वीडियो काॅल व वाट्सएप से हाे रहा हवन, कुंडली मिलान, नामकरण

  • लाॅकडाउन का पालन भी हाे रहा, लाेग पेटीएम, गूगल पे व अन्य ऑनलाइन माध्यम से भेज रहे दक्षिणा

अम्बाला. लॉकडाउन में लोग घरों से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। एेसे में अब वे धार्मिक अनुष्ठान करवाने के लिए हाईटेक टेक्नीक का प्रयाेग कर रहे हैं। वीडियो काॅल व वाट्सएप के जरिए कुंडली मिलान, हवन व नामकरण करवाने लगे हैं। ऑनलाइन पूजा पाठ होने पर सामाजिक दूरी बनी हुई है और लॉकडाउन का पालन भी हो रहा है।

साथ ही जहां बहुत जरूरी पूजा करवाई जा रही है वहां पंडित खुद साेशल डिस्टेंसिंग व हाइजीन का पालन कर रहे हैं। पंडित मनाेज गोस्वामी ने बताया कि मास्क पहनकर पूजा की जाती है। साेशल डिस्टेंसिंग का ख्याल रखते हुए सिर्फ घर के 2 या 3 सदस्याें काे बिठाकर पूजा-अर्चना की जाती है।

वीडियाे काॅल के जरिए पूजन

लाॅकडाउन में मंदिर बंद हैं लेकिन पूजा पाठ चल रहा है। वीडियो काॅल के जरिए जन्मदिन पूजन, गणेश पूजन अाैर शांति हवन करवाए जा रहे हैं। यहां तक कि लाेग पेटीएम, गूगल पे व अन्य ऑनलाइन माध्यम से दक्षिणा भी भेज रहे हैं। वे ऑनलाइन हवन, जन्मपत्री देखना, गृहगाेचर अादि सभी ऑनलाइन कर रहे हैं। इससे लाेग भी संतुष्ट हैं।
पंडित गोबिंद शर्मा, भविष्य दर्शन ज्योतिष केंद्र, सेक्टर-9

सेनिटाइजर करके पूजा पाठ

लाॅकडाउन के चलते वीडियो काॅल के जरिए ही हवन करवाया जाता है जिसमें विधि के अनुसार हवन हाेता है। शादी की पूजा के लिए साेशल डिस्टेंसिंग का पालन किया जाता है। मास्क पहनकर व सेनिटाइजर से जगह काे सेनिटाइज करने के बाद ही पूजा करवाते हैं।
पंडित संजीव शर्मा, अम्बाला कैंट

दूर से भी हाेता है पूजा का असर

लाेग अगर पंडित विद्वानों तक नहीं पहुंच सकते ताे काेई बात नहीं। पूजा व मंत्राें का असर दूर से भी हाे सकता है। अध्यात्म में इसका विवरण है। पहले भी दूरदराज में रहने वाले भक्तजनों के लिए पूजा करवाई जाती रही हैं। लॉकडाउन के बाद भक्तजन आग्रह ताे करते हैं कि नामकरण व अन्य अनुष्ठान के लिए पूजा करवाई जाए। अभी स्थिति काे देखते हुए अागे इस बारे में विचार कर रहे हैं कि देवी भागवत व रामायण के पाठ के लिए ऑनलाइन माध्यम का उपयोग किया जाए।
अाचार्य निशांत, अम्बाला कैंट