343 फैक्ट्रियों में काम शुरू, 5 हजार को फिर मिला रोजगार 2200 ने रजिस्ट्रेशन कैंसिल करवाया, अब नहीं जाएंगे घर

  • बदल रही तस्वीर- अब सड़कों पर नहीं कारखानों में पहुंच रहे हजारों श्रमिक
  • जिला प्रशासन 14 हजार में से अब तक 2500 मजदूरों को भेज चुका घर, अब बिहार जाना चाहते हैं केवल 4400

डबवाली. लॉकडाउन-4 में मिली छूट के बाद जिला में शुरू हो रहे उद्योग फैक्ट्रियों के साथ-साथ निर्माण कार्य करने वाले मजदूरों ने अपना पलायन करने का मन बदल लिया है। अब मजदूर वापस काम पर लौटने लगे हैं। कोरोना मुक्त सिरसा जिला में मजदूरों का आत्मविश्वास फिर से बढ़ना शुरू हो गया है। यही कारण है कि 2200 मजदूरों ने अपने घर जाने का इरादा बदलते हुए वापस काम पर लौटना ही मुनासिब समझा है। वे फिर से अपने पुराने कार्य पर लौटने लगे हैं। मजदूरों का कहना है कि जब सबकुछ बंद था तो उन्हें डर लगने लगा था, मगर अब फिर से स्थिति बदल गई है। वापस काम धंधे शुरू हो गए हैं। बाजार खुल गए हैं। बसें भी चलने लगी है। इसलिए उन्होंने अब वापस अपने राज्य जाने का प्लान बदल दिया है। अब वे अपने काम पर लौट आए हैं।

मजदूर बोले, उन्हीं यहीं करना है काम

कोरोना महामारी के चलते जिला में बिहार, एमपी, और यूपी वापस जाने के लिए करीब 14 हजार प्रवासी मजदूरों ने रजिस्ट्रेशन करवाया था। इसमें से 2500 मजदूरों को जिला प्रशासन बस और ट्रेन के जरिए उनके राज्य में भेज चुका है। जबकि 4 हजार मजदूर पैदल और अपना निजी वाहन करके निकल चुके हैं। करीब 2200 मजदूरों ने अपना रजिस्ट्रेशन यह कहकर कैंसिल करवाया है कि उन्हें यहीं पर काम करना है। इसलिए वे नहीं जा रहे। उन्हें काम मिल चुका है।

4400 बिहार निवासी मजदूर अभी जाने के लिए वेटिंग में है। उनमें से कितने मजदूर जाते हैं और कितने रहते हैं। इसका अभी पता लगना है। बिहार के लिए गुरुवार से मजदूरों को भेजने का कार्य किया जाएगा। जबकि जिला में शुरू हो चुकी 343 फैक्ट्रियों में करीब 5 हजार मजदूरों को काम मिल चुका है। सिरसा में कुल 8 हजार के करीब मजदूर फैक्ट्रियों में कार्य करते रहे हैं। यहां बता दें कि जिला में कुल छोटी मोटी 1800 फैक्ट्रियां है। जिनमें से 343 फैक्ट्री पहले की भांति चल गई है। हालांकि कुछ मजदूरों की कमी सभी फैक्ट्री संचालक झेल रहे हैं। 100 की बजाए 70 फीसदी मजदूरों से काम चलाना पड़ रहा है।

एमपी के लिए भेजे गए 109 प्रवासी मजदूर, आज हिसार से बिहार जाएंगे 300 मजदूर, सिकंदरपुर डेरा से भेजे जाएंगे

इधर बिहार और एमपी के कुछ प्रवासी मजदूर अभी भी जाने की जिद पर अड़े हुए हैं। बिहार के कुल 4400 मजदूरों ने रजिस्ट्रेशन करवाया हुआ है। बिहार के लिए गुरुवार को हिसार से ट्रेन चलेगी। जिसमें सिरसा से 300 मजदूर किशनगंज स्टेशन के लिए भेजे जाएंगे। बाकी मजदूर दूसरी ट्रेनों में जाएंगे। अब 4400 मजदूरों में से कितने जाते हैं और कितने रुकते हैं। यह पता लगना बाकी है। इधर बुधवार को सिकंदरपुर डेरा से 109 मजदूर एमपी के लिए भेजे गए। इनके लिए तीन रोडवेज की बसें गई है। डेरा सिकंदरपुर ने सभी को लंच भी दिया है।

