मेहनतकश लोगों बिन रुकेगी खेती, कंस्ट्रक्शन और इंडस्ट्री की रफ्तार

  • जिले की 6 हजार से अधिक इंडस्ट्री चाहकर भी पूरी तरह शुरू नहीं हो पाई
  • 32 हजार ईएसआई में हैं पंजीकरण, अभी तक प्रशासनिक स्तर पर भेजे जा चुके 10 हजार श्रमिक

सोनीपत. इंडस्ट्री की मशीनें, तरक्की के निर्माण की हर ईंट, खेती का उत्पादन जैसे कई कारोबार मेहनतकश के पसीने पर निर्भर हैं। लॉकडाउन का सबसे बड़ा इसी मेहनतकश ने झेला। काम मिला नहीं तो कब तक बैठकर दूसरों के भरोसे रहते। किसी ने पैदल उत्तर प्रदेश और बिहार की राह पकड़ी तो कोई पंजीकरण करवाकर घर जाने की उम्मीद में हैं। लॉकडाउन में धीरे-धीरे इंडस्ट्री, निर्माण कार्य व अन्य में छूट मिलने लगी है, लेकिन मेहनतकश के बिना इनकी रफ्तार आधी से भी कम होगी। जिले में 60 हजार से अधिक प्रवासी श्रमिक हैं। बहुत से परिवार सहित पैदल निकल गए। 48 हजार ने घर वापसी के लिए प्रशासनिक स्तर पर पंजीकरण करवाया है। इनमें से उनके गृह राज्य सरकार की अनुमति आधार पर 10 हजार के करीब को प्रशासन भेज भी चुका है।
लाॅकडाउन के कारण कई महत्वपूर्ण प्राेजेक्ट बंद हाे हैं या धीमे हैं। जिले में बड़ी, मुरथल, कुंडली, राई व अन्य एरिया में 6 हजार से अधिक इंडस्ट्री चाहकर भी पूरी तरह शुरू नहीं हो पाई हैं। निर्माण कार्यों में एनएच-334बी, एनएच-352ए राेड का निर्माण कार्य, कूड़ा प्रबंधन प्लांट, शहर में अमृत याेजना के तहत हाेने वाले सीवर पाइप और पेयजल पाइप लाइन दबाने का कार्य अधूरे हैं। मंडियों में उठान प्रभावित है। मुरथल का ढाबा कारोबार तो अभी खुल ही नहीं पाया है।
किराएदारों के खाली हुए कमरे : कुंडली में 157 कमरों के मालिक राहुल ने कहा कि उनके पास कमरे कम पड़ जाते थे। अब हालत यह है कि सभी कमरे खाली हाे गए हैं। कई किराएदार दो महीने का किराया व दुकान की उधार लेकर चले गए हैं। श्रमिकों के जल्दी लौटने की उम्मीद कम है।

एनएच-334बी :

कुल लागत 7500 कराेड़ रुपए है। इसका निर्माण कार्य अलग-अलग टुकड़ाें में शुरू किया गया था। इसे पूरा पूरा करने के लिए तीन साल का समय निर्धारित किया गया है। एनएचएआई द्वारा मिट्टी का कार्य किया जा रहा था। मंगाई गई मशीनरी राेहट अाैर खरखाैदा बाईपास पर खड़ी है। कुछ काम शुरू हुआ है पर श्रमिकों का अभाव है
एनएच-352 ए : करीब 1800 कराेड़ रुपए राशि खर्च होगी। इस समय लेबर नहीं हाेने के कारण काम बंद हैं। प्राेजेक्टर मैनेजर आनंद दहिया ने कहा कि निर्माण कार्य शुरू हुए हैं, लेकिन लेबर का संकट खड़ा हाे गया है।
सॉलिड वेस्ट प्लांट : 180 करोड़ रुपए लागत से सोनीपत, गन्नौर, समालखा व पानीपत के लिए सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट का कार्य 60 प्रतिशत पूरा हुआ है। अब लेबर 20 प्रतिशत बची है तो काम भी धीमा हो गया है।

खेती और मंडी में प्रभाव : जिले में गेहूं के लिए 44 खरीद केंद्र बनाए गए। खरीद केंद्रों में 3,44,992 एमटी गेहूं की खरीद हो चुकी है। इसमें 80 हजार एमटी गेहूं का उठान अभी नहीं हो पाया है। लेबर की कमी से मंडियों में ही बोरियां खुले में लगानी पड़ रही हैं। सब्जी उत्पादक किसान तो परेशान हैं ही अब धान सीजन में भी किसानों को दिक्कत आएगी। जिले में करीब 97 हजार हेक्टेयर में धान लगाई जानी है।

राई | राई, कुंडली व मुरथल में केवल 40 प्रतिशत लेबर बची है। कुंडली इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के प्रधान सुभाष गुप्ता का कहना है कि कुंडली औद्योगिक क्षेत्र में 18 सौ से ज्यादा फैक्ट्री हैं। यहां की 60 प्रतिशत लेबर अपने घर जा चुकी है। राई स्मॉ स्केल एसोसिएशन के प्रधान महेंद्र गोयल, मुरथल एसोसिएशन से हरीश अग्रवाल ने कहा कि श्रमिक अपने घर जा चुके हैं। जिन श्रमिकों का वेतन उनके खाते में भेजा गया था, वे भी अपने परिवार के साथ यहां से पलायन कर चुके हैं। राई इंडस्ट्रीज एसोसिएशन प्रधान राकेश देवघन ने कहा कि 80 प्रतिशत इंडस्ट्री मालिक दिल्ली से आते हैं। उन्हें रेगुलर आने के पास नहीं मिलने की दिक्कत है।

प्रवासी श्रमिक एक नजर

60 हजार से अधिक प्रवासी श्रमिक है जिले में
48 हजार ने करवाया है घर वापसी के लिए पंजीकरण
10 हजार के करीब श्रमिकों को बसों व ट्रेन से भेजा जा चुका
424 प्रवासी श्रमिक हैं गोहाना व गन्नौर व खरखौदा के शेल्टर होम में
32 हजार इंडस्ट्रीज श्रमिकों का श्रम विभाग में है रजिस्ट्रेशन