फास्टैग काम नहीं कर रहा है तो चुकाना होगा दोगुना शुल्क

नई दिल्ली. सरकार ने साफ किया है कि अवैध और निष्क्रिय फास्टैग (FASTag) वाले वाहनों को राष्ट्रीय राजमार्गों यानी एनएच के टोल प्लाजा पर दोगुना शुल्क देना पड़ेगा। इससे पहले दोगुना शुल्क सिर्फ उन वाहनों से लिया जाता था, जिनके पास फास्टैग नहीं होता था और वे फास्टैग के लिए आरक्षित लेन में प्रवेश कर जाते थे। नए नियमों के तहत उनसे भी दोगुना शुल्क लिया जाएगा जिनके वाहन में फास्टैग तो लगा होगा लेकिन वह किसी भी वजह से अवैध या निष्क्रिय होगा। परिवहन मंत्रालय ने कहा है कि राजमार्गों पर टोल प्लाजा की दरों और संग्रह का निर्धारण नियम, 2008 में संशोधन कर फास्टैग नहीं लगे वाहनों के लिए यह शुल्क दर तय की गई है। बता दें, इस साल मई आरंभ होने तक देशभर में 3.68 करोड़ फास्टैग बांटे गए हैं। सरकार ने एनएच के टोल प्लाजा से गुजरने वाले वाहनों के लिए पिछले साल 15 दिसंबर से ही फास्टैग अनिवार्य कर दिया था। हालांकि फास्टैग की कमी को देखते हुए वाहन चालकों को एक महीने की राहत दी गई थी।

क्यों अवैध या निष्क्रिय हो सकता है FASTag

अधिकांश मामलों में बैलेंस नहीं होने पर फास्टैग काम नहीं करता है। दरअसल, चालक एक टोल से दूसरे टोल गुजरता रहता है, लेकिन बैलेंस चेक नहीं करता है। जब बैलेंस निर्धारित सीमा से कम हो जात है तो राशि अपने आप नहीं कटती है। हालांकि फास्टैग सेवा प्रदान करने वाले बैंकों ने एसएमएस सुविधा दी है। यानी हर बार जब आप किसी टोल से गुजरेंगे और आपके खाते से पैसे कटेंगे, रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एसएमएस आएगा जो बैलेंस बताएगा। बैलेंस कम करने पर मोबाइल से बड़ी आसानी से रिचार्ज किया जा सकता है।