अनाजमंडी में कट्टों में से गेहूं के बदलने का सिलसिला जारी

  • आढ़तियों को चिंता-किसी भी तरीके से एजेंसियों को दिया गया गेहूं उठवा दिया जाए

कैथल. अनाज मंडी में बारिश में भीगे गेहूं को सूखाने व डैमेज गेहूं को कट्टों में से छंटाई करने का सिलसिला जारी है। एजेंसियों द्वारा खरीद किये गए गेहूं के आढ़तियों द्वारा जो बिल काटे गए हैं, अब उनकी संख्या पूरी करने के लिए आढ़ती नया गेहूं खरीदकर कट्टे भरने में लगे हुए हैं।
 आढ़तियों को अब एक ही चिंता सता रही है कि किसी भी तरीके से एजेंसियों को दिया गया गेहूं उठवा दिया जाए। मंडी में इस समय लगभग 50 हजार कट्टे गेहूं हैफेड व डीएफएससी के पड़े हुए हैं। मंडी में इस समय लोडिंग करने के लिए वाहनों की भी कोई कमी नहीं हैं, लेकिन आढ़तियों को हर समय ये चिंता जरूर सताती है कि वे जो गेहूं के कट्टे ट्रक में लोड करवाकर सोलो गोदामों भेजते हैं, वे वहां उतर भी जाएंगे या नहीं, क्योंकि वहां से अधिकतर कट्टों को नमी, डैमेज या अन्य बहाने बनाकर वापस भेज दिया जाता है।
 जिससे आढ़तियों को मजदूरी व किराये का नुकसान हो जाता है। बारिश में भीगे कट्टों में गेहूं खराब हो चुकी थी, जो अब मंडी में शेष पड़ी हुई है। जिसको लोकल में लगवाने के उद्देश्य से आढ़तियों का एक शिष्टमंडल पर्यटन निगम के चेयरमैन रणधीर गोलन से भी मिला था, लेकिन एजेंसियों को एफसीआई को दिया जाने वाला गेहूं का टारगेट पूरा करना है। फूडग्रेन डीलर एसोसिएशन के अध्यक्ष ध्यानचंद मूंदड़ी, सतपाल डीग, सुनहरा सिंह, रामप्रकाश गोगी, कृष्ण कुमार व अमृतलाल ने बताया कि पहली बार गेहूं के सीजन में उन्हें सबसे अधिक परेशानी व नुकसान उठाना पड़ रहा है। सीजन के दौरान गेहूं का उठान धीमी गति से होने के कारण मंडी में लाखों कट्टे गेहूं जमा हो चुकी थी, ऐसी स्थिति में आढ़तियों को गेहूं नीचे में मंडी की सडक़ों पर उतरवानी पड़ी और जब मौसम खराब होने से बारिश हुई तो सबसे अधिक यही कट्टे प्रभावित हुए और उनमें से आधे-आधे कट्टों की गेहूं पूरी तरह डैमेज हो गई। जिसका खामयाजा अब आढ़तियों को भुगतना पड़ रहा है। आढ़तियों ने सरकार से मांग की कि अब जो मंडी में हजारों कट्टे शेष पड़े हुए है, उन्हें पूंडरी के गोदामों में ही लगवाया जाए, ताकि गेहूं कट्टे रिजक्ट होने की स्थिति में आढ़तियों को अतिरिक्त किराये का नुकसान ना सहन करना पड़े।