गुहला-चीका समेत कैथल-कुरुक्षेत्र के 7 ब्लॉकों में धान खरीद न करने का प्रदेश सरकार का निर्णय तानाशाहीपूर्ण: सुरजेवाला

  • प्रेसवार्ता में कांग्रेस के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला बोले-भाजपा-जजपा सरकार बनी किसान की दुश्मन

कैथल. कांग्रेस के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने चीका की अनाजमंडी का दौरा कर आढ़ती-किसान-मजदूरों से वार्ता की और इसके बाद पत्रकार वार्ता को संबोधित किया। सुरजेवाला ने कहा कि खट्टर सरकार आए दिन उत्तरी हरियाणा, खासतौर से कैथल जिले के किसान से दुश्मनी निकाल रही है। आए दिन किसान को नए नए घाव देना खट्टर सरकार की आदत बन गई है।
सुरजेवाला ने कहा कि अब तो पानी सर से पार हो गया है, क्योंकि खट्टर सरकार ने कैथल के किसान की खेती उजाड़ने, आढ़ती व दुकानदार का धंधा बंद करने तथा राइस शैलर व चावल उद्योग पर तालाबंदी करने का प्लान बना 9 मई, 2020 को एक तानाशाही हुक्मनामा जारी कर दिया है। गुहला चीका समेत कैथल-कुरुक्षेत्र जिले के सात ब्लॉकों के किसानों की धान न खरीदने व सभी सब्सिडी का लाभ न देने का खट्टर सरकार का फैसला तानाशाहीपूर्ण है।
सुरजेवाला ने कहा कि पिछले साल भी खट्टर सरकार ने धान की फसल की जगह मक्का पैदा करने के लिए ‘जल ही जीवन’ स्कीम 7 ब्लॉक में शुरू की थी। इन 7 ब्लॉकों में भी कैथल का पुंडरी ब्लॉक व कुरुक्षेत्र का थानेसर ब्लॉक शामिल किया गया था। इन इलाकों में धान की जगह मक्का की खेती करने के लिए 2000 रु. प्रति एकड़ कैश, 766 रु. प्रति एकड़ बीमा प्रीमियम व हाईब्रिड सीड देने का वादा किया था व 50,000 हेक्टेयर यानि 1,37,000 एकड़ में धान की बजाए मक्का की खेती होनी थी। परंतु न तो किसान को प्रति एकड़ मुआवजा मिला, न बीमा हुआ, हाईब्रिड सीड फेल हो गया और पूरी स्कीम केवल एक कागजी पुलिंदा बनकर रह गई। अब नाम बदलकर कैथल कुरुक्षेत्र के किसान की रोजी रोटी पर हमला बोलने के लिए खट्टर सरकार ‘मेरा पानी, मेरी विरासत’ स्कीम ले आई है, जो पूरी तरह तानाशाही व गैरकानूनी है।

इन सवालों का सुरजेवाला ने सरकार से मांगा जवाब

रणदीप सुरजेवाला ने सरकार से सवालों के जवाब मांगते हुए कहा कि किसानों की रोजी रोटी छीन धान पर रोक क्यों लगाई। क्या इस साल 50 प्रतिशत से अधिक धान बीजने पर लगाई गई पाबंदी अगले साल तक बढ़कर 100 प्रतिशत हो जाएगी? क्या यह किसान को उजाडऩे, आढ़ती का धंधा बंद करने व राईस मिलों पर तालाबंदी करने का कार्य नहीं है? क्या खट्टर सरकार द्वारा दादूपुर नलवी रिचार्ज नहर परियोजना को बंद करने के निरंकुश निर्णय की सजा अब उत्तरी हरियाणा, खासतौर से कैथल-कुरुक्षेत्र का किसान भुगत रहा है? भाजपा-जजपा सरकार के मंत्री-विधायक-सांसद हाथ पर हाथ धरे क्यों बैठे हैं, जबकि किसानों, आढ़तियों व राईस मिल व्यापार को उजाड़ा जा रहा है? क्या यह कैथल-कुरुक्षेत्र के लोगों के अधिकारों की रक्षा करने में फेल साबित हुए हैं?