लॉकडाउन में 280 एफआईआर, 373 लोग गिरफ्तार, 1395 वाहन इंपाउंड

  • 6834 वाहन चालकों ने जुर्माना के रूप में जमा करवाए 56 लाख 95 हजार

करनाल. 70 प्रतिशत वाहन संचालकों के पास इंश्योरेंस नहीं है। 30 प्रतिशत के पास ड्राइविंग लाइसेंस नहीं है, जिनके पास है उनमें से 20 प्रतिशत के लॉकडाउन में अंतिम डेट निकल चुकी है। यह स्थिति लॉकडाउन में पुलिस की तरफ से की गई सख्त चेकिंग के बाद सामने आई है। 23 मार्च से 19 मई तक पुलिस की चालानिंग ब्रांच के अनुसार 6834 चालानों का भुगतान हुआ और इंपाउंड किए गए 980 वाहन छोड़े गए।
इनसे 56 लाख 95 हजार 400 रुपए जुर्माना के तौर पर जमा करवाए गए। इनमें अधिकतर उन वाहन चालकों की जेब ज्यादा हल्की हाेगी जिनके पास इंश्योरेंस और ड्राइविंग लाइसेंस नहीं है। उन्हें 2 हजार से 5 हजार रुपए अतिरिक्त जमा करवाने पड़े। यदि यह डॉक्यूमेंट्स उनके पास होते तो जुर्माना राशि माफ हो जाती। चालान कम करवाने के लिए ऐसे वाहन चालक अब सिफारिश लगवा रहे हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस तरह चालान कर पुलिस का मकसद रेवेन्यू इकट्ठा करना नहीं है, बल्कि पब्लिक की सेफ्टी के लिए सख्ताई करनी पड़ती है। इसलिए वाहन के सभी डॉक्यूमेंट्स होना बहुत जरूरी है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार लॉकडाउन में पुलिस ने 280 एफआईआर कर 373 लोगों को गिरफ्तार किया।1395 वाहनों को इंपाउंड किया है। पुलिस द्वारा चालान भुगतान का टाइम देने के बाद भी आधे से ज्यादा वाहन चालक वाहन नहीं ले जा रहे हैं, क्योंकि उनके पास चालान भुगतान करने के पैसे नहीं हैं। बगैर चालान भुगतान के उनके वाहन छूट नहीं सकते।

भुगतान नहीं करने वाले के वाहन ब्लैकलिस्ट किए जा रहे
^लॉकडाउन का उल्लंघन करने वालों पर सख्ती बरती है। 23 मार्च से 19 मई तक के इंपाउंड किए गए वाहनों में से 980 वाहन संचालक वाहन ले चुके हैं। चालानिंग ब्रांचों में सोशल डिस्टेंस का विशेष ध्यान रखा है। जो चालान का भुगतान नहीं करेगा उनके वाहन नंबर ब्लैकलिस्ट किए जा रहे हैं। इससे उन वाहनों के कोई नया डॉक्यूमेंट्स नहीं बन पाएगा।
-सुरेंद्र सिंह भौरिया, एसपी करनाल