शहर में 35 उद्योग चलने से 7000 मजदूरों को मिला रोजगार, जिले में अभी 3000 छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाइयों को है 45000 श्रमिकों की जरूरत

  • ओवरब्रिज निर्माण के दो बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए भी चाहिएं श्रमिक, शहर के औद्योगिक सेक्टर में हैं करीब 350 इकाइयां

भिवानी. काेराेना महामारी के भय और अपने मूल स्थान पर रहकर परिवार के साथ महामारी का मुकाबला करने की जिद्द को लेकर प्रवासी मजदूरों का पलायन लगातार जारी है। दूसरी ओर मजदूरों का कहना है कि फैक्ट्रियों में काम शुरू नहीं हुुआ है। जो पैसे थे वह भी खत्म हो रहे हैं।

जब उन्हें काम नहीं मिल रहा है तो वे यहां रुककर भी क्या करेंगे। इससे अच्छा है कि वे अपने घर चले जाएं। इसके ठीक विपरीत फैक्ट्री मालिकों का कहना है कि काम-धंधे केवल श्रमिकों के इंतजार में बंद पड़े हैं। ऐसे में वे धर्य रखकर काम पर लौटने का मन बनाएं। फिलहाल शहर में 35 औद्योगिक इकाइयां शुरू हो चुकी हैं और इनमें 7 हजार लोगों को रोजगार भी मिल गया है। इसी प्रकार जिले में करीब 3 हजार छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाइयों को 45 हजार श्रमिकों की जरूरत है। इसके अलावा कई बड़े प्रोजेक्टों को शुरू करने के लिए श्रमिकों का इंतजार है।

जानिए…मजदूरों की कमी से शहर और जिले में औद्योगिक इकाइयों की क्या है स्थिति

भिवानी में प्लास्टिक उद्योग की 300 इकाइयां हैं और लगभग सभी बंद हैं।
अस्पताल टेबल व बेड बनाने की 150 में से 130 इकाइयों में काम शुरू नहीं हुआ है।
ऑयल मिल, आटा मिल, दाल मिल में 50 प्रतिशत कार्य हो रहा है।
क्रेशर जोन डाडम में काम शुरू हुआ है, लेकिन मजदूरों की कमी से काम 70 प्रतिशत प्रभावित है।
जिले में लगभग तीन हजार छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाइयां हैं, इनमें लगभग 45 हजार मजदूरों की जरूरत है। फिलहाल जिले में लगभग 9 हजार मजदूर हैं। इनमें से अधिकतम मजदूर क्रेशर जोन में हैंं। औद्योगिक क्षेत्र में स्थित 350 इकाइयों में 20 हजार से ज्यादा मजदूर काम करते थे, लेकिन अब केवल सात हजार मजदूर हैं।

कच्चे माल की सप्लाई शुरू होते ही मिलेगी और राहत

जिले में विभिन्न औद्योगिक सेक्टर्स में लगभग तीन हजार औद्योगिक इकाइयां हैं। इनमें से 90 प्रतिशत इकाइयों में अभी कार्य शुरू नहीं हुआ है। 10 प्रतिशत में काम शुरू हुआ है वहां भी मजदूरों की संख्या पहले से चार गुणा कम है। जिन इकाइयों में काम शुरू हुआ है वह भी कच्चे माल व तैयार माल बिक्री न होने पर सप्ताह में एक या दो दिन ही चलती हैं।

फैक्ट्री मालिक बोले- रहना और खाना होगा निशुल्क
इंडस्ट्री के मालिक व इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के प्रधान धर्मबीर नेहरा ने बताया कि भिवानी स्थित फैक्ट्रियों में तैयार माल दिल्ली, मुंबई, कोलकाता आदि भेजा जाता है और कच्चा माल दिल्ली से आता है, लेकिन दोनों ही स्थानों पर बाजार नहीं खुल रहे हैं। इससे प्लास्टिक औद्योगिक इकाइयां 90 प्रतिशत बंद है। इसके बावजूद फैक्ट्री संचालक मजदूरों को रुकने के लिए कह रहे हैं। जो मजदूर फैक्ट्रियों में चौकीदार व अन्य कार्य कर रहे हैं उन्हें खाने-रहने आदि की नि:शुल्क सुविधा दी जाएगी और वेतन भी दिया जा रहा है, वे भी अपने घर जाने की जिद्द पर हंै। बस उनका एक ही कहना है वह कोरोना महामारी में अपनी घर जाना चाहते हैं।

मजदूरों की कमी से इन प्रोजेक्ट्स की रफ्तार भी हुई प्रभावित

लॉकडाउन में मजदूरों की कमी से तोशाम बाइपास स्थित डबल रेलवे फाटक व गुजरानी मोड़ स्थित रेलवे फाटक पर निर्माणाधीन ओवरब्रिज के कार्य प्रभावित हो रहे हैं। दोनों रेलवे फाटक के दोनों तरफ सड़क के साथ सोयल टेस्टिंग का कार्य पूरा हो चुका था। 24 मार्च से इस रेलवे फाटक को भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाई जानी थी, लेकिन 24 मार्च को ही लॉकडाउन लगने के कारण निर्माण की प्रक्रिया धीमी हो गई। गुजरानी रेलवे फाटक पर ओवरब्रिज का कार्य तो आगे ही नहीं बढ़ पाया। अगर नियमित रूप से कार्य चलता तो मई के प्रथम सप्ताह में पिलर बनाने का काम शुरू हो सकता था, लेकिन अब मजदूरों की कमी से यह कार्य अगस्त व सितंबर तक पूरा होेने की उम्मीद है। दोनों ओवरब्रिज के निर्माण पर लगभग 53 करोड़ की राशि खर्च होनी है।