राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल जैसे राज्यों के औद्योगिक क्षेत्रों में 50 फीसदी तक उत्पादन शुरू

  • लॉकडाउन 4.0 में नियमों के पालन में मिली छूट के साथ देश के कई राज्यों में आर्थिक गतिविधियां शुरू
  • ट्रांसपोर्टेशन की दिक्कतों और प्लांट्स में श्रमिकों की कमी से कंपनियों की उत्पादन लागत बढ़ी
  • कई उद्योग इकाइयों के लिए कच्चे माल की सप्लाई चेन अब भी एक बड़ी समस्या

पानीपत. देशभर में जारी लॉकडाउन-3 की अवधि रविवार 17 को पूरी हो गई। अब केंद्र सरकार ने लॉकडाउन-4 में लॉकडाउन के नियमों में ढील के साथ औद्योगिक गतिविधियां शुरू करने की अनुमति दी है। हालांकि कहां-कितनी सख्ती लागू रहेगी यह संबंधित राज्य की सरकारों पर निर्भर करेगा। राजस्थान की बात करें तो प्रदेश की लगभग तीन लाख छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाइयों में से करीब 40 फीसदी में उत्पादन शुरू हो गया है। सीतापुरा सेज में भी अधिकांश आभूषण इकाइयों में पेडिंग ऑर्डर को पूरा करने के लिए आभूषणों का निर्माण किया जा रहा है। लेकिन औद्योगिक इकाइयों के पास अभी 30-40% ही श्रमिक मौजूद हैं। मांग कमजोर होने से 50% उत्पादन क्षमता का भी उपयोग नहीं हो पा रहा है।
राजस्थान स्टील चैंबर के अध्यक्ष मंगला इस्पात के सीएमडी सीताराम अग्रवाल का कहना है कि 15 दिन पहले जब उन्होंने अपने प्लांट को खोला था, उस समय उनके पास 20 फीसदी ही लेबर थी। लेकिन 10% लेबर और लौट आई है। वहीं, अन्य उद्यमियों का कहना है कि ट्रांसपोर्टेशन अभी बड़ी समस्या है। कच्चे माल के लिए भाड़ा 25% तक ज्यादा देना पड़ रहा है। इससे उत्पादन लागत भी तीन फीसदी तक बढ़ गई है।
औद्याेगिक इकाइयों को कई रियायतें दी गई हैं
सरकार ने राजस्थान में औद्योगिक इकाइयों को अनेक रियायतें देते हुए औद्योगिक गतिविधियों को पटरी पर लाने की पहल की है। अब कंपनियों और उद्योगों का भी दायित्व हो जाता है कि बिना किसी भय-शंका के औद्योगिक गतिविधियां शुरू करें। औद्योगिक क्षेत्रों को खोलने, इकाइयों के संचालन के लिए अनुमति की जरूरत नहीं है। -परसादी लाल मीणा, उद्योग मंत्री, राजस्थान
चुनौती और अवसर: अनस्किल्ड वर्कर्स को स्किल्ड बनाकर उत्पादन में तेजी ला सकती हैं कंपनियां
पंजाब : साइकिल उद्योग में काम शुरू, फार्मा में परेशानी
लुधियाना के हौजरी और साइकिल इंडस्ट्री में 50% से अधिक यूनिट्स ने काम करना शुरू कर दिया है। हालांकि कच्चे माल की सप्लाई चेन और लेबर की कमी अभी भी एक समस्या बनी हुई है। हिमाचल प्रदेश के उद्योग क्षेत्र बद्दी-नालागढ़ स्थित फार्मा कंपनियों में उत्पादन कम होता जा रहा है। हिमाचल ड्रग मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट डॉ.राजेश गुप्ता ने बताया, फार्मा इंडस्ट्री कच्चे माल में 50-100% तक के आए उछाल से अधिक परेशान है। चीन से आने वाले एपीआई यानि दवा बनाने के लिए मूल कंटेंट की भी सप्लाई कम है, जिससे उनके भाव बढ़ रहे हैं। डॉक्टरों ने ओपीडी शुरू नहीं की है। इससे बिक्री प्रभावित हुई है।
हरियाणा : ऑटो कंपनियों ने अपने प्लांट्स में उत्पादन शुरू किया
हरियाणा के मानेसर एरिया में मारुति से लेकर हीरो ग्रुप ने उत्पादन शुरू कर दिया है। दोपहिया वाह निर्माता सुजुकी मोटरसाइकिल इंडिया प्रा. लि. ने गुरुग्राम स्थित खेड़की दौला में अपने उत्पादन संयंत्र को दोबारा शुरू कर दिया है। कंपनियों में कर्मचारियों की सुरक्षा कापूरा ध्यान रखा जा रहा है।
