पंचकुला के अलावा किसी जिले के लिए शेड्यूल नहीं होने से यात्रियों का रहा टोटा, 25 सवारी नहीं होने पर थमी रहीं बसें

  • 58 यात्रियों को ले पंचकुला गईं दो बसें, बाकी जिलों में जाने के लिए भटकते रहे यात्री, कोरम पूरा नहीं हुआ

रोहतक. लाॅकडाउन 4.0 में नियमों में ढील मिलने के बाद प्रदेश के विभिन्न जिलों के लिए राेडवेज बसों का संचालन पूरी तरह से पटरी पर नहीं आ पाया। इसकी वजह हर रूट पर नियम के तहत 25 यात्रियाें का कोरम पूरा न हाेना रहा। दूसरे जिले के लिए बसों का टाइम शेड्यूल बना नहीं होने से भी यह दिक्कत रही। यदि हर जिले में जाने का टाइम शेड्यूल बना दिया जाए तो यात्री संख्या बढ़ सकती है। हालांकि पंचकुला के लिए सीधे ऑनलाइन 60 के करीब यात्रियों ने ऑनलाइन टिकट की बुकिंग कराई। मंगलवार को सुबह 11 बजे पहली बस 28 यात्री और दोपहर में साढ़े 12 बजे दूसरी बस 30 यात्रियों को लेकर पंचकुला के लिए रवाना हुई। दूसरी ओर बस स्टैंड पर एक बार हड़कंप की स्थिति भी बनी। बुकिंग कराए यात्रियों में तीन लोगों की थर्मल स्क्रीनिंग के दौरान तापमान अधिक मिला। इन यात्रियों को कोरोना संदिग्ध जान रोडवेज स्टाफ मेंबर्स में हड़कंप मच गया। फौरन उन्हें अलग दूर-दूर बिठाकर ठंडा पानी पिलाया गया और उनका बाडी टेम्प्रेचर सामान्य होने पर ही उन्हें बस में बिठाकर रवाना किया गया।
दरअसल न्यू बस स्टैंड प्रशासन ने प्लान किया था कि जिस रूट पर 25 यात्री टिकट बुकिंग केंद्रों से खरीदेंगे, उस जिले के लिए बस संचालन शुरू कर दिया जाएगा। बस स्टैंड पर सुबह से लेकर शाम तक हिसार, झज्जर, पानीपत, जयपुर और सिरसा जिले को जाने के लिए यात्री बस परिवहन की सुविधा पाने के लिए पहुंचते रहे लेकिन किसी भी जिले के लिए सीधे 25 सवारियां न मिलने पर बस का संचालन नहीं किया गया। लिहाजा लोगों को बस परिवहन सुविधा से वंचित होना पड़ा और वे मायूस होकर वापस लौट गए। रोडवेज जीएम बृजेंद्र हुड्‌डा ने दावा किया कि जनता को गाइडलाइंस के अनुसार बस परिवहन सुविधा दी जाएगी। लेकिन एक जिले में जाने के लिए 25 यात्रियों का हाेना अनिवार्य है। यात्री बस स्टैंड के बुकिंग केंद्र से टिकट ले सकते हैं।

लॉकडाउन में फंसा था, ढील मिलने के बाद भी बस परिवहन सुविधा नहीं मिली
^जयपुर निवासी अक्षत सीए स्टूडेंट हैं। वो मार्च माह में मालगोदाम रोड स्थित रिश्तेदारी में आए हुए थे। लॉकडाउन लागू होने के बाद वो यहीं फंस गए। मंगलवार सुबह उन्हें बस संचालन का पता चला तो वे जयपुर जाने के लिए बस पकड़ने डिपो में पहुंचे। लेकिन वहां कर्मचारियों ने बस संचालित न होने की बात कहक लौटा दिया। यह सुनकर उन्हें काफी निराशा हुई है।

नेत्रहीन कर्मचारी को दूसरे का सहारा लेकर घर तक का रास्ता नापना पड़ा
^शहर के माता दरवाजा निवासी नेत्रहीन रोडवेज कर्मचारी मदनलाल ने बताया कि वो आज ड्यूटी करने के लिए पहुंचा। लॉकडाउन लागू होने से पहले बस संचालन होने पर वो बस से आना जाना कर लेता था। मंगलवार से बस संचालन शुरू होने की उम्मीद थी लेकिन बस संचालन नहीं हुआ और उसे दूसरे का सहारा लेकर घर पहुंचना पड़ेगा। दो माह से दिल्ली में फंसा था, हिसार जाने के लिए बस न मिलने पर भटकता रहा

दो माह से दिल्ली में फंसा था, हिसार जाने के लिए बस न मिलने पर भटकता रहा

^हिसार जिला निवासी रवींद्र ने बताया कि वो दिल्ली के बवाना में एक निजी फैक्ट्री में कर्मचारी है। लॉकडाउन लागू होने के बाद करीब दो माह से वो दिल्ली में ही फंसा रहा। मंगलवार सुबह वो किसी तरह रोहतक न्यू बस स्टैंड तक पहुंच गया। हिसार जाने के लिए बस का पता किया तो कर्मचारियों से जवाब मिला कि बस नहीं जाएगी। निराश होकर साधन की तलाश में भटकता रहा।

चालक-परिचालक क्वॉरेंटाइन करने से डिपो में हो रही कर्मचारियों की कमी

न्यू बस स्टैंड डिपो प्रशासन के अधिकारी ने बताया कि काेराेना संक्रमण से बचाव के लिए करीब दाे माह के लाॅक डाउन पीरियड में राेडवेज के चालक और परिचालकाें ने जिला प्रशासन की डिमांड के अनुसार बसें लेकर रूट पर गए। 29 मार्च को 76 बसें गाजियाबाद तक गईं थीं। इसके बाद भी बागपत, शामली, सहारनपुर, मथुरा बुलंदशहर जिले में प्रवासियों को छोड़ने के लिए चालक और परिचालक बसें लेकर गए। उन्होंने बताया कि डिपो में 298 चालक और 323 परिचालक पदस्थ हैं। रूट पर से लौटने के बाद चालक और परिचालक की सिविल अस्पताल में जांच कराकर उन्हें घर पर ही 14 दिन क्वॉरेंटाइन में भेज दिया जाता है। ऐसे में चालक और परिचालकों की कमी बढ़ रही है जिससे बस संचालन व्यवस्था बहाल कराने में अब परेशानी आने नहीं लगा है।