झारखंड-गुवहाटी के लिए अभी तक नहीं शुरू हुई ट्रेन व बस सेवा, शेल्टर होम में समय काट रहे प्रवासी मजदूर

  • पैदल और साइकिल पर हिसार से निकले मजदूरों को दिल्ली बाॅर्डर से लौटाकर दयानंद मठ व शिव धर्मशाला पहुंचाया

रोहतक. कोरोना वायरस को लेकर जारी लॉकडाउन के बीच हरियाणा के विभिन्न जिलों से प्रवासी मजदूरों को उनके गांव भेजने का सिलसिला जारी है। लेकिन अभी तक झारखंड और गुवहाटी के लिए एक भी ट्रेन व बस सेवा शुरू नहीं हुई। इसके चलते प्रशासन की ओर से बनाए गए शेल्टर होम में यहां निवासी मजदूर इंतजार में समय काट रहे हैं। हर आने जाने वालों से अपना रजिस्ट्रेशन रसीद दिखाकर जाने की तारीख पूछते हैं। इधर गांधी कैंप व हिसार रोड सहिब आउटर कॉलोनी में बहुत से ऐसे मजदूर परिवार भी हैं जो काम धंधा बंद हाेने से मुश्किल झेल रहे हैं। आमदनी ठप होने से उनके लिए भोजन व अन्य जरूरी चीजें जुटाना चुनौती बना हुआ है।
गोहाना रोड स्थित पंजाबी शिव धर्मशाला में वर्तमान में 37 प्रवासी मजदूर हैं। इसमें कुंदन, मुन्ना, रमेश, रोशन आदि 6 मजदूर झारखंड के हैं। जो डेढ़ महीने से अपने गांव जाने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। लेकिन अभी तक उनको भेजने का प्रशासन की ओर से कोई प्रबंध नहीं किया गया। दयानंद मठ में सोमवार को 125 प्रवासी मजदूर शेल्टर होम में ठहराए गए हैं। गुवहाटी के नूर हुसैन, मोनवा, आखिर, जुल्फी आदि 15 प्रवासी मजदूर हिसार से पैदल ही अपने गांव जा रहे थे। लेकिन गत रविवार को उन्हें पुलिस नाके पर पुलिस ने पूछताछ के लिए रोक लिया। इसके बाद उनको दयानंद मठ शेल्टर होम में भेजा गया है।
बाॅर्डर से लौटाए गए
श्रमिक भटक रहे : जिला प्रशासन की ओर से यूपी के सहारनपुर भेजे गए प्रवासी श्रमिकों को यमुना नगर बार्डर से लौटा दिया गया था। इनमें शामिल 32 मजदूर सोमवार की शाम को शौरी मार्केट में भटकते मिले। विजय, मोहित, श्रवण, कृष्ण कुमार, देवी प्रसाद, महेश आदि मजदूरों ने बताया कि रविवार की रात उनको रोडवेज लेकर रोहतक आई। लेकिन सोमवार को उनको दोबारा भेजे गए मजदूरों के साथ सहारनपुर नहीं भेजा गया।
11 साइकिल पर 12 मजदूर हिसार से निकले, दिल्ली बाॅर्डर से लौटाए
बिहार निवासी 12 प्रवासी श्रमिकों ने 40 हजार रुपए जुटाकर 11 साइकिल खरीदी और गांव के लिए चल पड़े। लेकिन बाया रोहतक होते हुए जाते समय दिल्ली बार्डर से उनको लौटाकर रोहतक के शेल्टर होम में छोड़ दिया गया। श्रमिक बिजेंद्र सिंह ने बताया कि रजिस्ट्रेशन करवाने के बाद भी जब उनको जाने का मौका नहीं मिला तो उन्होंने साइकिल से ही बिहार जाने का प्लान बनाया। फिर भी उनको पुलिस ने रोक लिया।
कोख में पल रहे बच्चे की हिफाजत में दो मांओं की उड़ी नींद : कोरोना महामारी के संक्रमण काल में प्रवासी मजदूरों का पलायन जारी है। श्रमिक पैदल, साइकिल, बाइक, जुगाड़ गाड़ी, ट्रेन और बसों से जाने की हर पल कोशिश में हैं। अफरा-तफरी के इस माहौल ने कोख में पल रहे बच्चे की हिफाजत में गांधी कैंप में रह रही दो मांओं की नींद उड़ा दी है। क्योंकि भीड़ के बीच सफर करना उनके लिए जोखिम भरा है। इसमें एक परिवार में डिलवरी डेट 20 दिन के अंदर की है। गांधी कैंप में किराए के मकान में उत्तर प्रदेश के खानपुर पीरली उन्नाव जिला निवासी सुनील कुमार, अमर सिंह व राजेश का परिवार रहता है। इसमें रीता देवी पत्नी सुनील कुमार और राम सहेली पत्नी राजेश गर्भवती हैं। गत रविवार को जाट कॉलेज के सामने से रोडवेज बस यूपी जाने की अफवाह तीनों परिवार दिनभर दिल्ली रोड स्थित और छोटूराम स्टेडियम का चक्कर लगाते रहे। लेकिन उनको बस नहीं मिली। इससे निराश होकर उनको कमरे पर लौटना पड़ा। दोनों की सेहत अच्छी नहीं है। सुनील कुमार व राजेश ने बताया कि कमजोर होने से भीड़ के बीच गर्मी के मौसम में बस का सफर इन महिलाओं के लिए जोखिम भरा है। ऐसे में वे किराए की गाड़ी से उन्नाव जाने के लिए ट्रैवलिंग पास बनवाने की कोशिश में हैं। ताकि घर तक का का सफर सुरक्षित पूरा हो सके।