शेल्टर हाउस में बिहार और झारखंड के 92 मजदूर बोले, हमें अपने गांव जाना है

भगत सिंह स्टेडियम में बनाए गए शैल्टर हाउस में 92 मजदूर प्रशासन ने रोक रखे हैं। जो पैदल जाने के लिए निकले थे। मजदूरों को प्रशासन खाना खिला रहा है। सभी सुविधाएं दी जा रही हंै। बिहार, झारखंड के रहने वाले मजदूरों ने कहा कि उन्हें अब जल्दी से घर भेजा जाए। वे पैदल चले थे। प्रशासन ने उन्हें यहां रोक लिया है। खाने पीने की कोई दिक्कत नहीं है, मगर उन्हें एक बार घर जाना है।

कंटेनमेंट जोन को छोड़ परमिशन के साथ खोल सकते फैक्ट्रियां
जिला उद्योग केंद्र के उपनिदेशक गुरुप्रताप सिंह ने बताया कि जिला में कुल 1800 छोटी मोटी फैक्ट्रियां है। जिनमें से 343 खुल चुकी है। 5 हजार के करीब मजदूर उनमें काम कर रहे हैं। जिला में कंटनेमेंट जोन को छोड़कर परमिशन लेकर फैक्ट्ररी उद्योग चलाए जा सकते हैं।
बाबूजी 15 साल से पेपर मिल में काम कर रहे हैं, जब बंद थी तब घर जाना चाहते थे, अब नहीं
बेगू रोड स्थित जिला की सबसे बड़ी फैक्ट्री जगदंबे पेपर मिल में कार्य कर रहे 45 वर्षीय मोतीचंद ने अपना रजिस्ट्रेशन कैंसिल करवाते हुए बताया कि बाबूजी हम पिछले 15 साल से इस पेपर मिल में काम कर रहे हैं। लॉकडाउन में सबकुछ बंद हो गया था। उस समय वापस घर (यूपी) जाने की तैयारी की थी। अब स्थिति बदल गई है। मिल भी चल गई है। इसलिए हम अब नहीं जाएंगे। वहीं पर कार्य करने वाले अशोक कुमार और नंद किशोर ने बताया कि वे दोनों 10 साल से काम कर रहे हें। बेशक हमारी मिल बंद थी। मगर मालिक मनमोहन गोयल ने उनका वेतन भी नहीं काटा और उन्हें खाना भी देते रहे हें। इसलिए वे अपने मालिक और मिल के प्रति समर्पित है। हम अब छुट्‌टी लेकर आगे दिवाली पर ही घर जाएंगे। वहीं इंडस्ट्रियल एरिया में फूड प्रोडेक्ट फैक्ट्री दीपम में काम कर रही महिला उर्मिला और आशा रानी ने बताया कि उन्हें यहां काम मिल गया है। इसलिए वे बहुत खुश है। पहले काम बंद था। यहां पर जिला उद्योग केंद्र के उपनिदेश गुरुप्रताप सिंह ने भी मौके पर जाकर निरीक्षण किया।
2 हजार से अधिक मजदूर करवा चुके रजिस्ट्रेशन कैंसिल
डीआरओ विजेंद्र भारद्वाज ने बताया कि अब तक प्रशासन की ओर से 2500 मजदूरों को उनके राज्य भेजा जा चुका है। कुल रजिस्ट्रेशन 14 हजार के करीब हुए थे। जिसमें से 15 से 20 प्रतिशत मजदूर अपना रजिस्ट्रशन कैंसिल करवा चुके हैं। बिहार के मजदूर गुरुवार से भेजे जाने शुरू कर दिए जाएंगे।