कोरोना से 6 माह तक टले राज्य के बड़े प्रोजेक्ट, अब काम शुरू करने को मजदूर कम

  • इन बड़े प्रोजेक्ट्स का काम रुका : अधिकांश जगह मशीन से ज्यादा काम निपटाने की कोशिश
  • प्रदेश में हजारों करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट अटके

पानीपत. लॉकडाउन की वजह से प्रदेश में चल रहे हजारों करोड़ रुपए के बड़े प्रोजेक्ट्स के निर्माण अटक गए हैं। ये प्रोजेक्ट अब 2 से 6 माह तक की देरी से बनकर तैयार होंगे। इनमें अम्बाला के वॉर हीरोज मेमोरियल स्टेडियम समेत कई नेशनल हाईवे भी शामिल हैं। भिवानी में रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण लटक गया है। पिपली में थर्डगेट सिक्स लेन का काम रुक गया है। कैथल से करनाल स्टेट हाईवे का काम रुक गया है। यमुनानगर में यमुना पर बनने वाले पुल का िनर्माण अटक गया है। दूसरी ओर श्रमिकों के चले जाने से दिक्कत और बढ़ गई है। इन निर्माणों का काम शुरू होने में वक्त लग रहा है या फिर कम मजदूरों से काम शुरू कराने की कोशिश की जा रही है। प्रदेश में विकास की गति को गहरा झटका लगा है।

कुरुक्षेत्र: सिक्स लेन 15 माह में पूरा होना था, अब दो महीने की और देरी होगी

पिपली-थर्डगेट सिक्स लेन: लागत- करीब 56 करोड़: दोबारा टेंडर होने पर 15 महीने का टारगेट था। लॉकडाउन की देरी से करीब दो महीने और देरी। लॉकडाउन के बाद काम शुरू हो चुका है, लेबर की कमी है, मशीनों से ज्यादा काम लिया जा रहा, लेकिन इसके बावजूद लेबर की कमी आड़े आ रही है। जिले में कई जगह छोटे-छोटे निर्माण कार्य भी रुक गए हैं। उनके लिए मजदूर नहीं मिल रहे हैं या काम पर आने के लिए ज्यादा पैसे की डिमांड करने लगे हैं।
द्रोणाचार्या स्टेडियम में सिंथेटिक ट्रैक, लागत 6.75 करोड़: 90 प्रतिशत से ज्यादा काम पूरा हो चुका था, लॉकडाउन के चलते बंद। पहले ही पांच महीने की देरी हो चुकी है। अब तीन महीने और हो सकती है। लेबर की कमी के चलते काम शुरू होने में एक माह का समय लग सकता है
द्रोणाचार्या स्टेडियम नवनिर्माण, दो करोड़ रुपए: मार्च अंत तक पूरा होना था-अभी पांच से छह महीने और लग सकते हैं, क्योंकि लेबर की कमी हो गई है।

भिवानी: तोशाम बाइपास व गुजरनी मोड़ पर रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण कार्य अटका

तोशाम बाइपास व गुजरानी मोड़ स्थित रेलवे फाटक पर ओवर ब्रिज निर्माण लटका है। दोनों स्थानों पर सड़क िनर्माण, सोयल टेस्टिंग का कार्य हो चुका है। रूट डायर्जन का प्लान तैयार कर 24 मार्च से भारी वाहनों पर रोक लगानी थी, लेकिन लॉकडाउन से काम लटक गया।
तोशाम बाइपास डबल रेलवे फाटक ओवरब्रिज 37 करोड़: डबल फाटक होने के कारण यह ओवर ब्रिज समान्य 800-900 मी लंबे के स्थान पर 1100 मी लंबा व 7.5 मीटर चौड़ा बन रहा है। कार्य शुरू हुआ है लेकिन मजदूरों की कमी से गति नहीं पकड़ रहा है। नियमित से कार्य होता तो मई के प्रथम सप्ताह में पिलर काम शुरू हो जाता, अब अगस्त व सितंबर तक होेने की उम्मीद है। डेढ़ साल का समय लगना था लेकिन दो साल लग सकता है। मजदूरों की कमी हो गई है।
आरओबी की लागत 16 करोड़: 800 मी. लंबा व 8.5 मी चौड़े ओवर ब्रिज के लिए केवल सोयल टेस्टिंग हुई है। लॉकडाउन में कार्य बंद होने से मजदूरों की कमी हो गई है।

