नेपाल के PM ने फिर की भारत विरोधी बात, नया नक्‍शा जारी कर लिपुलेख-कालापानी को अपने क्षेत्र में दिखाया

नेपाल के कैबिनेट ने भारत के साथ सीमा विवाद के बीच एक नया राजनीतिक मानचित्र स्वीकार किया है जिसमें लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा को नेपाली क्षेत्र में दर्शाया गया है, जो सरासर अनुचित है. नेपाल की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के सांसदों ने कालापानी, लिम्पियाधुरा और लिपुलेख को नेपाल की सीमा में लौटाने की मांग करते हुए संसद में विशेष प्रस्ताव भी रखा था. नेपाल मंत्रीपरिषद में 17 मई 2020 को ही नए राजनीतिक नक्शे को प्रस्तुत किया गया. पूरे दिन चले मंथन और विदेश मामलों के जानकारों से मंत्रणा के बाद 18 मई 2020 को मंत्रीपरिषद ने सर्वसम्मति से नए नक्शे पर मुहर लगा दी. इसमें लिपुलेख के साथ ही कालापानी की अंतरराष्ट्रीय सीमा तय कर सामरिक महत्व के दोनों ही क्षेत्रों को अपना बताया. नेपाल के वित्त मंत्री एवं सरकार के प्रवक्ता युवराज खाटीवाड़ा ने 18 मई 2020 को कहा कि प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल ने देश के नये राजनीतिक मानचित्र को स्वीकृत किया है. नेपाल के विदेश मंत्री प्रदीप कुमार गयावली ने इस कदम की घोषणा से हफ्तों पहले कहा था कि कूटनीतिक पहलों के जरिए भारत के साथ सीमा विवाद को सुलझाने के प्रयास जारी हैं. नेपाल द्वारा जारी नए नक्शे में नेपाल के उत्तरी, दक्षिणी, पूर्वी और पश्चिमी अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को दिखाया गया है. इन सीमाओं से सटे इलाकों की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्थाओं के बारे में भी बताया गया है.

कालापानी विवाद क्या है?
कालापानी लगभग 35 वर्ग किलोमीटर का इलाका है और पिथौरागढ़ जिले का हिस्सा है. उधर, नेपाल सरकार का दावा है कि यह इलाका उसके दारचुला जिले में आता है. साल 1962 में भारत-चीन के बीच युद्ध के बाद से इस इलाके पर भारत के आइटीबीपी के जवानों का कब्जा है. भारत-चीन-नेपाल के त्रिकोणीय सीमा पर स्थित कालापानी इलाका सामरिक रूप से अहम है. कालापानी में लिपुलेख पास से भारत चीन के ऊपर नजर रख सकता है। नेपाल सरकार का दावा है कि साल 1816 में उसके और तत्कालीन ईस्ट इंडिया कंपनी के बीच हुई सुगौली संधि के अनुसार कालापानी उसका इलाका है.

नेपाली प्रधानमन्त्री का भारत पर व्यंग्यबाण
नेपाल के प्रधानमन्त्री केपी ओली भारत विरोध के लिये नहीं जाने जाते हैं. लेकिन भारत के साथ विवाद की नई भाषा बोलने वाले केपी ओली को अब जहरीले ड्रैगन का साथ मिल गया है इसलिये ये छोटा सा देश भारत के उपकार भूल गया है. नया मानचित्र जारी करके मन नहीं भरा तो केपी ओली ने भारत की शक्ति पर व्यंग्य बाण चला दिया और पूछा है कि पूछा है कि  भारत के अशोक चक्र में सत्यमेजयते लिखा है अथवा सिंहमेव जयते. यहां किये गये व्यंग्य से उसका तात्पर्य ये है कि क्या भारत अपनी ताकत का इस्तेमाल करके नेपाल से जमीन छीनना चाहता है. नेपाली भाषा में दिए गए अपने एक बयान में ओली ने यह भी कहा कि भारत से जो लोग नेपाल लौटे हैं, उनमें कोरोना के गंभीर संक्रमण मिले हैं, जबकि इटली और चीन से लौटे नागरिकों में कोरोना के अपेक्षाकृत हल्के लक्षण पाए गए हैं. केपी शर्मा ओली के इस बयान पर फिलहाल भारत सरकार की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है.
वहीं भारतीय सेना के प्रमुख एम एम नारावणे ने पिछले हफ्ते एक बयान में कहा था कि उत्तराखंड के धारचूला से लिपुलेख पास को जोड़ने वाले रास्ते पर नेपाल ने चीन के कहने पर विरोध जताया था। मंगलवार को चीन ने कहा था कि कालापानी का विवाद चीन और नेपाल का अपना विवाद है।

फिर कहा भारत से दोस्ती गहरी करनी है
नेपाली प्रधानमंत्री ने व्यंग्य करने के बाद ये बयान भी जारी किया कि नेपाल भारत के साथ सीमा विवाद के मुद्दे सुलझाना चाहता है ताकि ऐतिहासिक गलतफहमियों को खत्म किया जा सके और  भारत के साथ दोस्ती गहरी की जा सके. नेपाल इस मुद्दे पर चीन के साथ भी बातचीत कर रहा है और भारत के लिये संकेत दे रहा है कि नेपाल को डराया नहीं जा सकता, उसके साथ चीन खड़ा है.