पहले अम्बाला से भेजे 540 श्रमिक यूपी ने नहीं लिए, अब रोहतक से हरियाणा रोडवेज में गए 600 प्रवासियों को सहारनपुर से वापस भेजा

  • पंजाब श्रमिकों को संभाल नहीं रहा, यूपी ले नहीं रहा, बीच में फंसा हरियाणा और मझदार में मजदूर
  • शंभू बॉर्डर से पैदल 70 किलोमीटर दूर यमुनानगर पहुंचे, 52 सीटर बस में 82 को ठूंस कर यहीं छोड़ गई पुलिस

पानीपत. पंजाब व हिमाचल के औद्योगिक क्षेत्र में प्रवासी श्रमिकों को सहारा न मिल पाने के कारण अम्बाला में हालात बेकाबू होते जा रहे हैं। जिले की सड़कों पर कई हजार श्रमिक बदहवास घूम रहे हैं। प्रशासन के बनाए अस्थाई शेल्टर होम में भी क्षमता से दोगुने-तिगुने ज्यादा प्रवासी भर दिए गए हैं, जिनकी एक ही जिद है-घर जाना है। इन हालातों में यूपी प्रशासन ने परेशानी और बढ़ा दी है। एक दिन पहले अम्बाला प्रशासन ने ऑनलाइन पंजीकृत हुए 540 श्रमिकों को 18 बसों में यूपी के लिए भेजा था, लेकिन यूपी प्रशासन ने बॉर्डर से ही लौटा दिया।
रोहतक से 20 बसों में रविवार देर शाम करीब 600 प्रवासियों को बिठाकर यूपी के सहारनपुर के लिए भेजा गया। वहां पहुंचने पर परिचालकों ने स्थानीय प्रशासन से रिसीविंग देने को कहा। आरोप है कि अधिकारियों ने रिसीविंग देने से मना कर दिया। एक घंटे से ज्यादा समय तक चली जद्दोजहद के बाद भी जब प्रशासनिक अधिकारियों ने प्रवासी श्रमिकों की सुपुर्दगी लेने से मना कर दिया तो निराश होकर चालक और परिचालक सभी 20 बसों को बैरंग वापस लेकर रात 3 बजे वापस आ गए। हरियाणा ने अब पंजाब के कच्चे रास्ते भी सील कर दिए हैं। श्रमिक अब पंजाब, हरियाणा और यूपी पुलिस के बीच फुटबॉल बन रहे हैं। इधर, विज ने कहा कि हरियाणा में अब प्रवासी श्रमिकों पर खाकी का डंडा कहर नहीं बरपाएगा। डीजीपी को निर्देश दिए हैं कि किसी भी जिले में प्रवासी श्रमिकों पर बल का प्रयोग नहीं किया जाए।
पंजाब के सभी कच्चे रास्ते किए सील : विज
गृह मंत्री अनिल विज का कहना है कि पंजाब से अब कच्चे रास्तों से श्रमिक आ रहे थे, इसलिए इन रास्तों को भी सील किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रवासियों को रोकने का दायित्व पंजाब का है, लेकिन हमने सारे कच्चे पक्के रास्तों को सिल कर दिया है। विज ने कहा कि श्रमिकों के रिसीविंग प्रदेश एनमओसी देते हैं तो हरियाणा महज चार दिनों में सभी श्रमिकों को उनके प्रदेशों में भेज देंगे। समस्या यही आ रही है कि दूसरे प्रदेश श्रमिकों को लेने को ही तैयार नहीं हैं। ऐसे में श्रमिकों को जब वापस लाया जाता है तो उनका धैर्य भी जवाब दे जाता है।
रैपिड टेस्ट किट को लेकर करेंगे बातचीत
प्रदेश में रैपिड टेस्ट किट को लेकर साउथ कोरियाई कंपनी से बातचीत की जाएगी, क्योंकि उसका परिणाम संतोषजन नहीं आया है। स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना पॉजिटिव मरीजों पर उसका परीक्षण किया था। विभाग 50 हजार किट खरीद भी चुका है। विज का कहना है किट की भी खराबी हो सकती है और टेस्ट करने के तरीके में भी अंतर हो सकता है। इसके लिए कंपनी से बातचीत की कोशिश कर रहें हैं कि आखिर कमी कहां रही। इसे दूर किया जाएगा। यदि रैपिड टेस्ट किट सही रिजल्ट दें तो टेस्टों की संख्या और अधिक बढ़ाई जा सकती है।
हरियाणा ने पड़ोसी राज्यों से मांगी बसें चलाने की स्वीकृति
केंद्र सरकार की ओर से इंटर-स्टेट बसों को चलाने की अनुमति दिए जाने के बाद हरियाणा ने दूसरे राज्यों से कुछ रूटों पर बसें चलाने की अनुमति मांगी है। यदि अनुमति मिल जाती है तो जल्द ही दूसरे राज्यों तक हरियाणा रोडवेज की बसें दौड़ेंगी। परिवहन विभाग की ओर से दूसरे राज्यों के परिवहन विभाग को पत्र लिखकर उनकी सहमति के लिए कहा है। राजस्थान के लिए गुड़गांव से जयपुर, हिसार से अजमेर के लिए स्वीकृति मांगी है। पंजाब राज्य के लिए करनाल से अमृतसर, हिमाचल प्रदेश के लिए अंबाला-पंचकूला-शिमला, उत्तराखंड राज्य के अंबाला-यमुनानगर-देहरादून, केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के लिए गुड़गांव से चंडीगढ़, दिल्ली के लिए पंचकूला से दिल्ली और मध्य प्रदेश राज्य के लिए ग्वालियर तक के लिए परमिशन मांगी गई है।
रोडवेज कर्मचारी बोले- यूपी से बात करे हरियाणा सरकार
सोमवार को यूपी के बार्डर पर हरियाणा रोडवेज कर्मचारियों ने यूपी के अधिकारियों के उदासीन रवैये को लेकर नारेबाजी कर रोष व्यक्त किया। ऑल हरियाणा रोडवेज वर्कर्स यूनियन के राज्य प्रधान हरिनारायण शर्मा व महासचिव बलवान सिंह दोदवा ने कहा कि हरियाणा रोडवेज की बसें 15 मई से लगातार प्रवासी मजदूरों को उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड व अन्य प्रदेशों में छोड़ने के लिए कार्य कर रही हैं। सरकारों में सही तालमेल न होने की वजह से चालक व परिचालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।