इम्यूनिटी सिस्टम ठीक होगा तो संक्रमण का खतरा रहेगा कम

  • इंटरनेशनल वेबिनार का आयोजन, देश के कई राज्यों के फार्मेसी विभाग के प्रसिद्ध प्रोफेसर एवं रिसर्च साइंटिस्ट ने लिया भाग

सिरसा. जेसीडी कॉलेज ऑफ फार्मेसी की तरफ से कोविड-19 महामारी पर इंटरनेशनल वेबिनार का आयोजन किया गया, जिसमें मुख्य वक्ता जॉर्जिया स्टेट यूनिवर्सिटी संयुक्त राष्ट्र अमेरिका के प्रसिद्ध बायोलॉजिस्ट एवं इम्यूनोलॉजिस्ट डॉ. मुकेश ग्रोवर एवं जेसीडी विद्यापीठ प्रबंधक निर्देशक डॉ. शमीम शर्मा ने वेबिनार में बतौर मुख्यातिथि शिरकत की। इंटरनेशनल वेबिनार की अध्यक्षता जेसीडी कॉलेज ऑफ फार्मेसी की प्राचार्या डॉ. अनुपमा सेतिया द्वारा की गई। इस अंतर्राष्ट्रीय वेबिनार में देश के भिन्न-भिन्न राज्यों के फार्मेसी विभाग के प्रसिद्ध प्रोफेसर एवं रिसर्च साइंटिस्ट ने भाग लिया।
वेबिनार के मुख्य वक्ता डॉ. ग्रोवर ने संयुक्त राष्ट्र अमेरिका से अपना अनुभव सांझा करते हुए कोविड-19 महामारी के बारे में विस्तार से बताया कि कैसे यह वायरस सांस के जरिए मानव शरीर में प्रवेश करता है और कैसे यह फेफड़े, श्वसन तंत्र, किडनी, आंत यह चार अंगों को मुख्यत प्रभावित करता है। उन्होंने बताया कि अधिकांश मामलों में इसका हमला फेफड़ों पर होता है जहां से यह मानव शरीर में प्रवेश करता है। यहां इसके एंट्री के बाद सूजन आ जाता है और न्यूमोनिया के लक्षण दिखाई देते हैं। फेफड़ों पर इसका अटैक सबसे पहले होता है और यहां यह अधिक नुकसान पहुंचाता है और इसलिए ऑक्‍सीजन व वेंटीलेटर की जरूरत होती है।
डॉ. ग्रोवर ने बताया कि यदि आपका इम्यूनिटी सिस्टम ठीक होगा तो कोरोना वायरस के संक्रमण का खतरा कम से कम है। शरीर को बाहरी संक्रमण से बचाकर रखने के लिए शरीर के अंदर एक रक्षा प्रणाली होती है, जिसे इम्यून सिस्टम या रोग प्रतिरोधक शक्ति कहते हैं। कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों को कोरोना संक्रमण का खतरा ज्यादा है। डॉ. मुकेश ग्रोवर ने दावा किया है कि उनके नेतृत्व में प्रयोगशाला में वैज्ञानिकों की टीम ने रिसर्च के बाद यह पाया की ऑरनोफिन नामक दवाई से 24 घंटे में 85% और 48 घंटे में 95% वायरस नष्ट हो जाते हैं और इस रिसर्च से एक महत्वपूर्ण बात यह भी आई है किस दवा का रोगी की कोशिकाओं में कोई घातक असर नहीं दिखाई दिया।
कोरोना इलाज के लिए कुछ और हल तलाश कर रहे हैं और उनका परीक्षण अभी बाकी है, फिलहाल जब तक कोई और स्टीक दवा नहीं मिलती तब तक ऑरनोफिन का प्रयोग राहत दे सकता है।