वहीं मुरथल के आसपास चावल यूनिट्स ने भी काम करना शुरू कर दिया है। उनके विदेश के ग्राहक कुछ प्रभावित हुए हैं और उनको फिर से ऑर्डर मिल रहे हैं। पानीपत के हैंडलूम यूनिट्स ने भी कामकाज शुरू कर दिया है। हालांकि उनके पास ऑर्डर अधिक मात्रा में नहीं आ रहे हैं। हरियाणा में विभिन्न उद्योगों में उत्पादन शुरू होता जा रहा है।
महाराष्ट्र : उद्योगों में 23% वर्कर काम पर पहुंचने लगे
महाराष्ट्र में छोटे-बड़े 6.83 लाख उद्योग इकाइयां हैं। इनमें से 38,363 उद्योगों ने 8,23,668 वर्कर्स के साथ काम शुरू करने के लिए महाराष्ट्र सरकार से इजाजत मांगी थी। इनमें से 23% यानी 1,91,336 वर्कर्स ने अपनी हाजिरी दर्ज कराई है। ऐसे में 6,32,332 वर्कर्स काम पर नहीं पहुंचे हैं। महाराष्ट्र के उद्योग मंत्री सुभाष देसाई के मुताबिक ज्यादातर श्रमिक अपने निवास स्थान को लौट गए हैं। इनमें स्किल्ड और सेमी-स्किल्ड दोनों प्रकार वर्कर शामिल हैं। अब उद्योगों की जिम्मेदारी है कि वे अनस्किल्ड को स्किल्ड बनाकर उत्पादन पूरी रफ्तार पर शुरू करें। उन्होंने बताया कि उद्योगों की मदद के लिए सरकार जरूरी सहूलियतें मुहैया करा रही है।
झारखंड : उद्योगों में 33% को काम पर बुलाया जा रहा
पूरे झारखंड में करीब 44 हजार एमएसएमई हैं। इनमें 11 लाख मजदूर काम करते हैं। अभी इनमें से करीब 30% से ही काम लिया जा रहा है। इन्हें मार्केट खुलने का इंतजार है। इसके बाद इनके द्वारा बनाए समानों की डिमांड होगी। मजदूर भी 50% कम है। जमशेदपुर स्थित टाटा स्टील में 90 हजार कामगार हैं। इनमें 27 हजार को काम पर बुलाया जा रहा है। टाटा मोटर्स के प्लांट में करीब 27,000 कर्मी हैं। इनमें से 33% को बुलाया जा रहा है। झारखंड के बोकारो स्थित सेल की स्टील मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में कुल 21 हजार कर्मचारी हैं। इनमें 10, हजार ठेका कर्मी हैं। इनमें से अभी केवल 7,000 को काम पर बुलाया जा रहा है।
छत्तीसगढ़ : लगभग 600 फैक्ट्रियों में से 80 फीसदी में उत्पादन शुरू
छत्तीसगढ़ की रीढ़ माने जाने वाले स्टील उद्योग व लघु व कुटीर उद्योग सहित अन्य औद्योगिक यूनिट्स में काम शुरू हो गया है। उरला इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष अश्विन गर्ग के अनुसार छत्तीसगढ़ में लगभग 600 स्पंज आयरन, फर्नेंस और रोलिंग मिल की हैं। इसमें लगभग 80% उद्योगों में मैन्युफैक्चरिंग शुरू हो गई है। बाकी बची 20% उद्योग इकाइयों में भी धीरे धीरे एक-दो दिन में काम शुरू हो जाएगा। हालांकि डिमांड कम होने से फिलहाल उत्पादन क्षमता 50% तक ही पहुंच पाई है। ज्यादातर फैक्टरियां उत्पादन और अपनी जरूरत के मुताबिक 50% से 60% वर्कर्स को काम पर बुला रही हैं।
मध्यप्रदेश : भोपाल के गोविंदपुरा क्षेत्र में काम की अनुमति
भोपाल के गोविंदपुरा इंडस्ट्रियल एरिया में स्थित 1100 छोटे-मझोले उद्योगों को जिला प्रशासन ने कारोबार शुरू करने की अनुमति दे दी है। अब यहां के किसी उद्योग को अलग से अनुमति लेने की जरूरत नहीं होगी। हालांकि वे जिला प्रशासन द्वारा तय किए गए छह जोन से बाहर किसी मजदूर को नहीं बुला सकेंगे। गोविंदपुरा इंडस्ट्रियल एरिया (जीआईएस) के अध्यक्ष अमरजीत सिंह ने बताया कि सभी उद्योगों ने इसके लिए जरूरी तैयारियां पूर्ण कर ली हैं। उधर, मंडीदीप इंडस्ट्रियल एरिया में अधिकांश बड़े उद्योगों को पहले ही अनुमति दी जा चुकी थी। अब वे भी उत्पादन शुरू करने की स्थिति में आ गए हैं।