कुशल श्रमिकों की कमी ने रोका इंडस्ट्री का पहिया

  • लॉकडाउन के दूसरे चरण में फैक्ट्री चलाने की मंजूरी लेने के बाद भी कामगारों की कमी से बढ़ रही समस्या

रोहतक. लॉकडाउन 4.0 शुरू हो चुका है। प्रशासन के मुताबिक अब तक 2200 औद्योगिक इकाइयों में 33 हजार श्रमिक काम पर लौट चुके हैं, लेकिन अभी भी औद्योगिक इकाइयों के हालात ज्यादा सुधर नहीं पाए है। कुशल श्रमिकों की कमी इन्हें अभी भी खल रही है, जो लेबर अब यहां पर बची है, उनमें कुशल श्रमिकों की संख्या काफी कम है।
एेसे में औद्योगिक इकाइयों को संचालन में दिक्कतें आ रही हैं और हाल ये है कि मंजूरी लेने के बाद भी उद्योगपति अपनी औद्योगिक इकाइयों को पूरी तरह से नहीं चला पा रहे हैं और कुशल मजदूरों के लिए उन्हें दूसरे जिलों से भी संपर्क करना पड़ रहा है। कई फैक्टरी संचालक तो ऐसे हैं, जिन्होंने लॉकडाउन के दूसरे चरण में ही फैक्ट्री चलाने की मंजूरी ले ली थी, आज तक उन्हें कुशल मजदूर नहीं मिल पाने के चलते फैक्टरी का संचालन ही नहीं हो पाया है। ऐसे में फैक्ट्री सुनसान पड़ी है। रोजाना फैक्ट्री में आते जरूर है, ताकि देख-रेख चलती रहे, लेकिन संचालन ना होने के कारण मायूस ही लौटना पड़ता है। जिले में उद्योगों को चलाने की छूट के बीच मंजूरी तो उद्योगपतियों की ओर से ले ली गई, लेकिन अब उन्हें चलाने के लिए जद्दोजहद करनी पड़ रही है।
जहां पर उद्योगपतियों ने मंजूरी ले ली है वे तीन शिफ्ट में अभी काम नहीं कर पा रहे हैं। इसका कारण कुशल श्रमिकों की कमी होना है। जब तक श्रमिकों की कमी बनी रहेगी, बड़ी फैक्ट्री भी चल पाने में दिक्कत बनी हुई हैं। जो उद्योगपति दो से तीन शिफ्ट चलाना चाहते हैं, वे अब सिर्फ एक ही शिफ्ट में काम कर पा रहे हैं। इससे उत्पादन क्षमता कम बनी हुई है। लेबर ना होने के कारण हिसार रोड पर कई फैक्ट्री बंद पड़ी हैं।
इन उद्योगपतियों ने यूं बयां की अपनी परेशानी, बोले- लेबर न होने से फैक्ट्री चलाना मुश्किल हो गया
आधी लेबर के सहारे कब तक चलेगी फैक्ट्री : साहनी

