श्रमिक बाेले- न राेजगार बचा, न राशन लेने के लिए रुपए, मकान मालिक मांग रहा है दाेगुना किराया

  • घर जाने की आस में यूपी और बिहार के रहने वाले श्रमिक 3 दिन से सेक्टर-29 में कर रहे इंतजार

पानीपत. घर जाने की आस में यूपी और बिहार के रहने वाले श्रमिक 3 दिन से सेक्टर- 29 स्थित शाम बाग के सामने इंतजार कर रहे हैं। उनका कहना है कि लाॅकडाउन के कारण यहां राेजगार ताे बचा नहीं है। जाे रुपए थे वाे भी खत्म हाे गए हैं।
ऊपर से मकान मालिक दाे गुना किराया मांगने लगा है। एेसे में वह किराया कहां से देंगे। रोजगार भी नहीं रहा। इससे अच्छा है कि वह अपने-अपने गृह जिले ही वापस लाैट जाएं। मजदूरी कर परिवार का पेट ताे भर ही देंगे। जिला प्रशासन किसी तरह उनके रहने की व्यवस्था कर दे। हालात सामान्य हाे गए ताे फिर वापस अा जाएंगे।

1800 था किराया अब मांग रहे हैं 4 हजार रुपए
नालंदा, बिहार के रहने वाले जगदीश ने बताया कि वह पानीपत के बाबरपुर मंडी में 3 साल से रह रहा है। जीटी राेड स्थित फैक्ट्री में धागा बनाने का काम करता है। लाॅकडाउन के कारण फैक्ट्री बंद है। दाे वक्त का पेट ताे वह किसी तरह से भर रहे थे। एेसे में मकान मालिक ने परेशान करना शुरू कर दिया। पहले वह 18 साै रुपए किराए लेता था। अब 4 हजार रुपए मांगने लगा है। वह इतने रुपए कहां से लाएं। इससे अच्छा है कि घर वापस ही लाैट जाएं।

4 दिन पहले आ गया था रजिस्ट्रेशन का मैसेज

बेतिया, बिहार के रहने वाले मुन्नाराम ने बताया कि वह दाे साल से इसराना में रह रहा है। एक फैक्ट्री में वह बताैर मैकेनिक काम कर रहा था। यहां अब राेजगार ताे बचा नहीं है। पत्नी अाैर दाे बच्चाें काे क्या खिलाऊं। अब तक काेई मदद भी नहीं मिल रही है। एेसे में वह घर जाना चाहता है। ताकि खेताें में मजदूरी कर परिवार का पेट भर सकूं। उसने जाने के लिए रजिस्ट्रेशन करवाया था। चार दिन पहले मैसेज भी अा गया है। वह पिछले 3 दिन से यहां परिवार के साथ नंबर अाने का इंतजार कर रहा है।

गिरवी रखने के लिए कुछ भी नहीं है

मंंुगेर, बिहार के रहने वाले राकेश पासवान ने बताया कि वह बाबरपुर मंडी में 2 साल से रह रहा है। यहां फैक्ट्री में मशीन अाॅपरेटर था। लाॅकडाउन के बाद ठेकेदार ने बकाया रुपए देने से भी इनकार कर दिया। किसी तरह अब तक का समय ताे काट लिया। अब रुपए नहीं हैं। गिरवी रखने के लिए भी कुछ नहीं है। जिसे गिरवी रख परिवार काे पेट भर सकूं। ऊपर से मकान मालिक किराए के लिए दबाव बना रहा है।

लाॅकडाउन से एक दिन पहले ही अाया था पानीपत

अररिया, बिहार के रहने वाले अखिलेश ने बताया वह बेराेजगार था। पानीपत के बाबरपुर में रिश्ते का भाई रहता था। वह लाॅकडाउन से एक दिन पहले ही पानीपत अाया था। जाे रुपए घर से लेकर अाया था वह भी खत्म हाे गए। रिश्ते का भाई भी बेराेजगार हाे गया है। इसलिए वह वापस घर जाने में ही भलाई है। लॉकडाउन के बाद स्थिति सही होने के बाद आ जाएंगे। दोनों के पास पैसे खत्म हो गए हैं।