छेड़छाड़, जानलेवा हमले और थाने में तोड़-फोड़ के आरोप से मुक्त हुए पार्षद प्रिंस बहाल

अम्बाला. नगर पालिका के वार्ड-10 के पार्षद परमजीत सिंह प्रिंस को शहरी स्थानीय निकाय निदेशालय ने बहाल कर दिया है। छेड़छाड़, जानलेवा हमला करने और सरकारी काम में बाधा डालने समेत कई धाराओं में नामजद होने के बाद प्रिंस गिरफ्तार हुए थे। इसी आधार पर अक्टूबर 2018 में सस्पेंड कर दिया गया था। एक महीना पहले ही कोर्ट ने उन्हें आरोपों से मुक्त कर दिया, जिसके बाद बहाली हुई।
मंगलवार को पार्षद बहाली की चिट्ठी पहुंची तो पूर्व विधायक राजबीर सिंह बराड़ा व अन्य पार्षद उनका मुंह मीठा कराने पहुंचे। विवाद 2018 में जन्माष्टमी मेले में हुआ था। मेले में पार्षद प्रिंस बाइक पर सवार होकर बाजार में आए तो एक पक्ष ने आरोप लगाया था कि लड़की के साथ छेड़छाड़ की है। जब उसका विरोध किया तो प्रिंस ने उनको जान से मारने की धमकी दी थी। सूचना मिलते ही बराड़ा ने मौके पर पहुंच प्रिंस को हिरासत में लिया था। जिसके बाद आरोप था कि प्रिंस ने थाने में तोड़ फोड़ की है। इसी विवाद में थाना प्रभारी सस्पेंड हुआ था।
प्रिंस दो माह जेल में रहे, डेढ़ साल निलंबित
मुलाना| पार्षद प्रिंस पर उसके कुछ साथियों के साथ जन्माष्टमी मेले में युवती से छेड़छाड़ करने और उसके भाई की बाइक से टक्कर मारने का आरोप लगा था। जिस समय वहां मौके पर पुलिस पहुंची तो उनकी बराड़ा पुलिस के साथ भी कुछ कहासुनी हो गई थी। उसके बाद बराड़ा पुलिस उन्हें अपने साथ थाने में ले गई थी। थाने में पहुंचने पर पुलिस ने प्रिंस एवं उसके साथियों पर थाने में रखे दो कंप्यूटर तोड़ने व पुलिस कर्मचारियों के साथ बदसलूकी करने के भी आरोप लगा 9 धाराओं में केस दर्ज किया था। प्रिंस को दो महीने जेल में रहना पड़ा था। 13 मार्च को कोर्ट ने प्रिंस एवं उसके साथियों को बेगुनाह मानते हुए बरी कर दिया था।