^पहले तो मंजूरी लेने के लिए चक्कर काटने पड़े। तब जाकर आंशिक राहत मिली है। अब मेरी फैक्टरी में लगभग आधी लेबर ही काम कर रही हैं। लेबर न होने के कारण फैक्ट्री चलाना मुश्किल हो गया हैं। प्रोडक्शन के काम में आधी अधूरी लेबर से काम करने से नुकसान ज्यादा हो रहा हैं। चूंकि जरूरत कुशल मजदूरों की हैं, जोकि यहां पर जल्दी से मिल नहीं पाते हैं। मुश्किल से मजदूरों को रोक कर रखा था, लेकिन उनके जाने की व्यवस्था बन जाने के कारण वे घर लौट गए। वेतन भी पूरी दे रहे थे। आने वाले समय में लेबर की समस्या फैक्टरी मालिकों को सता रही हैं। – राज साहनी, मालिक, राज किचन।
मंजूरी लेकर खाली ही बैठे हैं फैक्टरी में : ढींगरा
शहर में हर रोड पर लेबर तो खूब नजर आती है, लेकिन यह सिर्फ घर जाने वालों की ही कतारें हैं। इनमें कुशल श्रमिकों की संख्या ना के बराबर हैं। यही कारण है कि लॉकडाउन के बाद से लेबर ना होने के कारण आज तक फैक्टरी नहीं चला पाए। घर जाती लेबर को देखकर काम करने वाली लेबर का भी हौसला टूट रहा हैं। वह भी घर जाने की ही बात कर रहे हैं। उन्हें लगातार कभी ज्यादा पैसे की बात कहकर तो कभी जल्द ही उन्हें घर भेजने की बात कहकर रोक रहे हैं, लेकिन मजबूरी में अब फैक्ट्री को बंद ही करना पड़ा है। चूंकि यूनिट चलाने पर खर्चे भी आते हैं। उत्पादन होता नहीं। -विशाल ढींगरा, मालिक, दुर्गा ऑटो।
स्टेशन से 5 दिन बाद लौटी है लेबर, खूब मनाया : अरोड़ा
मंजूरी लेने के बाद से ही परेशानी झेल रहे हैं। पहले तो बंद पड़ी फैक्टरी के बावजूद श्रमिकों को वेतन जुगाड़ करके दिया। अब जैसे ही वेतन दिया तो वे अपने घर जाने की कहने लगे। अभी 12 तारीख को फैक्ट्री से 10-12 लेबर चली गई थी। उन्हें ट्रेन से बिहार जाने की उम्मीद थी। परंतु 5 दिन तक स्टेशन के आस-पास ही ट्रेन के इंतजार में बेठे रहे। इन्हें खूब मनाया है, अब जब कोई ट्रेन नहीं चली तो आज ही काम पर वापस लौट आए हैं। शुक्र से अब फैक्ट्री में एक शिफ्ट तो चालू हो पाई। अभी तक तो ऐसा लग रहा था कि मंजूरी होने के बाद भी फैक्टरी नहीं चल पाएगी। – पंकज अरोड़ा, मालिक, पीवी फोर्ज।
दूसरे जिलों से मांग रहे हैं श्रमिक : कोचर
कुशल श्रमिक नहीं हैं। जैसे ही पेमेंट की ताे श्रमिक चले गए। अब गुरुग्राम के फर्रुखनगर और करनाल में संपर्क किया है कि वहां किसी यूनिट के पास श्रमिक हो तो अपना भी काम चलाएं। फिर उत्पादन भी कम ही हो पा रहा है। उद्योगपतियों ने श्रमिकों को काम देने के लिए ही प्रशासन से उद्योग चलाने की मंजूरी मांगी थी। अब सरकार को चाहिए कि प्रदेश से मजदूरों के जाने की व्यवस्था तो कर दी गई, जो काम पर लौटना चाहते हैं, उनके लिए भी सरकार की ओर से व्यवस्था की जानी चाहिए। उन कुशल श्रमिकों के आने से भी उद्योगों को चलाने में मदद मिलेगी। – अंगद कोचर, प्रधान, लघु उद्योग भारती।
ये हैं उद्योगपतियों की मांग, गौर करे सरकार

  • इंडस्ट्री को जीएसटी जमा करवाने के लिए लॉकडाउन के बाद 6 महीने का समय दिया जाएं।
  • बिजली के फिक्स्ड चार्जेज 6 महीने तक माफ किए जाए और सही रीडिंग के अनुसार बिजली के बिल भेजे जाए
  • श्रमिकों के वेतन का सरकार भुगतान करें।
  • इंडस्ट्री के सारे टैक्स को 6 महीने आगे किया जाए।
  • नॉन परफार्मिंग खातों को 90 दिन से बढ़ाकर 180 दिन की समय सीमा दी जाए।
  • लॉकडाउन पीरियड के दौरान बैंक का पूरा ब्याज माफ किया जाएं
  • बैंकों की सारी किश्तें बिना ब्याज 6 महीने के लिए आगे की जाएं।