स्टेट नाके पर दिन-रात पैदल आ रहे मजदूर, बच्चों के पैरों में सूजन और महिलाओं को तकलीफ, समाजसेवी बन रहे सहारा

  • पनिहारी के पास पुलिस प्रशासन के सहयोग से लोगों ने मजदूरों को रोडवेज में सिकंदरपुर पहुंचाया

डबवाली. पंजाब से यूपी बिहार जाने के लिए प्रवासी और मजदूर रोजाना रात ही नहीं दिन में भी नाके और खेतों के रास्ते आ रहे हैं। उन्हें पंजाब के बाद हरियाणा में भी सरकारी स्तर पर सहायता नहीं मिल रही है। अंतरराज्यीय नाके पर रात को पंजाब से मजदूर परिवार शहर में पहुंचे। जिनके पास अपना जरूरी सामान और बच्चे व महिला भी हैं। नाके पर प्रवेश से पहले मजदूर भोजन और बच्चे के दूध और बिहार जाने वाले वाहन की मांग करते हैं। इनकी दशा देखकर ड्यूटीरत पुलिस कर्मचारी भी संकट में है कि वे उन्हें भूखे प्यासे वापिस पंजाब भेज दे या बिना पास के आश्रय मुहैया करवा दें। मजदूरों का टका सा जवाब मिलता है कि हमारे पास तो भोजन पानी ही नहीं है फिर पास और बस रेलगाड़ी तो बस की बात ही नहीं है। जिन लोगों को वापस भेजा जाता है वे भी गलियों और खेतों के रास्ते शहर में आ जाते हैं जबकि दशा देखकर नाके से भी कुछ मजदूरों को भोजन पानी और आश्रय के लिए बाबा विश्वकर्मा गुरुद्वारा की ओर भेजकर सहयोग किया जा रहा है।
संस्था के मार्फत खान पान और आश्रय के अलावा दूरदराज के मजदूरों को पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराकर प्रशासनिक व्यवस्था के तहत अपने राज्य तक जाने की भी अपील होती है लेकिन मजदूर न रुकना ही सबसे उचित समझ रहे हैं। नाके पर ड्यूटी दे रहे स्टाफ ने बताया कि रात को भी 15 लोग महिला और बच्चों सहित पैदल पहुंचे थे जिन्हें भोजन की सुविधा संस्था की ओर से आधी रात को भी दी गई लेकिन वाहन सुविधा सरकार और प्रशासनिक अधिकारी नाकों पर मुहेया करवाएगी उसी दिन ही संभव हो सकेगी।
सरकारी व्यवस्था से ज्यादा गुरुद्वारे और संस्था में भरोसा
शहर के दो और पंजाब राज्य की सीमा पर रोजाना दिन और रात में पैदल और निजी वाहनों पर प्रवासी और मजदूर आ रहे हैं। जिनको भोजन और बच्चों के लिए दूध की सबसे बड़ी समस्या है । उपमंडल प्रशासन की ओर से लापरवाही बरती जा रही है और सीमावर्ती क्षेत्र होने से पंजाब व राजस्थान जाने वालों को भी रजिस्ट्रेशन कर पहले सिरसा जाने की मज़बूरी है जबकि दोनों राज्य डबवाली से अधिक नजदीक है।
एक्सपर्ट व्यू : प्रवासियों को सुरक्षा का माहौल चाहिए
राजकीय कॉलेज के कार्यकारी प्रिंसिपल एवं मनोवैज्ञानिक डॉ राकेश भाटी ने बताया कि फिलहाल सबसे बड़ी जरूरत प्रवासियों को यहीं रोकने की है इसके लिए उन्हें सुरक्षा का एहसास करवाने का सामूहिक प्रयास करना होगा। जो लोग प्रवासी हैं उन्हें तुरंत अपने हुनर वाले काम पर लगाना चाहिए। इससे काफी लोग यहां रुकेंगे और स्थानीय स्तर पर मजदूरों की कमी की समस्या भी
नहीं रहेगी।