अस्थि विसर्जन के लिए अब जा सकते हैं गढ़गंगा-हरिद्वार सरल हरियाणा पोर्टल पर अप्लाई करते ही मिलेगी अनुमति

  • जिला प्रशासन ने करीब 30 आवेदनों को दे दी है स्वीकृति

रेवाड़ी. हिंदू धर्म में किसी की मृत्यु के बाद पवित्र नदी में अस्थि विसर्जन अंतिम संस्कार का आखिरी पड़ाव है। परंपरानुसार दिवंगत की आत्मा की शांति और मोक्ष के लिए अस्थियां प्रवाहित की
जाती हैं। मगर कोरोना वायरस इन रस्मों भी अड़चन बना हुआ था। दूसरे जिलों और राज्यों की सीमाएं सील होने के चलते प्रशासन से लोगों को अस्थि विसर्जन की भी अनुमति नहीं मिल पा रही थी। अब लॉकडाउन-4.0 में सरकार द्वारा दी जा रही रियायतों के साथ ये भी छूट मिली है।

अस्थि विसर्जन के लिए अपनी पूर्वज परंपरानुसार गंढ गंगा, हरिद्वार आदि जगहों पर जा सकते हैं। इसके लिए प्रशासन ने अनुमति देना शुरू कर दिया है। अभी तक करीब 30 आवेदनों को स्वीकार कर लिया गया है। इसके लिए आपको पोर्टल से ऑनलाइन ही आवेदन करना होगा।

अनुमति के इंतजार में अस्थियां पोटली में बंद
श्मशान घाटों के अस्थि ग्रहों में लगी खूंटियों पर पोटलियों और कई जगह लॉकर में अस्थियां रखी गई हैं। शहर की दिल्ली रोड स्थित स्वर्ग आश्रम और सेक्टर-1 स्थित स्वर्ग आश्रम में भी इसी तरह का नजारा है। दिल्ली रोड स्वर्ग आश्रम में पोटलियां लटकाई गई हैं। यहां दो सप्ताह पहले तक ही 50 से ज्यादा अस्थियां विसर्जन के इंतजार में पोटली में बंद लटकी हुई थी। अब तो इनकी संख्या और भी बढ़ी हुई थी। ये केवल एक श्मशान घाट का नहीं, बल्कि सभी की स्थिति ऐसे ही थी।

अस्थि विसर्जन की अनुमति देने शुरू कर दी हैं। अब कोई भी नागरिक आवेदन करता है तो प्रशासन उसे स्वीकृति देगा। सरल हरियाणा पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन ही आवेदन करना होगा। -संजीव कुमार, सीटीएम, रेवाड़ी।