सोनीपत: लेबर न होने से दाे नेशनल हाइवे और वेस्ट एनर्जी प्लांट का काम रुका

एनएच-334बी : लागत 7500 कराेड़ रुपए। निर्माण कार्य जनवरी में शुरू हुआ। मार्च में बंद हो गया, यह 2023 तक पूरा होना है।
एनएच-352ए : 1800 कराेड़ रुपए से सोनीपत से जींद तक चौड़ीकरण होना है। इस पर मार्च से कम बंद है।
वेस्ट टू एनर्जी प्लांट : 176 करोड़ रुपए से प्लांट में कूड़े से एनर्जी बनाई जानी है। 2019 में काम शुरू हुआ। सितंबर के बजाय इस साल नवंबर में ट्रायल होने की संभावना है।

यमुनानगर: यमुना का पुल और सिविल अस्पताल की बिल्डिंग का काम बाकी

यमुनानगर में यमुना नदी पर बनने वाला पुल, सिविल अस्पताल की बिल्डिंग और पश्चिमी यमुना नहर पर बाडी माजरा का पुल मेन बड़े काम है। यह काम 2 से 5 माह लेट हो रहे हैं। इनमें िकसी लागत बढ़ी है। जिस रेट पर टेंडर हुआ है वही बजट रहेगा। यमुना नदी पुल में करीब 60 कर्मचारी लगे थे, 2 महीने से काम पूरी तरह बंद था। 15 तारीख से 20 से 22 लोगों के साथ शुरू हुआ है।
फतेहाबाद: नए बस स्टैंड का काम लगभग पूरा, सिर्फ सीवरेज लाइन का काम रुका
नया बस स्टैंड, लागत तीन करोड़: हिसार रोड पर नए बस स्टैंड का भवन तैयार है। लेकिन सीवरेज लाइन का काम रुका है। पहले ही 1 साल देरी से चल रहा है। अब यह 6 महीने और लेट होने की संभावना है। हालांकि लोकल लेबर से पुट्‌टी व ग्रील आदि लगाने का काम चल रहा है।

कैथल: करनाल तक बनने वाले स्टेट हाईवे का काम पूरा हो चुका होता, मजदूर कम

करनाल स्टेट हाईवे नंबर-8 फोरलेन, लागत 189 करोड़: जिले के हिस्से का काम अब तक पूरा चुका होता, लॉकडाउन में काम हुआ लेबर के कमी से अभी शुरू नहीं हुआ है। 21 मार्च 2021 तक काम पूरा होना था अब 3-4 माह की देरी हो सकती है, लागत बढ़ने की कोई बात नहीं है।
तितरम मोड से अंबाला बाईपास सड़क: लागत 4.50 करोड़: टेंडर हो चुका था पर लॉकडाउन से प्रक्रिया रुक गई, टेंडर को एक्सटेंड करना पड़ा था। लेबर की कमी होने के चलते 2 से 3 माह तक काम शुरू होने की संभावना नहीं है।
चार किमी फोर लेन प्रोजेक्ट: लागत 22 करोड़: अंबाला रोड स्थित कैथल ड्रेन से नेशनल हाईवे बाईपास तक चार किमी टुकड़े को फोरलेन करने का काम रुका है। पहले वन विभाग से एनओसी के लिए पेड़ों की कटाई नहीं हो पाई। लेबर की कमी आड़े रही है।
इसके अलावा: 2 करोड़ की लागत से कैथल लघु सचिवालय में ई दिशा केंद्र भवन का निर्माण रुका है। तीन चार माह की देरी होने की संभावना है।

अम्बाला: 700 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट रुके, कई बंद हैं तो कई जगह लेबर की हुई कमी

यहां करीब 700 करोड़ के प्रोजेक्ट प्रभावित हैं। कई बंद है तो कई में लेबरों की कमी से तेजी नहीं है। अधिकांश काम मशीन से हो रहा है। किसी प्रोजेक्ट की लागत अभी नहीं बढ़ाई गई है।
वॉर हीरोज मेमोरियल स्टेडियम: लागत 82 करोड़: 80 मजदूर काम कर रहे थे, अब मात्र 30 रह गए हैं। 30 अप्रैल 2020 तक पूरा होना था। 4 महीने और लग सकते हैं।
कैंट-साहा नेशनल हाईवे फोरलेन : लागत 220 करोड़: प्रोजेक्ट की रफ्तार धीमी है। पहले एक साथ कई पॉइंट पर काम होता था। अब एक ही पॉइंट पर निर्माण चल रहा है। कैंट सिविल अस्पताल में डॉक्टर्स-स्टाफ टावर बनाना पड़ा।16 श्रमिक कोरोना पॉजिटिव मिले तो कंटेनमेंट जोन बन गया।
हीरोज मैमोरियल: लागत 200 करोड़: लेबर की कमी से काम भी बाधित हो गया है। तीन माह की देरी होगी। नेता जी सुभाष चंद्र बोस पार्क का काया कल्प: लागत 18 करोड़।