इनके जिम्मे कोरोना को हराने के लिए चक्रव्यूह जाेन बनाना ताकि लाेग बचें और काेराेना हारे

  • डीसी ऑफिस के ये दो कोरोना योद्धा रोजाना कर रहे 16 घंटे तक काम

रोहतक. कोरोना वायरस से बचाव के लिए जिस तरह से स्वास्थ्य कर्मी लगे हुए हैं, उसी तरह से कोरोना से आमजन को बचाने के लिए कोरोना योद्धा भी मैदान में 58 दिन से डटे हुए हैं। सरकारी कर्मचारी होते हुए भी बगैर अवकाश के लगातार अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं, वह भी रोजाना 14 से 16 घंटे तक। काेराेना वायरस के खतरे के बीच लाॅक डाउन के पहले दिन से अब तक 58 दिन से ड्यूटी देने और हर तरह की मुश्किल परिस्थितियों के बीच कभी ऊफ तक नहीं की और घर पर खुद क्वाॅरेंटाइन जैसे हालात में भी रहते हैं, ताकि परिवार को भी बचाया जा सके। अगर जिले में कोई नया कोरोना पॉजिटिव आ जाए, तो स्वास्थ्य विभाग के बाद सबसे ज्यादा काम इन योद्धाओं का भी बढ़ जाता है। कारण, कोरोना वायरस से बचाव के लिए कंटेनमेंट जोन बनाने की प्रक्रिया शुरु होती है। एक कंटेनमेंट जोन बनाने में करीब 4 घंटे का समय लगता है। चार विभागों, स्वास्थ्य, नगर निगम, पुलिस विभाग के संबंधित थाना क्षेत्र और प्रशासन के बीच तालमेल भी बनाना होता है। ये दोनों योद्धा हैं डीसी कार्यालय के सुप्रींटेंडेंट सुरेंद्र सिंह और एमए ब्रांच के असिस्टेंट जलधीर सिंह। डीसी कार्यालय का हालांकि स्टाफ भी 100 फीसदी वर्किंग कर रहा है।

अब तक बन चुके 16 कंटेनमेंट, दो वापस :

पहले दिन से अब तक ये दोनों कोरोना योद्धा सुप्रींटेंडेंट सुरेंद्र सिंह और असिस्टेंट जलधीर सिंह अब तक जिले में 16 कंटेनमेंट जोन तैयार कर चुके हैं। इनमें ककराना, सांपला मंडी, अटायल, शिव कॉलोनी, मडौधी जाटान, गिरावड़, समचाना, जनता कॉलोनी, सब्जीमंडी, रूड़की, पीजीआईएमएस, वार्ड नंबर तीन नगर निगम, वार्ड नंबर 6 नगर निगम, शास्त्री नगर, सेक्टर दो और नया बांस गांव का नया कंटेनमेंट जाेन बन चुका है। वहीं जिले में गुरुवार को पहली बार दो पुराने कंटेनमेंट जोन ककराना और सांपला मंडी के आदेशों को वापस ले लिया गया है। अब यहां पर कंटेनमेंट जोन नहीं रहेगा और आमजन स्वतंत्र तरीके से फिर से आवाजाही कर सकेंगे, लेकिन कोरोना वायरस से बचाव के लिए एहतियात बरतनी होगी।

जब 36 घंटे तक की लगातार ड्यूटी :

जलधीर सिंह कहते हैं कई ऐसे मौके भी आए जब लगातार 36 घंटे तक ड्यूटी करनी पड़ी। 24 मार्च की रात को जब लॉक डाउन लागू होने से पहले ही ड्यूटी पर थे। अचानक आदेश होते ही जिले की जनता के लिए नए आदेश बनाए जाने थे, इनके लिए पूरी तैयारियां करने में जुट गए थे। वे कहते हैं कि ऐसा नहीं है कि सिर्फ हम ही ड्यूटी कर रहे थे, हमारे जिले के मुखिया डीसी आरएस वर्मा भी हमारे साथ ही कार्यालय में डटे हुए थे। ऐसे में हमारा हौसला भी दोगुना हो गया। हालांकि ये बात अलग है कि जब घर लौटे तो लगातार काम करने और नींद ना आने की वजह से आंखें काफी मोटी हो गई थी और घर वालों की नाराजगी भी झेलनी पड़ी। वहीं सुप्रींटेंडेंट सुरेंद्र सिंह कहते हैं कि इससे पहले 1995 की बाढ़ के समय और फरवरी दंगों के दौरान इस तरह के हालात देखे थे जब युद्ध स्तर पर काम करने का मौका मिला था।