54 ईंट भट्ठों और 50 पाइप फैक्ट्रियों की लेबर नहीं जाने से काम प्रगति पर, कृषि कार्यों में लगे श्रमिक वापस जाने से बढ़ी दिक्कतें

  • शहर की 10 जूता -चप्पल फैक्ट्रियों में काम करने वाले 500 श्रमिकों में से 400 वापस गए अब 100 मजदूरों से ही चला रहे काम

फतेहाबाद. जिले में रह रहे प्रवासी श्रमिकों का अपने राज्य में वापस जाना लगातार जारी है। अपने राज्य में वापस जाने वाले अधिकतर श्रमिक ऐसे हैं, जो गेहूं के सीजन में यहां काम कर रहे थे या जिले के राइस शैलरों में लगे हुए थे। इन श्रमिकों के वापस जाने से पाइप फैक्ट्रियों व ईंट भट्ठों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है।

क्योंकि लेबर अब तक जहां है, वहीं काम में लगी हुई है। इसके अलावा शहर की लगभग 10 जूता-चप्पल फैक्ट्रियों में कार्य करने वाले अधिकतर मजदूर अपने राज्य में चले गए हैं जिस कारण इन फैक्ट्रियों को अब 100 लोगों से ही काम चलाना पड़ रहा है। कृषि कार्यों में लगे श्रमिकों के वापस जाने के कारण अब जिले के धान उत्पादक किसानों को धान की रोपाई करने में परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।

पाइप फैक्ट्री संचालकों को केवल इंटर स्टेट ट्रांसपोर्ट में प्रॉब्लम : जिले में 50 पाइप फैक्ट्रियां हैं। इन्हें सरकार ने लॉकडाउन 3.0 में ही चलाने की अनुमति दे दी थी। इनमें एक फैक्ट्री में 8 से 10 श्रमिक काम करते हैं। क्योंकि फैक्ट्रियां शुरू हो गई थी इसलिए लेबर भी नहीं गई। पाइप फैक्ट्री संचालकों ने बताया कि उन्हें लेबर संबंधी परेशानी नहीं है।

राइस शैलरों में मार्च से बंद है काम, वापस लौटे श्रमिक
नवंबर-दिसंबर में धान निकालने के बाद प्रवासी श्रमिक मंडियों से फ्री होने के बाद राइस शैलरों में धान का दाना निकालने में लग जाते हैं। यह काम मार्च तक चलता हैैैै। 31 मार्च तक राइस शैलरों को धान का चावल निकालने का टारगेट पूरा करना होता है। इसी के चलते लॉकडाउन लगने के समय शैलरों का लगभग काम पूरा हो गया था। लेकिन लॉकडाउन होने के कारण लेबर यहां फंस गई। अब धान की रोपाई शुरू होने में भी एक महीना बाकी है जिस कारण प्रवासी श्रमिक यहां नहीं रूकना चाहते तथा अपने परिवार के पास जाना चाहते हैं।

8200 श्रमिकों ने करवाया पंजीकरण

जिले में रह रहे विभिन्न जिलों के 8200 प्रवासी श्रमिकों ने वापस आने राज्य में जाने के लिए पंजीकरण करवाया था। इनमें से राजस्थान, जम्मू, पंजाब, मध्यप्रदेश व यूपी के अधिकतर लोगों को बस व ट्रेनों के माध्यम से वापस भेज दिया गया है। अब जिले में बिहार के करीब साढ़े 3 हजार प्रवासी श्रमिक हैं जिन्हें प्रशासन विशेष ट्रेन के माध्यम से भेजेगा।

भट्ठों की लेबर नहीं गई वापस, 25 अप्रैल से है काम शुरू
^लाॅकडाउन होने के बाद हमारी यूनियन ने यह निर्णय लिया था कि 54 भट्ठों पर रुकी हुई लेबर का कोई भी सदस्य भूखा नहीं रहना चाहिए। इसके बाद 25 अप्रैल से भट्ठों में काम शुरू करने की अनुमति मिलने के बाद काम शुरू हो गया था। जिस कारण भट्ठों की लेबर वापस नहीं गई है।'' -औमप्रकाश, प्रधान, जिला ईंट भट्ठा यूनियन।

केवल इंटर स्टेट माल भेजने में ही दिक्क्त: प्रधान

^पाइप फैक्ट्रियों में लेबर की कोई कमी नहीं है। सभी 50 पाइप फैक्ट्रियों में सामान्य की तरह काम चल रहा है। हमें सिर्फ इंटर स्टेट माल भेजने में थोड़ी परेशानी हो रही है। कई जगह चैकिंग से गुजरना पड़ता है।'' -सुरेश मिढ़ा, प्रधान, प्लास्टिक पाइप फैक्ट्री एसोसिएशन।

कच्चे माल व श्रमिकों की दिक्कत: संचालक
^चप्पल व जूता फैक्ट्रियों में काम करने वाले अधिकतर श्रमिक वापस जा चुके हैं। अब कम श्रमिकों से काम चला रहे हैं। हमें कच्चे माल की भी समस्या आ रही है।'' -ललित मखीजा, चप्पल फैक्टरी संचालक।