के राधा स्वामी सत्संग भवन में बने शेल्टर में ठहराया। यह प्रसव पीड़ा के बाद अस्पताल में बच्ची को जन्म दिया।