आधार नहीं है तो स्कूल रजिस्ट्रेशन नंबर से ही मिलेगा दाखिला

  • सरकारी स्कूलों में छात्र संख्या बढ़ाने के लिए शिक्षा निदेशालय ने दिए निर्देश

रोहतक. कोरोना संक्रमण के चलते 31 मई तक लॉकडाउन है। ऐसे में स्कूल बंद हैं। विद्यार्थी घर पर ही सोशल मीडिया के माध्यम से ऑनलाइन पढ़ाई कर रहे हैं। ई-लर्निंग के जरिए छात्र-छात्राएं जिस तरह से पढ़ाई कर रहे हैं, उसी तरह से शिक्षक विद्यार्थियों के दाखिले भी कर रहे हैं। ऑनलाइन दाखिले में आधार कार्ड सबसे बड़ी बाधा बन रहा था। इसलिए शिक्षा निदेशालय ने अब मूल दस्तावेजों छूट दे दी है। जिस विद्यार्थी के पास आधार कार्ड नहीं है, वह अब एसआरएन यानि स्कूल रजिस्ट्रेशन नंबर पर दाखिला ले सकता है। निदेशालय का उद्देश्य सरकारी स्कूलों में छात्र संख्या को बढ़ाना है। ऐसे में शिक्षकों से कहा कि वह अभिभावकों पर एसएलसी या आधार देने को लेकर कोई दबाव मत बनाएं।

स्कूल में बच्चों के आने के बाद बचे कोरम को पूरा किया जाएगा

इन दिनों सरकारी स्कूलों के शिक्षक, एसएमसी कमेटी, मिड-डे मील वर्कर व हेल्पर सभी प्रवेश प्रक्रिया पर जोर दे रहे हैं। जो छात्र 5वीं से अपग्रेड होकर छठीं या 8वीं से 9वीं कक्षा में जाना चाहता है, उनके दाखिले एसआरएन नंबर से ही किए जाएं। यह प्राइमरी से मिडिल, हाई से सीनियर सेकंडरी स्कूलों में अपग्रेड होकर जाने वाले विद्यार्थियों के लिए है। इन विद्यार्थियों के पास अगर एसएलसी है तो वही काफी है। बाकी दस्तावेज की मांग न की जाएं। आधार नहीं होने पर किसी भी विद्यार्थी को दाखिला देने से मना ना किया जाए। लॉकडाउन पीरियड में इस पर छूट रहेगी। लॉकडाउन खुलने के बाद जैसे ही विद्यार्थी स्कूलों में आना शुरू करेंगे, उनसे बाकी का कोरम पूरा कर लिया जाएगा। एमआईएस पोर्टल भी तभी अपडेट हो जाएगी। अभी विद्यार्थी की जितनी जानकारी है, उतनी ही पोर्टल पर अपडेट कर दें।

सरकारी स्कूलों में अब दाखिले के लिए आधार कार्ड जरूरी नहीं
^सरकारी स्कूलों में अब दाखिले के आधार कार्ड जरूरी नहीं है। विद्यार्थियों का दाखिला एसआरएन नंबर या एसएलसी पर भी हो जाएगा। बाकी दस्तावेज स्कूल खुलने के बाद पूर कर लिए जाएंगे। अब से स्कूलों में जरूरी काम को लेकर प्राचार्य, क्लर्क और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी जा सकते हैं। पहले यह आदेश निजी स्कूलों के लिए था, पर अब सरकारी स्कूलों के लिए भी निदेशालय ने निर्देश दिए हैं। कर्मचारी को अपने साथ मास्क वे सेनिटाइजर रखना जरूरी है। -कृष्णा फौगाट, डिप्टी डीईओ, रोहतक।

अंग्रेजी मीडियम स्कूलों को लेकर करें ज्यादा प्रचार-प्रसार

जिले में कई सरकारी स्कूलों के अंदर अंग्रेजी मीडियम भी चल रहा है। इनके बारे में स्कूल स्तर कमेटी के सदस्य, शिक्षक और मिड-डे मील वर्कर ग्रामीण क्षेत्र में ज्यादा से ज्यादा प्रचार-प्रसार करें ताकि यहां छात्र संख्या का ग्राफ बढ़ें। अभिभावकों को सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को मिलने वाली सभी सुविधाओं के बारे में भी बताएं।

प्रवासी मजदूरों के बच्चों की भी ले रिपोर्ट

अभी सभी जिलों से प्रवासी मजदूर काफी संख्या में अपने परिवार के साथ अपने घरों को लौट रहे हैं। चूंकि, सरकारी स्कूलों में यूपी-बिहार के ही बच्चों की संख्या ज्यादा थी। ऐसे में इनकी भी रिपोर्ट लें। प्रवासी मजदूरों से भी संपर्क करें। ताकि ड्राप आउट कम किया जाएं।