लॉकडाउन के दौरान 98.3 प्रतिशत लोगों ने माना सोशल डिस्टेंसिंग मास्क लगाना और हाथ धोना ही कोरोना से बचने का एकमात्र उपाए

  • जीजेयू और सीआरयू जीन्द के सहायक पुस्तकालयाध्यक्ष डाॅ. नरेन्द्र चौहान और डाॅ. अनिल कुमार ने सर्वे किया

हांसी. आज भारत सहित दुनियाभर के देश कोविड-19 की मार झेल रहे हैं। लॉकडाउन के चलते कुछ जरूरी सेवाओं की बहाली के लिए पूरे देश को रेड जोन, ओरेंज जोन और ग्रीन जोन में बांटा गया है। इस महामारी में जूझते हुए देश की स्थिति का सही जायजा लेने के लिए गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के सहायक पुस्तकालयाध्यक्ष डाॅ. नरेन्द्र चौहान और चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय, जीन्द के सहायक पुस्तकालयाध्यक्ष डाॅ. अनिल कुमार ने विद्यार्थियों, शोधार्थियों, प्राध्यापकों और गैरशिक्षकों का कोविड-19 के बारे में जागरूकता और दृष्टिकोण का स्तर जानने के लिए एक अध्ययन किया। इस अध्ययन के अंतर्गत सभी से कुछ प्रश्न पूछे गए थे। जिसमें लोगों द्वारा दिए गए जवाबों से देश में हर तरह की स्थिति के बारे में अलग-अलग पहलु निकल कर सामने आए।

88.2%ने माना वे बाहर घूमते हैं तो इसके कानूनी परिणाम बारे जानते हैं

इस सर्वे के दौरान 98.8 % ने माना कि लॉकडाउन के दौरान जो सरकार निर्देश दे रही है, उनका पालन कर रहे हैं। वहीं 42.2% लोगों ने माना कि वह लॉकडाउन के दौरान घर पर ही रह रहे हैं। यह एक चौका देने वाला तथ्य है। 88.2 % लोगों ने माना कि यदि वे बाहर घूमते हैं तो वे इसके कानूनी परिणाम के बारे में जानते हैं। वहीं 97.2 % ने माना कि कोरोना एक जानलेवा बीमारी है और 87.7 % उत्तरदाताओं ने माना कि मौजूदा समय में इसका प्रभावी इलाज उपलब्ध नहीं है। वहीं 98.3 % ने माना कि लगातार हाथ धोने, मास्क लगाने, सोशल डिस्टेंसिंग ही इससे बचने का एकमात्र उपाय हैं।

87.4 फीसदी उत्तरदाताओं ने आरोग्य सेतु एप डाउनलोड किया

97.6 प्रतिशत लोगों को आरोग्य सेतु एप के बारे में जानकारी है और 87.4 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने इसको अपने मोबाइल फोन पर डाउनलोड किया हुआ है। 96.9 प्रतिशत ने माना कि वृद्ध और जो गम्भीर बीमारी से ग्रस्त लोगों को कोरोना से ज्यादा खतरा है। 96.9 प्रतिशत लोगों को यह मालूम है कि एक ग्रसित व्यक्ति कई लोगों को संक्रमित कर सकता है। 94.5 प्रतिशत लोगों ने माना कि एकांत रहना ही सबसे बड़ा बचाव का साधन है।